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'एक दिन से क्या फर्क पड़ेगा': दिवाली से पहले रैली पर बोले संदीप दीक्षित, कारोबारियों की मांग पर क्या कहा?
Tue, 27 Oct 2026 08:30 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली।
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Tue, 27 Oct 2026 08:30 PM IST
सार
दिल्ली में दिवाली से पहले एक नवंबर को होने वाली विपक्षी गठबंधन की रैली को लेकर कारोबारी चिंतित हैं। उन्होंने रैली दिवाली के बाद कराने की मांग की है। कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने कहा कि एक दिन कारोबार प्रभावित होने से कितना फर्क पड़ेगा। कारोबारियों ने 10,000 करोड़ रुपये तक के संभावित नुकसान का अनुमान जताया है। आखिर रैली से बाजारों पर कितना असर पड़ सकता है और क्या विपक्ष तारीख बदलने की मांग मानेगा? आइए, सबकुछ विस्तार से जानते हैं...
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दिवाली से पहले रैली पर क्या बोले संदीप दीक्षित?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विस्तार
दिल्ली में दिवाली से पहले कारोबारियों ने एक नवंबर को होने वाली विपक्षी गठबंधन ‘इंडिया’ की रैली टालने की मांग की है। व्यापारिक संगठनों का कहना है कि त्योहार से ठीक पहले बाजारों में ग्राहकों की भीड़ रहती है और इस दौरान रैली से यातायात तथा कारोबार प्रभावित हो सकता है। इसी बीच कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित के बयान ने विवाद खड़ा कर दिया है। उन्होंने कारोबारियों की चिंता पर सवाल उठाते हुए कहा कि अगर एक दिन कारोबार प्रभावित होता है, तो इससे कितना फर्क पड़ेगा। उनके इस बयान पर व्यापारिक समुदाय की नाराजगी बढ़ने की आशंका जताई जा रही है।
संदीप दीक्षित ने कारोबारियों की मांग पर क्या कहा?
कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि अगर एक दिन कारोबार प्रभावित होता है, तो अगले दिन बिक्री फिर बढ़ सकती है और उसके बाद भी व्यापार चलता रहेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में बाहर से आने वाले सात से दस लाख लोग भी चार से छह घंटे के दौरान कुछ न कुछ खरीदेंगे या खाएंगे। उनके मुताबिक, कुछ लोग समोसे, कचौड़ी या चाय खरीदेंगे, तो कुछ पानी की बोतल, चिप्स, चाउमीन या आलू-पूरी खा सकते हैं। दीक्षित का तर्क था कि रैली में आने वाले लोगों से कुछ कारोबारियों को फायदा भी हो सकता है। हालांकि, त्योहार के ठीक पहले बिक्री प्रभावित होने की आशंका जताने वाले व्यापारिक संगठनों की मांग इससे अलग है।
कारोबारी एक नवंबर की रैली टालने की मांग क्यों कर रहे हैं?
व्यापारिक संगठनों और कारोबारियों ने राहुल गांधी तथा कांग्रेस से ‘चलो दिल्ली’ मार्च को दिवाली के बाद, 10 नवंबर के बाद आयोजित करने की अपील की है। उनका कहना है कि दिवाली से पहले का सप्ताहांत बाजारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान थोक और खुदरा बाजारों में बड़ी संख्या में ग्राहक खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। कारोबारियों को आशंका है कि रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली के कारण सड़कों पर भीड़ और यातायात की समस्या बढ़ सकती है, जिससे ग्राहक बाजारों तक नहीं पहुंच पाएंगे। अनुमान के मुताबिक, विपक्षी गठबंधन की रैली में करीब 10 लाख लोगों के जुटने की संभावना जताई जा रही है। कारोबारियों का दावा है कि इससे दिवाली की खरीदारी के अहम समय में उन्हें भारी नुकसान हो सकता है।
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रैली से कारोबारियों को कितने करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका है?
कारोबारियों ने एक नवंबर की रैली के कारण करीब 10,000 करोड़ रुपये तक के संभावित नुकसान की आशंका जताई है। यह व्यापारिक समुदाय की ओर से लगाया गया अनुमान है, वास्तविक नुकसान का आंकड़ा नहीं। वहीं, चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) के आकलन के मुताबिक, अक्टूबर में कनॉट प्लेस, इंडिया गेट और मध्य दिल्ली के इलाकों में रैलियों, विरोध मार्च और सड़क जाम के कारण कारोबारियों को पहले ही करीब 3000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। कारोबारियों का कहना है कि दिवाली के समय बाजारों में बिक्री का बड़ा हिस्सा कुछ खास दिनों पर निर्भर करता है। ऐसे में अगर आवाजाही प्रभावित होती है, तो छोटे दुकानदारों से लेकर थोक व्यापारियों तक को नुकसान हो सकता है।
संदीप दीक्षित ने बड़े कारोबारियों पर क्या आरोप लगाए?
संदीप दीक्षित ने कारोबारियों की आपत्तियों पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि भाजपा से करीबी संबंध रखने वाले बड़े व्यापारी जानबूझकर इस मुद्दे को एक खास दिशा में पेश कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि छोटे कारोबारियों के हितों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। दीक्षित ने कहा कि दिल्ली में हजारों और लाखों छोटे व्यापारी हैं, जिन्हें रैली के दौरान आने वाले लोगों से फायदा मिल सकता है। उन्होंने सवाल किया कि केवल बड़े कारोबारियों के नुकसान की चिंता क्यों की जा रही है। इस तरह एक नवंबर की रैली को लेकर कांग्रेस नेता के बयान और व्यापारिक संगठनों की मांग के बीच विवाद बढ़ गया है। कारोबारियों की मांग है कि रैली की तारीख दिवाली के बाद रखी जाए, जबकि दीक्षित ने एक दिन कारोबार प्रभावित होने के असर को कम करके देखने वाला तर्क दिया है।
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संदीप दीक्षित ने कारोबारियों की मांग पर क्या कहा?
कांग्रेस नेता संदीप दीक्षित ने आईएएनएस से बातचीत में कहा कि अगर एक दिन कारोबार प्रभावित होता है, तो अगले दिन बिक्री फिर बढ़ सकती है और उसके बाद भी व्यापार चलता रहेगा। उन्होंने कहा कि दिल्ली में बाहर से आने वाले सात से दस लाख लोग भी चार से छह घंटे के दौरान कुछ न कुछ खरीदेंगे या खाएंगे। उनके मुताबिक, कुछ लोग समोसे, कचौड़ी या चाय खरीदेंगे, तो कुछ पानी की बोतल, चिप्स, चाउमीन या आलू-पूरी खा सकते हैं। दीक्षित का तर्क था कि रैली में आने वाले लोगों से कुछ कारोबारियों को फायदा भी हो सकता है। हालांकि, त्योहार के ठीक पहले बिक्री प्रभावित होने की आशंका जताने वाले व्यापारिक संगठनों की मांग इससे अलग है।
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कारोबारी एक नवंबर की रैली टालने की मांग क्यों कर रहे हैं?
व्यापारिक संगठनों और कारोबारियों ने राहुल गांधी तथा कांग्रेस से ‘चलो दिल्ली’ मार्च को दिवाली के बाद, 10 नवंबर के बाद आयोजित करने की अपील की है। उनका कहना है कि दिवाली से पहले का सप्ताहांत बाजारों के लिए बेहद महत्वपूर्ण होता है। इस दौरान थोक और खुदरा बाजारों में बड़ी संख्या में ग्राहक खरीदारी के लिए पहुंचते हैं। कारोबारियों को आशंका है कि रामलीला मैदान में प्रस्तावित रैली के कारण सड़कों पर भीड़ और यातायात की समस्या बढ़ सकती है, जिससे ग्राहक बाजारों तक नहीं पहुंच पाएंगे। अनुमान के मुताबिक, विपक्षी गठबंधन की रैली में करीब 10 लाख लोगों के जुटने की संभावना जताई जा रही है। कारोबारियों का दावा है कि इससे दिवाली की खरीदारी के अहम समय में उन्हें भारी नुकसान हो सकता है।
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रैली से कारोबारियों को कितने करोड़ रुपये के नुकसान की आशंका है?
कारोबारियों ने एक नवंबर की रैली के कारण करीब 10,000 करोड़ रुपये तक के संभावित नुकसान की आशंका जताई है। यह व्यापारिक समुदाय की ओर से लगाया गया अनुमान है, वास्तविक नुकसान का आंकड़ा नहीं। वहीं, चैंबर ऑफ ट्रेड एंड इंडस्ट्री (सीटीआई) के आकलन के मुताबिक, अक्टूबर में कनॉट प्लेस, इंडिया गेट और मध्य दिल्ली के इलाकों में रैलियों, विरोध मार्च और सड़क जाम के कारण कारोबारियों को पहले ही करीब 3000 करोड़ रुपये का नुकसान हो चुका है। कारोबारियों का कहना है कि दिवाली के समय बाजारों में बिक्री का बड़ा हिस्सा कुछ खास दिनों पर निर्भर करता है। ऐसे में अगर आवाजाही प्रभावित होती है, तो छोटे दुकानदारों से लेकर थोक व्यापारियों तक को नुकसान हो सकता है।
संदीप दीक्षित ने बड़े कारोबारियों पर क्या आरोप लगाए?
संदीप दीक्षित ने कारोबारियों की आपत्तियों पर प्रतिक्रिया देते हुए आरोप लगाया कि भाजपा से करीबी संबंध रखने वाले बड़े व्यापारी जानबूझकर इस मुद्दे को एक खास दिशा में पेश कर रहे हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि छोटे कारोबारियों के हितों पर भी ध्यान दिया जाना चाहिए। दीक्षित ने कहा कि दिल्ली में हजारों और लाखों छोटे व्यापारी हैं, जिन्हें रैली के दौरान आने वाले लोगों से फायदा मिल सकता है। उन्होंने सवाल किया कि केवल बड़े कारोबारियों के नुकसान की चिंता क्यों की जा रही है। इस तरह एक नवंबर की रैली को लेकर कांग्रेस नेता के बयान और व्यापारिक संगठनों की मांग के बीच विवाद बढ़ गया है। कारोबारियों की मांग है कि रैली की तारीख दिवाली के बाद रखी जाए, जबकि दीक्षित ने एक दिन कारोबार प्रभावित होने के असर को कम करके देखने वाला तर्क दिया है।