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...जब पंडित दीनदयाल उपाध्याय का घर देखकर रो पड़े थे मोदी
पुनीत शर्मा/ अमर उजाला, मथुरा
Updated Fri, 23 Sep 2016 03:59 PM IST
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पंडित दीनदयाल उपाध्याय का घर देखकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी रो पड़े थे। राज्यपाल रामनाईक को अपने पास बुलाकर कहा कि देखो किस हालात में रहते थे हमारे पंडितजी। बहुत बलिदान किया है। तपस्वी का जीवन जिया है इन्होंने। इस समय पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्मशताब्दी समारोह मनाने के लिए उनका पैतृक गांव नगला चंद्रभान सजाया जा रहा है।
25 मई 2015 को दोपहर करीब दो बजे का वक्त रहा होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार का एक साल पूरा होने पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय के गांव नगला चंद्रभान पहुंचे थे। यहां दीनदयाल धाम में पंडितजी के तमाम चित्र लगे हैं। कोई चित्र उनकी संघर्ष गाथा को कह रहा है तो कोई उनके साधारण व्यक्तित्व को दर्शा रहा है। दीनदयाल धाम के निदेशक पदम उस वक्त को याद करते हुए बताते हैं, सभी चित्रों को मोदीजी ने बारीकी से देखा।
जब वह पंडित दीनदयाल उपाध्याय के घर वाले फोटो के पास आए तो काफी देर तक निहारते रहे। अचानक उनकी आंखें भर आईं और आंसू छलक पड़े। जेब से रुमाल निकाला और आंसू पोंछे। राज्यपाल रामनाईक को बुलाकर कहा कि देखो कैसा सन्यासी जैसा जीवन व्यतीत किया है पंडितजी ने, एक दम साधारण। कुटिया के तो कण-कण में बलिदान भरा है। समस्याओं से लड़ने का जोश है। समाज को नई दिशा दिखाने वाली रोशनी है।
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उस वक्त दीनदयाल धाम में रहे लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री टकटकी बांधकर कुटिया को निहारते रहे थे। फोटो पर हाथ फेरा और नमन किया। बोले, पंडितजी का बलिदान कभी भूला नहीं जा सकता। यहां एलान किया था कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्मदिवस हर साल धूमधाम के साथ मनाया जाएगा।
मैने तो कई बार कहा कि शादी कर लो
पंडित दीनदयाल उपाध्याय से खुद को दस साल छोटा बताने वाले नगला चंद्रभान निवासी रामशंकर पचौरी का कहना है कि उन्होंने पंडितजी से कई बार कहा कि शादी कर लो। बच्चे होंगे परिवार होगा। लेकिन वह हमेशा कह देते थे कि पूरा देश हमारा है। यह एक परिवार ही तो है। कहने लगे कि अब तो जीवन देश के लिए कुर्बान कर दिया है। उस समय पंडितजी जनसंघ के संस्थापक महामंत्री थे।
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25 मई 2015 को दोपहर करीब दो बजे का वक्त रहा होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अपनी सरकार का एक साल पूरा होने पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय के गांव नगला चंद्रभान पहुंचे थे। यहां दीनदयाल धाम में पंडितजी के तमाम चित्र लगे हैं। कोई चित्र उनकी संघर्ष गाथा को कह रहा है तो कोई उनके साधारण व्यक्तित्व को दर्शा रहा है। दीनदयाल धाम के निदेशक पदम उस वक्त को याद करते हुए बताते हैं, सभी चित्रों को मोदीजी ने बारीकी से देखा।
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जब वह पंडित दीनदयाल उपाध्याय के घर वाले फोटो के पास आए तो काफी देर तक निहारते रहे। अचानक उनकी आंखें भर आईं और आंसू छलक पड़े। जेब से रुमाल निकाला और आंसू पोंछे। राज्यपाल रामनाईक को बुलाकर कहा कि देखो कैसा सन्यासी जैसा जीवन व्यतीत किया है पंडितजी ने, एक दम साधारण। कुटिया के तो कण-कण में बलिदान भरा है। समस्याओं से लड़ने का जोश है। समाज को नई दिशा दिखाने वाली रोशनी है।
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उस वक्त दीनदयाल धाम में रहे लोगों का कहना है कि प्रधानमंत्री टकटकी बांधकर कुटिया को निहारते रहे थे। फोटो पर हाथ फेरा और नमन किया। बोले, पंडितजी का बलिदान कभी भूला नहीं जा सकता। यहां एलान किया था कि पंडित दीनदयाल उपाध्याय का जन्मदिवस हर साल धूमधाम के साथ मनाया जाएगा।
मैने तो कई बार कहा कि शादी कर लो
पंडित दीनदयाल उपाध्याय से खुद को दस साल छोटा बताने वाले नगला चंद्रभान निवासी रामशंकर पचौरी का कहना है कि उन्होंने पंडितजी से कई बार कहा कि शादी कर लो। बच्चे होंगे परिवार होगा। लेकिन वह हमेशा कह देते थे कि पूरा देश हमारा है। यह एक परिवार ही तो है। कहने लगे कि अब तो जीवन देश के लिए कुर्बान कर दिया है। उस समय पंडितजी जनसंघ के संस्थापक महामंत्री थे।