क्या है वियना संधि, इसी के तहत अंतरराष्ट्रीय अदालत में हो रही है कुलभूषण जाधव की सुनवाई
पाकिस्तान की जेल में बंद कुलभूषण जाधव मामले की सार्वजनिक सुनवाई द हेग स्थित अंतरराष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) में शुरू हो गई है। तीन दिनों तक चलने वाली इस सुनवाई को दौरान भारत और पाकिस्तान संयुक्त राष्ट्र की शीर्ष अदालत के सामने अपना पक्ष रखेंगे। भारत ने दलील दी है कि पाकिस्तान ने जाधव को कॉन्सुलर एक्सिस नहीं दिया है। जबकि भारत कॉन्सुलर एक्सिस का अनुरोध भेजता रहा। पाकिस्तान ने वियना संधि का भी उल्लंघन किया है।
क्या है वियना संधि
वियना संधि के मुताबिक राजनयिकों को गिरफ्तार नहीं किया जा सकता है और न ही उन्हें किसी तरह की हिरासत में रखा जा सकता है। आजाद और संप्रभु देशों के बीच आपसी राजनयिक संबंधों को लेकर सबसे पहले साल 1961 में वियना कन्वेंशन हुआ।
इसके तहत एक ऐसे अंतरराष्ट्रीय समझौते का प्रावधान किया गया जिसमें राजनियकों को विशेष अधिकार दिए गए। इसके आधार पर ही राजनियकों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय कानूनों का प्रावधान किया गया। इस संधि के तहत कुल 54 आर्टिकल हैं। फरवरी 2017 में इस संधि पर दस्तखत कर 191 देशों ने के पालन के लिए अपनी सहमति जताई थी।
कॉन्सुलर रिलेशंस पर भी हुई एक संधि
साल 1963 में संयुक्त राष्ट्र संघ ने इसी संधि से मिलती जुलती एक और संधि ‘वियना कन्वेंशन ऑन कांसुलर रिलेशंस’ का प्रावधान किया। इस संधि पर अब तक 179 देशों ने हस्ताक्षर कर अपनी सहमत दी है। इस संधि के तहत कुल 79 आर्टिकल हैं। भारत ने जाधव का मामला इसी संधि के तहत उठाया है।
इस संधि के आर्टिकल 31 के मुताबिक मेजबान देश दूतावास में नहीं घुस सकता है और उसे दूतावास के सुरक्षा की जिम्मेदारी भी उठानी है।
इस संधि के आर्टिकल 36 के अनुसार अगर कोई देश किसी विदेशी नागरिक को गिरफ्तार करता है तो संबंधित देश के दूतावास को तुरंत इसकी सूचना देनी पड़ेगी।
गिरफ्तार किए गए विदेशी नागरिक के आग्रह पर पुलिस को संबंधित दूतावास या राजनयिक को फैक्स करके इसकी सूचना भी देनी पड़ेगी। इस फैक्स में पुलिस को गिरफ्तार व्यक्ति का नाम, गिरफ्तारी की जगह और गिरफ्तारी की वजह भी बतानी होगी। जिसका मतलब है कि गिरफ्तार विदेशी नागरिक को राजनयिक पहुंच देनी होगी.
भारत ने आईसीजे में इसी आर्टिकल 36 के प्रावधानों का हवाला देते हुए जाधव का मामला उठाया है।
क्या है कुलभूषण जाधव का मामला?
कुलभूषण जाधव को पाकिस्तान की सैनिक अदालत ने जासूसी के आरोप में फांसी की सजा सुनाई है। भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव फिलहाल जेल में बंद है।
पाकिस्तान का आरोप है कि वो जासूस हैं, वहीं भारत कहता है कि जाधव का ईरान से अपहरण किया गया। भारत की ओर से पाकिस्तान के इस एकतरफा फैसले को आईसीजे में चुनौती दी है। इस मुकदमे में आईसीजे में भारत का पक्ष बेहद मजबूत है।