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Shahpur Kandi Barrage: रोका गया पाकिस्तान जाने वाले रावी का पानी, इसका पंजाब और जम्मू-कश्मीर पर क्या होगा असर?

Mon, 26 Feb 2024 06:10 PM IST
शिवेंद्र तिवारी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवेंद्र तिवारी Updated Mon, 26 Feb 2024 06:10 PM IST
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सार
Shahpurkandi Dam Project: सिंधु जल संधि के अनुसार रावी नदी के पानी के उपयोग का पूर्ण अधिकार भारत को है। हालांकि, रावी का कुछ पानी पाकिस्तान में बह जाता था। अब नदी पर शाहपुर कंडी बांध बनने से जल की यह बर्बादी कम होगी।
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what is shahpurkandi dam project and how ravi water stopped to pakistan
शाहपुर कंडी बांध - फोटो : Amar Ujala

विस्तार

रावी नदी का जो पानी पाकिस्तान की ओर जाता रहा है उसे अब बंद कर दिया गया है। पड़ोसी देश की ओर सालाना 12 हजार क्यूसेक जाता था। यह सब कुछ रावी नदी पर शाहपुर कंडी बांध बनने से संभव हुआ है। इस बांध को बनने में कई साल लग गए। दरअसल, सिंधु जल संधि के अनुसार, रावी के पानी पर भारत का पूर्ण अधिकार है। अब पानी रोके जाने से जम्मू-कश्मीर और पंजाब के किसानों को सबसे अधिक फायदा होगा। 


आइये जानते हैं कि भारत से पाकिस्तान की ओर बहने वाले पानी को लेकर क्या हुआ है?शाहपुर कंडी बांध की कहानी क्या है? यह पानी कब से प्रवाहित हो रहा था? परियोजना से क्या बदलेगा?

 

भारत से पाकिस्तान की ओर जाने वाले पानी को लेकर क्या हुआ है? 
पाकिस्तान जा रहे पानी को रोकने के लिए रावी नदी पर शाहपुर कंडी बांध बनाया जा रहा था। वर्षों से बन रहे इस बांध निर्माण का काम अब पूरा हो चुका है। बांध में जल भंडारण की क्षमता 4.23 ट्रिलियन घन मीटर फुट है। वहीं, बिजली निर्माण के लिए पावर हाउस तैयार किए जा रहे हैं। रणजीत सागर बांध से छोड़े गए पानी का उपयोग इस परियोजना के लिए बिजली पैदा करने के लिए किया जाना है। 
 

शाहपुर कंडी बांध की कहानी क्या है?
दरअसल, सिंधु जल बंटवारे के लिए भारत और पाकिस्तान के बीच 1960 में सिंधु जल संधि पर हस्ताक्षर किए गए थे। संधि के अनुसार, भारत को तीन पूर्वी नदियों यानी रावी, ब्यास और सतलुज के जल के उपयोग का पूर्ण अधिकार मिला। सरकार के अनुसार, रावी नदी का कुछ पानी माधोपुर हेडवर्क्स के जरिए पाकिस्तान में बर्बाद हो रहा था। पानी की ऐसी बर्बादी कम करने के लिए शाहपुर कंडी बांध परियोजना की कल्पना की गई।

अब शाहपुर कंडी बांध की कहानी समझने के लिए 1979 में हुए समझौते को जानना होगा। दरअसल, जनवरी 1979 में पंजाब और जम्मू-कश्मीर के बीच एक द्विपक्षीय समझौता हुआ था। समझौते के अनुसार, रणजीत सागर बांध और शाहपुर कंडी बांध का निर्माण पंजाब सरकार द्वारा किया जाना था। रणजीत सागर बांध अगस्त 2000 में चालू किया गया था। शाहपुर कंडी बांध परियोजना को रावी नदी पर रणजीत सागर बांध के आठ किमी अप स्ट्रीम पर बनाया जाना था।

योजना आयोग ने नवंबर 2001 के दौरान परियोजना को अनुमोदित किया। परियोजना के सिंचाई घटक के वित्तपोषण के लिए इसे त्वरित सिंचाई लाभ योजना (एआईबीपी) के तहत शामिल किया गया।

2018 में मंत्रिमंडल से परियोजना के कार्यान्वयन को मंजूरी
शाहपुर कंडी बांध राष्ट्रीय परियोजना की 2285.81 करोड़ रुपये की संशोधित लागत को अगस्त 2009 में अनुमोदित किया गया। वहीं 2009-10 से 2010-11 की अवधि के दौरान 26.04 करोड़ रुपये केंद्रीय सहायता के रूप में जारी किए गए। हालांकि, पंजाब और जम्मू-कश्मीर में कुछ मुद्दों के कारण काम में ज्यादा प्रगति नहीं हो सकी।

द्विपक्षीय और भारत सरकार के स्तर पर कई बैठकें आयोजित की गईं। अंततः 8 सितंबर 2018 को नई दिल्ली में पंजाब और जम्मू-कश्मीर राज्यों के बीच एक समझौता हुआ। इसके बाद दिसंबर 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने रावी नदी पर पंजाब में शाहपुरकंडी बांध परियोजना के कार्यान्वयन को मंजूरी दे दी। इसके साथ ही परियोजना के लिए 2018-19 से 2022-23 तक पांच वर्षों में 485.38 करोड़ रुपये की (सिंचाई घटक के लिए) केंद्रीय सहायता देने का निर्णय लिया गया। 

कैसे बना है शाहपुर कंडी बांध?
रावी नदी पर बना शाहपुरकंडी बांध 55.5 मीटर ऊंचा है। इसके साथ दो पावर हाउस भी बन रहे हैं। यह परियोजना एक चालू बहुउद्देशीय नदी घाटी परियोजना है जिसमें पंजाब और जम्मू-कश्मीर में सिंचाई और बिजली उत्पादन शामिल है। परियोजना से 37,173 हेक्टेयर (पंजाब में 5000 और जम्मू-कश्मीर में 32173) की सिंचाई क्षमता निर्धारित की गई है। यह रणजीत सागर बांध परियोजना के लिए एक संतुलन जलाशय के रूप में भी कार्य करेगा। 




 

परियोजना से क्या बदलेगा?
अभी तक रावी नदी का कुछ पानी माधोपुर हेडवर्क्स से पाकिस्तान की ओर बह जाता था जबकि पंजाब और जम्मू-कश्मीर में उपयोग के लिए इसकी आवश्यकता है। परियोजना के कार्यान्वयन से पानी की ऐसी बर्बादी कम होगी।

परियोजना पूरी होने से पंजाब में 5,000 हेक्टेयर और जम्मू-कश्मीर में 32,173 हेक्टेयर की अतिरिक्त सिंचाई क्षमता पैदा होगी। इसके अलावा पंजाब में 1.18 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई के लिए छोड़े जाने वाले पानी को इस परियोजना के जरिए प्रबंधित किया जाएगा। क्षेत्र में सिंचाई को लाभ होगा। परियोजना पूरी होने से पंजाब 206 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन भी कर सकेगा।

 
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