{"_id":"676eb5cb987340b9510e002e","slug":"when-manmohan-singh-wrote-a-cheque-for-gains-accruing-from-rupee-devaluation-news-in-hindi-2024-12-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"सादगी: जब ऑस्ट्रेलिया से लौटे मनमोहन सिंह ने अपनी कमाई PMNRF में कर दी थी दान, निजी सचिव ने बताया","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
सादगी: जब ऑस्ट्रेलिया से लौटे मनमोहन सिंह ने अपनी कमाई PMNRF में कर दी थी दान, निजी सचिव ने बताया
Fri, 27 Dec 2024 07:45 PM IST
काव्या मिश्रा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: काव्या मिश्रा
Updated Fri, 27 Dec 2024 07:45 PM IST
सार
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह 1987 से 1990 तक स्विट्जरलैंड स्थित स्वतंत्र आर्थिक नीति थिंक टैंक 'साउथ कमीशन' के सचिव जनरल के रूप में सेवा प्रदान कर चुके थे। उन्होंने 1991 में अवमूल्यन के बाद एक बड़ा कदम उठाया था।
विज्ञापन
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह
- फोटो : PTI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के निधन के बाद उनसे जुड़े तमाम रोचक किस्से सामने आ रहे हैं। ऐसा ही एक किस्सा जुलाई 1991 फैसले से जुड़ा सामने आया है। दरअसल, सिंह के पास एक विदेशी बैंक खाता था, जिसमें विदेश में काम करने के दौरान कमाया गया धन मौजूद था। जुलाई 1991 में भारतीय मुद्रा के अवमूल्यन करने के सरकार के फैसले के बाद रुपये में उनकी बचत का मूल्य बढ़ गया था। मगर उस समय वित्त मंत्री रहे सिंह ने रुपयों को खुद रखने के बजाय इसे प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में जमा करा दिया था।
विज्ञापन
निजी सचिव ने याद किए पुराने पल
निजी सचिव रामु दामोदरन ने इस घटना को याद किया। उन्होंने बताया, 'अवमूल्यन के कुछ दिन बाद मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री कार्यालय आए थे। उन्होंने प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव से मुलाकात की। उसके बाद जाते समय मेरे कमरे में आए और एक छोटा सा लिफाफा दिया, जिसमें एक चेक था। इस चेक में एक महत्वपूर्ण राशि थी। उन्होंने मुझसे इसे प्रधानमंत्री के राष्ट्रीय राहत कोष में जमा करने को कहा।'
विज्ञापन
सिंह ने कोई बवाल नहीं मचाया
दामोदरन के अनुसार, यह राशि बड़ी थी, हालांकि उन्होंने इसका उल्लेख नहीं किया। मनमोहन सिंह ने यह काम अपनी स्वेच्छा से किया था। वर्तमान में न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में शांति विश्वविद्यालय के स्थायी पर्यवेक्षक के रूप में तैनात दामोदरन ने कहा कि सिंह ने विदेशी खाते में जो लाभ कमाया था, उसे उन्होंने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में जमा करवा दिया। यह कदम उन्होंने कभी सार्वजनिक नहीं किया और न ही इस पर कोई बवाल मचाया।
विज्ञापन
यह है मामला
पूर्व प्रधानमंत्री 1987 से 1990 तक स्विट्जरलैंड स्थित स्वतंत्र आर्थिक नीति थिंक टैंक 'साउथ कमीशन' के सचिव जनरल के रूप में सेवा प्रदान कर चुके थे। सिंह, जो उस समय वित्त मंत्री थे, ने 1991 में भारतीय रुपये के अवमूल्यन के बाद यह कदम उठाया था। एक जुलाई 1991 को रुपये का अवमूल्यन नौ प्रतिशत और तीन जुलाई 1991 को अतिरिक्त 11 प्रतिशत किया गया था, ताकि भारत की आर्थिक स्थिति सुधर सके और विदेशी मुद्रा संकट से निपटा जा सके। इस अवमूल्यन के बाद, विदेशी मुद्रा में जो संपत्ति थी, वह अधिक मूल्य की हो गई थी। मनमोहन सिंह ने इस निर्णय के बाद, बिना किसी हंगामे के अपने विदेशी खाते से मिलने वाले लाभ को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में दान कर दिया था।
क्या बोले दामोदरन?
1991 से 1994 तक पीएमओ में सेवा देने वाले आईएफएस अधिकारी दामोदरन ने कहा कि सिंह ने लाभ जमा करना समझदारी भरा कदम समझा। उन्होंने कहा, 'सिंह ने इसका प्रचार नहीं किया, बस चुपचाप जमा कर दिया, जो उन्हें लगा कि अवमूल्यन के परिणामस्वरूप उनकी संपत्ति के रुपये के मूल्य में अंतर था।'