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Jharkhand: हेमंत की सदस्यता संकट के बीच क्यों हुई विधायकों की बाड़ेबंदी, CM की विधायकी गई तो क्या-क्या होगा?
Sat, 27 Aug 2022 04:51 PM IST
जयदेव सिंह
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रांची
Published by: जयदेव सिंह
Updated Sat, 27 Aug 2022 04:51 PM IST
सार
कहा जा रहा है कि सोरेन की विधायकी जाने की स्थिति में नई सरकार के गठन तक विधायक बाड़ेबंदी में रहेंगे। आखिर विधायकों की बाड़ेबंदी क्यों हो रही है? हेमंत सोरेन की विधायकी पर संकट क्यों हैं? मुख्यमंत्री की विधायकी जाने पर क्या-क्या हो सकता है? आइये जानते हैं…
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हेमंत सोरेन
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
हेमंत सोरेन की विधायकी पर संकट मंडरा रहा है। अगर विधायकी जाती है तो सोरेन को मुख्यमंत्री पद भी छोड़ना पड़ेगा। इस संटक के बीच सत्ताधारी महागठबंधन के विधायकों की बाड़ेबंदी कर दी गई है। शनिवार को सभी विधायकों को तीन बसों किसी सुरक्षित जगह भेज दिया गया है।
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कहा जा रहा है कि सोरेन की विधायकी जाने की स्थिति में नई सरकार के गठन तक ये विधायक बाड़ेबंदी में रहेंगे। आखिर विधायकों की बाड़ेबंदी क्यों हो रही है? हेमंत सोरेन की विधायकी पर संकट क्यों हैं? मुख्यमंत्री की विधायकी जाने पर क्या-क्या हो सकता है? कब तक राज्य में शुरू हुआ ये राजनीतिक संकट खत्म हो सकता है? आइये जानते हैं…
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आखिर विधायकों की बाड़ेबंदी क्यों हो रही है?
हेमंत सोरेन पर जनप्रतिनिधित्व कानून की धाराओं के उल्लंघन का आरोप है। इस कानून की धारा 9A के तहत उनकी विधायकी जा सकती है। इसे लेकर करीब दो महीने से कार्रवाई चल रही थी। इसके बाद चुनाव आयोग ने गुरुवार को अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को दे दी है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक इसमें हेमंत सोरेन को दोषी मानते हुए उनकी विधायकी रद्द करने की सलाह दी गई है।
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सोरेन की विधानसभा सदस्यता जाती है तो उन्हें मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ेगा। ऐसे में राज्य में नए मुख्यमंत्री को शपथ लेकर बहुमत साबित करना होगा। इस दौरान विधायकों की टूट नहीं हो, जब तक शक्ति परीक्षण नहीं हो जाता तब तक कोई विधायक पाला नहीं बदले, इस तरह की आशंकों को खत्म करने के लिए ये बाड़ेबंदी की गई है।
झारखंड विधानसभा
- फोटो : अमर उजाला
क्या सोरेन की विधायकी जाने के बाद विधायकों में टूट का खतरा है?
सत्ताधारी गठबंधन लगातार आरोप लगा रहा है कि पिछले पांच महीने से झारखंड में सरकार गिराने की कोशिश हो रही है। खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का कहना है कि भाजपा सरकार गिराने के लिए षड़यंत्र रच रही है। सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है।
30 जुलाई को बंगाल के हावड़ा में झारखंड कांग्रेस के तीन विधायक इरफान अंसारी, राजेश कच्छप और नमन बिक्सल को भारी कैश के साथ पकड़ा गया था। पुलिस ने तीनों को 48 लाख कैश के साथ गिरफ्तार किया था। इसके बाद कांग्रेस ने इन विधायकों को निलंबित कर दिया था। इसके साथ ही कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया था कि भाजपा राज्य में सरकार गिराने की कोशिश कर रही है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा था कि ''झारखंड में भाजपा का ‘ऑपरेशन लोटस’ हावड़ा में बेनकाब हो गया। दिल्ली में ‘हम दो’ का गेम प्लान झारखंड में वही करने का है, जो उन्होंने महाराष्ट्र में ई-डी(एकनाथ शिंदे-देवेंद्र फडणवीस) की जोड़ी से करवाया।
सत्ताधारी गठबंधन लगातार आरोप लगा रहा है कि पिछले पांच महीने से झारखंड में सरकार गिराने की कोशिश हो रही है। खुद मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन का कहना है कि भाजपा सरकार गिराने के लिए षड़यंत्र रच रही है। सरकारी एजेंसियों का दुरुपयोग किया जा रहा है।
30 जुलाई को बंगाल के हावड़ा में झारखंड कांग्रेस के तीन विधायक इरफान अंसारी, राजेश कच्छप और नमन बिक्सल को भारी कैश के साथ पकड़ा गया था। पुलिस ने तीनों को 48 लाख कैश के साथ गिरफ्तार किया था। इसके बाद कांग्रेस ने इन विधायकों को निलंबित कर दिया था। इसके साथ ही कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने आरोप लगाया था कि भाजपा राज्य में सरकार गिराने की कोशिश कर रही है। उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा था कि ''झारखंड में भाजपा का ‘ऑपरेशन लोटस’ हावड़ा में बेनकाब हो गया। दिल्ली में ‘हम दो’ का गेम प्लान झारखंड में वही करने का है, जो उन्होंने महाराष्ट्र में ई-डी(एकनाथ शिंदे-देवेंद्र फडणवीस) की जोड़ी से करवाया।
पिता शिबू सोरेन का आशीर्वाद लेते हेमंत सोरेन।
- फोटो : ANI
हेमंत सोरेन की विधायकी पर संकट क्यों हैं?
इसी साल 12 फरवरी को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता रघुबर दास ने दावा किया था कि मुख्यमंत्री ने पद का दुरुपयोग किया है। उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके पिछले साल रांची में अपने नाम पर पत्थर उत्खनन पट्टे के लिए स्वीकृति प्राप्त की। जो जनप्रतिनिधित्व कानून की धाराओं का उल्लंघन है। इस मामले की शिकायत भाजपा ने राज्यपाल से की और सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की। इसके बाद मामला चुनाव आयोग पहुंचा। करीब दो महीने चली जांच के बाद गुरुवार को चुनाव आयोग ने अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को भेज दी। तब से सोरेन की विधायकी जाने के कयास लग रहे हैं।
इसी साल 12 फरवरी को झारखंड के पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा नेता रघुबर दास ने दावा किया था कि मुख्यमंत्री ने पद का दुरुपयोग किया है। उन्होंने अपने प्रभाव का इस्तेमाल करके पिछले साल रांची में अपने नाम पर पत्थर उत्खनन पट्टे के लिए स्वीकृति प्राप्त की। जो जनप्रतिनिधित्व कानून की धाराओं का उल्लंघन है। इस मामले की शिकायत भाजपा ने राज्यपाल से की और सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द करने की मांग की। इसके बाद मामला चुनाव आयोग पहुंचा। करीब दो महीने चली जांच के बाद गुरुवार को चुनाव आयोग ने अपनी रिपोर्ट राज्यपाल को भेज दी। तब से सोरेन की विधायकी जाने के कयास लग रहे हैं।
मुख्यमंत्री की विधायकी जाने पर क्या-क्या हो सकता है?
दावा किया जा रहा है कि सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द हो जाएगी। हालांकि, चुनाव आयोग ने उनके चुनाव लड़ने पर रोक नहीं लगाई है। अगर ये दावे सच होते हैं तो इस बात की संभावना सबसे ज्यादा है कि सोरेन इस्तीफा देकर दोबारा शपथ लें।
ऐसा होने पर हेमंत सोरेन को छह महीने के अंदर चुनाव लड़कर दोबारा से विधायक बनना होगा। सोरेन की सदस्यता जाने के बाद उनकी सीट खाली होगी। इस पर छह महीने के अंदर चुनाव होंगे। ऐसे में सोरेन अपनी सीट पर दोबारा चुने जा सकते हैं। इस तरह से वो मुख्यमंत्री बने रहेंगे।
दावा किया जा रहा है कि सोरेन की विधानसभा सदस्यता रद्द हो जाएगी। हालांकि, चुनाव आयोग ने उनके चुनाव लड़ने पर रोक नहीं लगाई है। अगर ये दावे सच होते हैं तो इस बात की संभावना सबसे ज्यादा है कि सोरेन इस्तीफा देकर दोबारा शपथ लें।
ऐसा होने पर हेमंत सोरेन को छह महीने के अंदर चुनाव लड़कर दोबारा से विधायक बनना होगा। सोरेन की सदस्यता जाने के बाद उनकी सीट खाली होगी। इस पर छह महीने के अंदर चुनाव होंगे। ऐसे में सोरेन अपनी सीट पर दोबारा चुने जा सकते हैं। इस तरह से वो मुख्यमंत्री बने रहेंगे।
हेमंत सोरेन और उनकी पत्नी कल्पना सोरेन
- फोटो : Social Media
अगर सोरेन के चुनाव लड़ने पर भी रोक लग गई तो?
अगर हेमंत सोरेन की विधायकी जाने के साथ उनके चुनाव लड़ने पर भी रोक लग जाती है तो सोरेन पद छोड़ने के बाद दोबारा शपथ नहीं ले सकेंगे। इस स्थिति में उनकी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा और महागठबंधन को नया नेता चुनना होगा। विधायक दल का नया नेता झारखंड के अगले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेगा। इसके बाद उसे विधानसभा में बहुमत साबित करना होगा।
सोरेन नहीं बने मुख्यमंत्री तो किसका दावा सबसे मजबूत?
सोरेन से अलग राज्य के अगले मुख्यमंत्री के लिए जिन नामों की चर्चा है उनमें हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन का नाम सबसे आगे है। इसके साथ ही सोरेन के करीबी मंत्री चंपई सोरेन और जोबा मांझी भी दावेदारों भी रेस में बताए जा रहे हैं।
अगर हेमंत सोरेन की विधायकी जाने के साथ उनके चुनाव लड़ने पर भी रोक लग जाती है तो सोरेन पद छोड़ने के बाद दोबारा शपथ नहीं ले सकेंगे। इस स्थिति में उनकी पार्टी झारखंड मुक्ति मोर्चा और महागठबंधन को नया नेता चुनना होगा। विधायक दल का नया नेता झारखंड के अगले मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेगा। इसके बाद उसे विधानसभा में बहुमत साबित करना होगा।
सोरेन नहीं बने मुख्यमंत्री तो किसका दावा सबसे मजबूत?
सोरेन से अलग राज्य के अगले मुख्यमंत्री के लिए जिन नामों की चर्चा है उनमें हेमंत सोरेन की पत्नी कल्पना सोरेन का नाम सबसे आगे है। इसके साथ ही सोरेन के करीबी मंत्री चंपई सोरेन और जोबा मांझी भी दावेदारों भी रेस में बताए जा रहे हैं।