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क्या है लद्दाख की गलवां घाटी का विवाद, चीन को क्यों है भारत से दिक्कत?

Tue, 16 Jun 2020 04:48 PM IST
प्रदीप पाण्डेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रदीप पाण्डेय Updated Tue, 16 Jun 2020 04:48 PM IST
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India China News: What is Galwan Valley India china disputes where violent face-off took place last night with casualties
भारत चीन सीमा तनाव - फोटो : amarujala

पिछले कुछ महीनों से भारत चीन सीमा पर विवाद बढ़ गया है। सोमवार की रात लद्दाख के गलवां में भारत और चीनी सेना के बीच झड़प हुई है जिसमें तीन जवानों के शहीद होने की खबर है। भारत और चीन के बीच सीमा पर करीब 50 साल बाद गोली चली है। गलवां घाटी उन क्षेत्रों में से एक है जहां चीनी सेना ने घुसपैठ की थी। विवाद को देखते हुए दोनों देश सीमा पर अपने सैनिकों को मौजूदगी बढ़ा रहे हैं।

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यह विवाद आरोप-प्रत्यारोप को लेकर हो रहा है। भारतीय सेना का कहना है कि गलवां घाटी के करीब चीनी सेना ने टेंट गाड़े हैं, जबकि चीन का आरोप है कि भारत गलवां घाटी के किनारे रक्षा संबंधी निर्माण कर रहा है जो कि गैर-कानूनी है। आइए समझते हैं भारत और चीन के बीच गलवां घाटी को लेकर विवाद क्यों है?

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गलवां घाटी कितना अहम है?
सबसे पहले आपको बता दें कि गलवां घाटी अक्साई चीन में है जो कि एक विवादित क्षेत्र है। यह घाटी लद्दाख और अक्साई चीन के बीच भारत-चीन सीमा के करीब है। यहीं पर वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) है जो कि अक्साई चीन को भारत से अलग करती है। अक्साई चीन पर दोनों देशों का दावा है। गलवां घाटी चीन के दक्षिणी शिनजियांग से लेकर भारत के लद्दाख तक फैली है। गलवां घाटी इसलिए अहम है, क्योंकि यह पाकिस्तान, चीन के शिनजियांग और लद्दाख की सीमा के साथ सटी हुई है। बता दें कि 1962 की लड़ाई के दौरान भी यह इलाका जंग का प्रमुख केंद्र रहा था। 


ये भी पढ़ें: सीमा विवाद: भारत ने सीमा पर बढ़ाई सैनिकों की संख्या, सेना प्रमुख का पठानकोट दौरा रद्द

1958 में हुई थी विवाद की शुरुआत
इस विवाद की शुरुआत 1958 में हुई थी जब अक्साई चीन में चीन ने सड़क बनाई थी जो कराकोरम रोड से जुड़ती है और पाकिस्तान की तरफ जाती है। सड़क निर्माण के दौरान भारत ने इस पर कोई विरोध नहीं किया, हालांकि सड़क बनने के बाद तात्कालिन प्रधानमंत्री प्रधानमंत्री पं. जवाहरलाल नेहरू ने आपत्ति जताई थी। भारत ने इस इलाके में अभी तक कोई सैन्य कार्रवाई नहीं की थी, लेकिन अब कार्रवाई होने लगी है। दरअसल भारत ने इन इलाकों में पीओके और गिलगित-बालतिस्तान की तरह अपना दावा मजबूत करना शुरू कर दिया है जिससे चीन को दिक्कत होने लगी है।

चीन ने खुद की शुरुआत, लेकिन अब भारत से उसे आपत्ति हो रही
विवाद की शुरुआत चीन ने ही की है लेकिन अब भारत कोई कदम उठा रहा है तो उसे आपत्ति हो रही है। दरअसल गालवां घाटी में भारत के निर्माण को चीन गैर-कानूनी इसलिए कह रहा है क्योंकि भारत-चीन के बीच एक समझौता हुआ है कि एलएसी को मानेंगे और उसमें नए निर्माण नहीं करेंगे, जबकि चीन पहले ही इस क्षेत्र में सैन्य निर्माण कर चुका है और अब वह चाहता है कि भारत मौजूदा स्थिति को स्वीकार कर ले और बरकरार रखे। भारत भी सीमा पर अपनी पकड़ मजबूत करने के लिए वहां सामरिक निर्माण करना चाहता है।

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