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समानता का अधिकार देने वाला आर्टिकल 15 आखिर है क्या, जिस पर बनी फिल्म ने रिलीज होते ही मचाया बवाल

Sat, 29 Jun 2019 11:59 AM IST
Nilesh Kumar निलेश कुमार
Updated Sat, 29 Jun 2019 11:59 AM IST
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What is article 15 of indian constitution, Furore over Ayushman Khurana & Anubhaw Sinha Movie
आर्टिकल 15 पर मचा है घमासान - फोटो : अमर उजाला

'मुल्क' के बाद लेखक-निर्देशक अनुभव सिन्हा एक बार फिर अहम मुद्दे पर फिल्म लेकर आए हैं- आर्टिकल 15। बॉलीवुड अभिनेता आयुष्मान खुराना के लीड रोल वाली यह फिल्म यूं तो रिलीज के पहले से ही विवादों में थी, लेकिन शुक्रवार को फिल्म के रिलीज होते ही विरोध और बवाल बढ़ता जा रहा है। उत्तर प्रदेश में कई शहरों में कई संगठनों ने विरोध किया। कानपुर से लेकर रुड़की तक और बरेली से लेकर दिल्ली तक यह विरोध पहुंच चुका है। एक संगठन  के सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। 

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ऐसे में सबके मन में सवाल उठना लाजिमी है कि 'आर्टिकल 15' आखिर है क्या?  तो आइए विस्तार से जानते हैं इसके बारे मेंः

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संविधान में आर्टिकल का तात्पर्य अनुच्छेद से होता है। आर्टिकल 15 के बारे में जानने से पहले थोड़ा संविधान के बारे में जान लेते हैं। भारतीय संविधान दुनिया का सबसे लंबा लिखित संविधान है, जिसमें 25 भागों और 12 अनुसूचियों में 449 अनुच्छेद (आर्टिकल) शामिल हैं।

यह देश का सर्वोच्च कानून है और यह मौलिक अधिकार, निर्देश सिद्धांत, नागरिकों के मौलिक कर्तव्यों को स्थापित करते समय मौलिक राजनीतिक संहिता, संरचना, प्रक्रियाओं, शक्तियों और सरकारी संस्थानों के कर्तव्यों का निर्धारण करने वाले ढांचे को प्रस्तुत करता है।

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संसद (फाइल फोटो) - फोटो : PTI

संविधान में आर्टिकल-14 से लेकर आर्टिकल-18 तक हमें समता यानी कि समानता का मौलिक अधिकार देते हैं। इसी के अंतर्गत आर्टिकल 15 आता है। आर्टिकल 15 ऐसा मौलिक अधिकार है, जो यह सुनिश्चित करता है कि किसी भी भारतीय नागरिक से उसके धर्म, नस्ल, जाति, लिंग या जन्म-स्थान के आधार पर भेद-भाव नहीं किया जाएगा। सरकार और समाज की ये जिम्मेदारी है कि वो ऐसा कोई भेदभाव होने न दे। 

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प्रदर्शन करते युवा (फाइल फोटो) - फोटो : अमर उजाला

संविधान के आर्टिकल 15 के मुताबिक आप किसी भी व्यक्ति से धर्म, जाति, लिंग या जन्मस्थान के आधार पर भेद-भाव नहीं कर सकते हैं। आर्टिकल 15 का पालन करना हम सब के लिए बेहद जरूरी है। संविधान की भाषा में कहा जाए तो इसके अंतर्गत राज्य, किसी नागरिक से केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी भी आधार पर किसी तरह का कोई भेद-भाव नहीं करेगा।

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Article 15 - फोटो : file photo

"धर्म, नस्ल, जाति, लिंग, जन्म स्थान या इनमें से किसी भी आधार पर राज्य अपने किसी भी नागरिक से कोई भेदभाव नहीं करेगा। ये मैं नहीं कह रहा, भारत के संविधान में लिखा है।" अनुभव सिन्हा निर्देशित और आयुष्मान खुराना की फिल्म आर्टिकल 15 में यह एक अहम डायलॉग है, जो फिल्म का आधार है। 
 

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कुएं से पानी निकालते ग्रामीण (File Photo)

आर्टिकल 15 के अनुसार, किसी नागरिक को केवल धर्म, मूलवंश, जाति, लिंग, जन्मस्थान या इनमें से किसी के आधार पर किसी दुकान, सार्वजनिक भोजनालय, होटल और सार्वजनिक मनोरंजन के स्थानों जैसे सिनेमा और थियेटर आदि जगहों में प्रवेश से नहीं रोका जा सकता है। इसके अलावा सरकारी या अर्ध-सरकारी कुओं, तालाबों, स्नाघाटों, सड़कों और पब्लिक प्लेस के इस्तेमाल से भी किसी को इस आधार पर नहीं रोक सकते हैं।

 

 

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प्रदर्शन करती महिलाएं(FIle Photo) - फोटो : अमर उजाला

आर्टिकल 15 यूं तो समानता का अधिकार की वकालत करता है और किसी भी तरह के भेद किए जाने से रोकता है, लेकिन यह महिलाओं, बच्चों और पिछड़े तबकों के विकास में बाधक नहीं बनता है। आर्टिकल 15 किसी भी राज्य को महिलाओं और बच्चों को विशेष सुविधा देने से नहीं रोकता, जैसे कि महिआओं को आरक्षण या बच्चों को विशेष शिक्षा जैसी सुविधाएं। इसके अलावा यह आर्टिकल किसी भी राज्य को सामाजिक या शैक्षिक दृष्टि से पिछड़े हुए अनुसूचित जातियों और अनुसूचित जनजातियों के लिए कोई विशेष प्रावधान बनाने से भी नहीं रोकेगा।

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