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HD Deve Gowda: जब धान की एक किस्म को दे दिया गया था पूर्व प्रधानमंत्री का नाम, जानें क्या थी वजह?

Sun, 12 Dec 2021 07:11 PM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र Updated Sun, 12 Dec 2021 07:11 PM IST
सार

पत्रकार सुगाता श्रीनिवासराजू ने अपनी किताब फरोज इन अ फील्ड- द अनएक्स्प्लोर्ड लाइफ ऑफ एचडी देवगौड़ा में पूर्व प्रधानमंत्री से जुड़े कई किस्सों को सामने रखा है। 

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When Punjab farmers named a rice variety Dev Gowda and other memories of Ex PM of India revealed in biography news and updates
एचडी देवगौड़ा (फाइल फोटो) - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

भारत के पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा को किसानों के मुद्दों का बड़ा समर्थक माना जाता रहा है। बताया जाता है कि किसान समुदाय के प्रति उनकी इसी प्रतिबद्धता को देखते हुए पंजाब के किसानों ने धान की एक बेहतरीन किस्म का नाम उनके नाम पर रख दिया था। यह बात सामने आई है देवगौड़ा के जीवन पर हाल ही में लिखी गई एक किताब में। 
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पत्रकार सुगाता श्रीनिवासराजू ने अपनी किताब फरोज इन अ फील्ड- द अनएक्स्प्लोर्ड लाइफ ऑफ एचडी देवगौड़ा में लिखा, ‘‘एक विधायक और सांसद के तौर पर गौड़ा को सदन की मर्यादा का कभी भी उल्लंघन करने के लिए नहीं जाना गया। हालांकि, अपने लंबे चले राजनीतिक करियर में केवल एक बार उन्होंने खुद पर लागू किए गए इस सिद्धांत का उल्लंघन किया और यह तब था जब उन्हें किसानों की भलाई को को लेकर खतरा महसूस हुआ था।’’
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लोकसभा में स्पीकर के सामने किया था प्रदर्शन 
31 जुलाई और एक अगस्त 1991 को लोकसभा में हुई घटनाओं का जिक्र करते हुए किताब में बताया गया है कि कैसे मनमोहन सिंह के पहले बजट पर एक तीखी चर्चा के दौरान सरकार पर कृषि क्षेत्र में सब्सिडी समाप्त करने से जुड़े फैसले को वापस लेने के लिए देवेगौड़ा दबाव बनाने में जुटे थे और इसके लिए वे स्पीकर के सामने तक पहुंच गये थे। उन्होंने कहा था, ‘‘मैं एक किसान का बेटा हूं और इसकी इजाजत कतई नहीं दूंगा। मैं धरने पर बैठूंगा। मैं इस सदन से बाहर नहीं जाऊंगा। मैं जो कर रहा हूं, यह प्रचार के लिए नहीं है।’’ 
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जब दो हजार किसानों का जत्था लेकर दिल्ली पहुंच गए थे देवगौड़ा
किताब में कहा गया है कि साल 2002 में, जब पूरे भारत से बड़ी संख्या में किसानों की आत्महत्या की खबरें आ रही थीं, गौड़ा कर्नाटक के लगभग दो हजार किसानों के एक प्रतिनिधिमंडल को ट्रेन से दिल्ली ले गए और उनकी तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी से बैठक कराई। इस किताब में कहा गया है, ‘‘यह अभूतपूर्व था, विशेष रूप से एक पूर्व प्रधानमंत्री के लिए इस तरह से विरोध करना। दिल्ली में लोग इससे चौंक गए थे।’’

किसानों ने धान की किस्म का नामकरण कर जताया था आभार
श्रीनिवासराजू ने किताब में लिखा है, ‘‘किसानों के लिए गौड़ा की आजीवन प्रतिबद्धता, और किसान समुदाय के प्रति उनकी नीतिगत पहल और 1996-97 के शानदार किसान समर्थक बजट के लिए पंजाब के किसानों ने उस वक्त धान की बेहतरीन किस्मों में से एक को 'देवगौड़ा' के रूप में नामित किया, जब उन्होंने प्रधानमंत्री के रूप में पद छोड़ा।

उन्होंने लिखा, ‘‘आमतौर पर अच्छी तरह से जानकारियों से अवगत रहने वाले गौड़ा खुद इस धान की किस्म के बारे में नहीं जानते थे। उन्हें इस बारे में तब पता चला जब कर्नाटक कैडर के पंजाब के आईएएस अधिकारी चिरंजीव सिंह ने 2014 में कन्नड़ अखबार के कॉलम में इसके बारे में लिखा।’’


महेंद्र टिकैत ने कहा था दक्षिण के चौधरी चरण सिंह
किताब में यह भी कहा गया है कि कैसे 1996 में, पश्चिमी उत्तर प्रदेश के किसान नेता महेंद्र सिंह टिकैत ने मुजफ्फरनगर में एक बैठक में देवेगौड़ा को ‘दक्षिण के चौधरी चरण सिंह’ के रूप में सम्मानित किया। देवेगौड़ा सार्वजनिक जीवन में करीब सात दशक से हैं। उन्होंने होलेनारसीपुर तालुक विकास बोर्ड के सदस्य के रूप में शुरुआत की और 1996 में भारत के 11वें प्रधानमंत्री के रूप में शीर्ष पद पर पहुंचे।
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