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क्या है नौ मिनट लाइटें बंद होने का गणित? बिजली विभाग के सामने होगी बड़ी चुनौती

Fri, 03 Apr 2020 08:54 PM IST
आसिम खान न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: आसिम खान Updated Fri, 03 Apr 2020 08:54 PM IST
सार

  • क्या है नौ मिनट बिजली जाने का गणित
  • बिजली विभाग के सामने होगी बड़ी चुनौती
  • देशभर में हो सकता है ब्लैकआउट का खतरा
  • 10वां मिनट होगा काफी महत्तवपूर्ण

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What is Narendra Modi nine minute power solidarity call? why the 9 minute challenge is difficult for the power industry
सांकेतिक तस्वीर

विस्तार

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों से रविवार रात नौ बजे नौ मिनट के लिए अपने घरों की लाइट बंद करने की अपील की। पीएम मोदी ने कहा कि पांच अप्रैल को रात नौ बजे घर की लाइट बंद करके, घर के दरवाजे पर मोमबत्ती, दिया या फ्लैश लाइट जलाएं। उन्होंने कहा कि इस रविवार को हमें संदेश देना है कि हम सभी एक हैं। पीएम मोदी की इस अपील ने बिजली कंपनियों के सामने संकट खड़ा कर दिया है।

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अगर 130 करोड़ देशवासी एक साथ बिजली बंद कर देते हैं और नौ मिनट बाद एक साथ चालू करते हैं तो देश में ब्लैकआउट होने का खतरा पैदा हो सकता है। हालांकि, बिजली कंपनियों ने पीएम मोदी के नौ मिनट के चैलेंज के लिए तैयारियां शुरू कर दी हैं।
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मनी कंट्रोल की रिपोर्ट के अनुसार बिजली क्षेत्र के एक वरिष्ठ कार्यकारी का कहना है कि नौ मिनट की बिजली कटौती को इस तरह से समझा जा सकता है, यह एक चलती हुई कार में अचानक तेज ब्रेक लगाने और फिर एक दम एक्सीलेटर देने जैसा है... यह भविष्यवाणी करना मुश्किल है कि कार वास्तव में कैसे व्यवहार करेगी। यह एक भविष्यवाणी है, लेकिन बहुत अधिक जटिल है और हम सभी इसका सामना कर रहे हैं।

बिजली उद्योग के अधिकारियों के अनुसार, उन नौ मिनटों की योजना के लिए उनके पास दो दिन का समय है। यह एक चुनौती है, और कुछ अभूतपूर्व है। लेकिन यह संभव है। नौ मिनट की चुनौती को स्पष्ट रूप से समझने के लिए यह जानना जरूरी है कि बिजली क्षेत्र कैसे कार्य करता है।

हमें कैसे मिलती है बिजली?

तीन तरीकों से हमारे घर तक बिजली पहुंचती है। पहला पॉवर जनरेटर्स जैसे टाटा पावर और एनटीपीसी, दूसरा प्रत्येक राज्य की वितरण कंपनियां और तीसरा राज्य भार प्रेषण केंद्र या एसएलडीसी, जो बिजली की मांग के साथ आपूर्ति में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ वकील गोपाल जैन के अनुसार बिजली आपूर्ति को एक दिन में प्रत्येक 15 मिनट के 96 ब्लॉक में विभाजित किया गया है। 

एसएलडीसी प्रत्येक राज्य में ब्लॉक के लिए मांग और आपूर्ति का शेड्यूल तैयार करता है। अगर पीएम मोदी पूरे 15 मिनट के लिए बिजली बंद करने की अपील करते तो 15 मिनट का एक ब्लॉक बंद कर दिया जाता लेकिन यह नौ मिनट चुनौती बनकर सामने आई हैं। वहीं, इंफ्रास्ट्रक्चर नियामक के विशेषज्ञता वाले वकील सितेश मुखर्जी ने कहा कि यह एक उच्च स्वचालित और वैज्ञानिक प्रक्रिया है।

उन्होंने कहा कि एसएलडीसी की बहुत महत्तवपूर्ण भूमिका है। यह सुनिश्चित करना है कि पावर ग्रिड लाइनों में चलने वाली बिजली की आवृत्ति 48.5 और 51.5 हर्ट्ज के बीच होनी चाहिए। अगर यह बहुत अधिक हो जाता है (जब आपूर्ति बहुत अधिक होती है) या बहुत कम (जब मांग हद से ज्यादा हो जाती है), तो लाइनें कट सकती हैं जिससे देशभर में बिजली संकट मंडरा सकता है। 2012 में दुनिया का सबसे बड़ा ब्लैकआउट कुछ ऐसे ही हुआ था जब अचानक मांग बढ़ने से ट्रिपिंग हुई और लगभग 60 करोड़ भारतीयों के घरों की बिजली चली गई थी।

देशभर में छा सकता है अंधेरा

पांच अप्रैल को अगर सभी भारतीय एक साथ रात नौ बजे बिजली बंद कर देते हैं तो बिजली सप्लाई कट सकती है और देशभर में अंधेरा हो सकता है। लेकिन, इस क्षेत्र के वरिष्ठ इंजीनियरों का कहना है कि इसे संभाला जा सकता है क्योंकि उनके पास योजना बनाने का समय है। भारत को विभिन्न स्रोतों से बिजली मिलती है जैसे थर्मल, हाइडल, गैस, पवन और सौर। 

एक इंजीनियर ने कहा, सौर रात में उत्पन्न नहीं होता। हवा निरंतर है और इसे रोका नहीं जा सकता। लेकिन हाइडल और गैस संयंत्र को पूरी तरह से बंद करना संभव है। और एक हाइडल या गैस प्लांट को फिर से शुरू करना कोई मुश्किल कार्य नहीं है। लेकिन थर्मल प्लांट के साथ ऐसा नहीं है। एक थर्मल प्लांट को फिर से चालू करने में घंटों लग सकते हैं। इसका मतलब यह हुआ कि लंबे समय तक के लिए बिजली गुल हो सकती है।

सौभाग्य से, कोरोनोवायरस प्रभाव के कारण थर्मल प्लांट पहले से ही कम क्षमता पर चल रहे हैं। लेकिन उन्हें एक ही समय में पूरी तरह से बंद नहीं कर सकते। वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि पीएम मोदी के एलान के बाद हितधारकों, बिजली जनरेटर, डीआईएससीओएम और एसएलडीसी ने रविवार के लिए योजना बनानी शुरू कर दी है।

यह है नौ मिनट चैलेंज

नौ मिनट एक चुनौती है क्योंकि नौ मिनट किसी भी 15 मिनट के ब्लॉक में नहीं आते और सिस्टम को इतने कम समय के लिए फिर से कॉन्फिगर नहीं किया जा सकता है। एक इंजीनियर ने कहा कि कुछ लोग पंखे या एयर कंडीशनर को बंद नहीं करेंगे। स्ट्रीट लाइट और अन्य सार्वजनिक स्थानों पर लाइटें जलती रहेंगी। इसके अलावा, कुछ प्रतिशत लोग ऐसे भी होंगे जो स्विच ऑफ करना भूल जाएंगे।

10वां मिनट होगा चुनौतीपूर्ण

इंडस्ट्री में एग्जिक्यूटिव्स को उम्मीद है कि उतार-चढ़ाव कुल बिजली की जरूरत का लगभग 9-10 प्रतिशत होगा। एक कार्यकारी ने कहा कि यह बहुत अधिक नहीं है। एक ही समय में बिजली की आपूर्ति को समायोजित करना आसान नहीं होगा। यह एक चुनौती है। विशेष रूप से 10वां मिनट चुनौतीपूर्ण हो सकता है, जब हर कोई संभवत: फिर से घर की बिजली चालू करेगा। क्या बिजली मांग में अचानक उछाल से आपूर्ति पूरी हो पाएगी यह देखना काफी दिल्चस्प होगा।
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