Ahmedabad Plane Crash: तकनीकी खामी या ईंधन की कमी, हादसे की वजह क्या? एविएशन विशेषज्ञ आलोक सिंह ने क्या कहा
अहमदाबाद में हुए विमान हादसे ने पूरे देश को हिला कर रख दिया है। हादसा इतना बड़ा है कि लोंगों के मन में कई सवाल खड़े हो रहें है। आखिर इस घटना के पीछे का कारण क्या है? एविएशन विशेषज्ञ आलोक सिंह की माने तो हादसे की वजह तकनीकी खामी, पक्षी से टकराव, ईंधन की कमी या पायलट की गलती हो सकती है। उन्होंने बताया कि ब्लैक बॉक्स से ही असली कारणों का पता चलेगा। इसमें पायलट की बातचीत और तकनीकी डेटा रिकॉर्ड होता है।
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विस्तार
अहमदाबाद में गुरुवार को हुए विमान हादसे ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया। हादसे में कुल 270 लोगों की जान चली गई। जाहिर सी बात है कि सवाल तो खड़े होंगे ही कि आखिर इस भयावह घटना के पीछे का कारण क्या था? इसी क्रम में एविएशन विशेषज्ञ और रिटायर्ड कैप्टन आलोक सिंह ने हादसे के कारण को लेकर अपनी राय दी है। उन्होंने बताया कि शुरुआती वीडियो देखकर लगता है कि विमान ने उड़ान के कुछ ही सेकेंड बाद लिफ्ट देना बंद कर दिया। इसके पीछे संभावित कारणों में दोनों इंजनों का थ्रस्ट खो जाना, ईंधन की आपूर्ति रुकना, पक्षी से टकराव, तकनीकी खराबी या पायलट की गलती हो सकती है।
'ब्लैक बॉक्स खोलेगा हादसे के कारण राज'
एविएशन विशेषज्ञ आलोक सिंह ने आगे बताया कि हादसे की असली वजह का पता ब्लैक बॉक्स के जरिए चलेगा। बता दें कि ब्लैक बॉक्स में दो अहम हिस्से होते हैं, कॉकपिट वॉयस रिकॉर्डर (सीवीआर) और डिजिटल फ्लाइट डेटा रिकॉर्डर (डीएफडीआर)। इसमें पायलट्स की बातचीत और विमान के सभी तकनीकी पैरामीटर्स रिकॉर्ड होते हैं। ये डेटा जांच एजेंसियों की तरफ से विश्लेषित किया जाएगा।
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'एविएशन इंडस्ट्री के लिए ब्लैक डे'
सिंह ने कहा कि यह घटना एविएशन इंडस्ट्री के लिए ब्लैक डे के रूप में जानी जाएगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि बोइंग 787-8 ड्रीमलाइनर एक भरोसेमंद विमान है और पिछले 11-12 वर्षों में इससे जुड़ा यह पहला बड़ा हादसा है। हालांकि हाल ही में इसकी पुरानी उड़ानों में कुछ मामूली समस्याएं सामने आई थीं।
डीजीसीए और उड्डयन मंत्री की तारीफ की
आलोक सिंह ने एक न्यूज एजेंसी के साथ बातचीत के दौरान डीजीसीए और नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू की सतर्कता की तारीफ की। उन्होंने कहा कि विमान को उड़ान की अनुमति देने से पहले सभी तकनीकी जांच दो बार होती है ताकि यात्रियों की सुरक्षा सुनिश्चित हो सके।
'मेडे कॉल' का महत्व बताया
एविएशन विशेषज्ञ सिंह ने आगे 'मेडे कॉल' की अहमियत को भी समझाया, जो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आपात स्थिति में दिया जाने वाला संदेश होता है। इस कॉल के बाद विमान को प्राथमिकता के आधार पर लैंडिंग या एयरस्पेस मिलती है। सिंह ने बताया कि हादसा टेकऑफ के तुरंत बाद हुआ। विमान सिर्फ 57 सेकंड तक हवा में रहा और 26वें सेकेंड में वह रुक गया। इतनी कम ऊंचाई पर पायलट के पास कोई विकल्प नहीं था और विमान नजदीकी इमारत से टकरा गया।
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अब एकबार पूरे घटना को समझिए
गौरतलब है कि गुरुवार को एयर इंडिया की लंदन जा रही फ्लाइट AI171 ने अहमदाबाद से उड़ान भरी थी। थोड़ी देर बाद ही विमान बीजे मेडिकल कॉलेज की डॉक्टर्स हॉस्टल से टकरा गया। विमान में कुल 242 लोग सवार थे, जिनमें 230 यात्री और 12 क्रू मेंबर शामिल थे। हादसे में 241 लोगों की मौत हो गई, जबकि एकमात्र जीवित यात्री विश्वाश कुमार रमेश अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। देखा जाए तो यह हादसा भारतीय विमानन इतिहास के सबसे भीषण हादसों में से एक बन गया है।
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