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जब-जब विरोधियों के निशाने पर आए मोदी और ज्यादा हुए ताकतवर

Fri, 08 Dec 2017 12:18 AM IST
एजेंसी / नई दिल्ली
एजेंसी / नई दिल्ली Updated Fri, 08 Dec 2017 12:18 AM IST
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When Modi came on the target of the opponents, the more powerful
pm modi
गुजरात में 2002 के दंगों के बाद से ही नरेंद्र मोदी आलोचकों के निशाने पर हैं, लेकिन जाने-अनजाने उन पर किए गए हर हमले के बाद वे पहले से ज्यादा मजबूत बनकर उभरे हैं। उन्हें विवादास्पद और समाज को बांटकर ध्रुवीकरण करने वाला नेता करार दिया गया लेकिन इससे उन्हें नुकसान के बजाय फायदा ही हुआ है। लगातार 13 साल तक गुजरात का मुख्यमंत्री रहने के बाद वे पिछले तीन साल से प्रधानमंत्री हैं और अगले आम चुनाव में उनके सामने कोई नजर नहीं आ रहा है।
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मोदी पर सबसे पहले तीखे हमले की शुरुआत कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की तरह से हुई थी, जब वर्ष 2007 के विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान उन्होंने मोदी को ‘मौत का सौदागर’ कहा था। भारत में किसी वरिष्ठ राजनेता के खिलाफ इतनी तीखी टिप्पणी इससे पहले कभी नहीं की गई थी। हालांकि 2014 के आम चुनाव में प्रचार के दौरान सोनिया ने इससे एक कदम आगे बढ़कर मोदी पर ‘जहर की खेती’ करने का आरोप चस्पा कर दिया।
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पढ़ें- - मणिशंकर का सोनिया-राहुल पर हमला, कांग्रेस में मां-बेटे के रहते किसी का भला नहीं
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एसआईटी की क्लीन चिट से बदली तस्वीर

When Modi came on the target of the opponents, the more powerful
पीएम मोदी
2002 के दंगों में मोदी की भूमिका की जांच करने के लिए सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर गठित विशेष जांच दल (एसआईटी) ने दिसंबर, 2010 में उन्हें क्लीन चिट दे दी। इस एक फैसले ने मोदी के लिए संजीवनी का काम किया क्योंकि इसके बाद भी मोदी को फासीवादी कहने वाले राजनीतिक पंडितों और मीडिया की जनता की नजरों में कोई विश्वसनीयता नहीं रह गई। मोदी ने इसके बाद खुद पर किए गए हर हमले को अपने पक्ष में भुनाने में कामयाबी हासिल की।

उनके मुख्यमंत्री रहते गुजरात मॉडल पर सवाल उठाने वालों को उन्होंने योजना आयोग के आंकड़ों से जवाब दिया। इसी तरह उद्योगपति गौतम अडानी को जमीन के सौदों में फायदा पहुंचाने के आरोपों के जवाब में उन्होंने मीडिया से कहा कि वे कांग्रेस शासित राज्यों में अडानी के लैंड बैंक की तहकीकात करें, फिर उन पर आरोप लगाएं।

सोनिया के बाद अय्यर की टिप्प्णी ने दी ताकत

When Modi came on the target of the opponents, the more powerful
मणिशंकर अय्यर
वर्ष 2014 के आम चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस नेता मणिशंकर अय्यर ने मोदी को बैठे-बिठाए बहुत बड़ा मुद्दा दे दिया। नई दिल्ली में आयोजित कांग्रेस कार्यसमिति के अधिवेशन में अय्यर ने ताल ठोक कर घोषणा की कि 21वीं सदी में मोदी कभी देश के प्रधानमंत्री नहीं बन पाएंगे, लेकिन अगर वे कांग्रेस मुख्यालय के बाहर चाय बेचना चाहते हैं तो उनके लिए जगह का इंतजाम किया जा सकता है। इस बयान का सीधा सा अर्थ लगाया गया कि कांग्रेस अमीरों की पार्टी है और उसे गरीबों से नफरत है। मोदी सहित सभी भाजपा नेताओं ने चुनाव प्रचार में इसे जमकर भुनाया और उसके बाद जो हुआ वह इतिहास है।

आम चुनाव जीतने और प्रधानमंत्री बनने के बाद भी उन पर हमले जारी रहे, लेकिन इससे उन पर कोई फर्क नहीं पड़ा। अब हालत यह है कि विपक्ष के पास उन पर हमला करने के अलावा कोई काम नहीं बचा है, जबकि मोदी की काम करने की स्टाइल, अथक परिश्रम करने की उनकी प्रतिबद्धता और जनता की नब्ज को पहचानने की उनकी क्षमता का मुकाबला सिर्फ उनकी आलोचना से नहीं हो सकता है। उनसे बड़ी लकीर खींचने वाला कोई नेता और उसकी पार्टी ही उनका सामना कर सकती है।
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