पश्चिम बंगाल: नहीं थम रही राजनैतिक हिंसा, रक्तरंजित हो रही है कला और संस्कृति की धरती
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पश्चिम बंगाल में राजनैतिक हिंसा थमने का नाम नहीं ले रही है। कला और संस्कृति के लिए जानी जाने वाली यह धरती अब रक्तरंजित हो गई है। बीते कुछ समय में यहां इस तरह लोगों की हत्याएं हो रही हैं, मानो खून की होली खेली जा रही हो। हिंसा और अशांति फैलाने वाले लोग महिलाओं और बच्चों तक को नहीं को नहीं बख्श रहे।
राजनैतिक हिंसा की इस आंधी में कई लोगों की जान जा चुकी है। लेकिन लोग इसपर चुप्पी साधे बैठे हैं। न तो सरकार की ओर से कोई ठोस कार्रवाई हो रही है, न ही सोशल मीडिया पर कोई मुहिम छेड़ी जा रही है। अगर कुछ हो रहा है, तो वह है सिर्फ और सिर्फ राजनीति।
आगे हम आपको एक तीन दिनों के अंदर हुई ऐसी दो घटनाओं के बारे में बता रहे हैं। जिनमें कुल चार हत्याएं हुईं।
...जब हमलावरों ने पूरे परिवार को मार डाला
यह घटना पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में हुई। बीते मंगलवार को 35 साल के शिक्षक बंधु प्रकाश पॉल, उनकी गर्भवती पत्नी और 6 साल के बेटे अंगन का खून से लथपथ शव उनके घर पर मिला। तीनों पर किसी धारदार हथियार से बर्बरता से वार किया गया था। बंधु प्रकाश को राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के कार्यकर्ता बताया गया।इस जघन्य घटना को लेकर राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने ममता बनर्जी सरकार पर निशाना साधा। घटना के दो दिन बाद, गुरुवार को धनखड़ ने कहा कि 'इस हत्याकांड से राज्य की कानून व्यवस्था की बदतर स्थिति नजर आती है। यह लोकतांत्रिक व्यवस्था पर धब्बा है। लेकिन तृणमूल सरकार की ओर से मानवता को शर्मसार करने वाली इस घटना पर कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है।'
42 वर्षीय पुजारी की हत्या
मुर्शिदाबाद की घटना के दो दिन बाद पश्चिम बंगाल के ही नादिया जिले में एक 42 वर्षीय पुजारी सुप्रियो बनर्जी की हत्या कर दी गई। गुरुवार को सुप्रियो का शव स्थानीय नदी के किनारे से बरामद हुआ। मृतक के घरवालों का कहना है कि ये हत्या पैसों के कारण हुई। लेकिन एक भाजपा नेता का दावा है कि सुप्रियो उनकी पार्टी का कार्यकर्ता था और राजनैतिक कारणों से उसकी हत्या की गई।भाजपा नेता बाबुल सुप्रियो ने इस संबंध में ट्वीट किया कि 'बीते चार दिनों में आठ लोगों की हत्या हो चुकी है। पश्चिम बंगाल में कानून व्यवस्था मजाक बन गई है। कथित लिबरल अब कहां हैं और इन हत्याओं पर क्यों चुप हैं? बंगाल के लोग इसका बदला लेंगे। देखिए और इंतजार कीजिए।'
इन हत्याओं पर जहां बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने इनकी ठीक तरह से जांच किए जाने की बात कही। वहीं तृणमूल कांग्रेस ने राज्यपाल पर 'संवैधानिक लक्ष्मण रेखा' पार करने का आरोप लगा दिया। साथ ही त्रिपुरा, उत्तर प्रदेश और बिहार में अपराध की घटनाओं पर नजर रखने की हिदायत दे डाली।
लोकसभा चुनाव के दौरान हिंसा
2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी पश्चिम बंगाल में राजनैतिक हिंसा की कई घटनाएं हुईं। छठे फेज के मतदान के दिन भी हिंसा हुई। जिसमें भाजपा के दो और तृणमूल कांग्रेस के एक कार्यकर्ता की मौत हो गई थी।10 फरवरी 2019.. कृष्णगंज के तत्कालीन विधायक सत्यजीत बिस्वास की पश्चिम बंगाल के नादिया जिले में गोली मार कर हत्या कर दी गई थी। तृणमूल कांग्रेस ने इस हत्या का आरोप भाजपा पर लगाया था। जबकि भाजपा ने इसे बकवास बताया था।
28 मार्च 2019.. भाजपा नेता के भाई की पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में हत्या कर दी गई। भाजपा ने इसका आरोप तृणमूल कांग्रेस पर लगाया था।
लोकसभा चुनाव के बाद हिंसा
पश्चिम बंगाल में लोकसभा चुनाव के बाद भी हिंसा की आग भड़की थी। तब ममता बनर्जी ने आधिकारिक रूप राजनैतिक हिंसा में 10 लोगों के मारे जाने की बात कबूली थी। तृणमूल के नेताओं का कहना था कि सबसे ज्यादा उनके लोग मारे गए हैं। जबकि भाजपा का कहना था कि उनके कार्यकर्ता ज्यादा मारे गए हैं और घायल हुए हैं।ममता दीदी ने सार्वजनिक रूप से बोला था कि मैं बदला लूँगी। मैं चुनाव आयोग से पूछना चाहता हूँ कि आपने इसका संज्ञान क्यों नहीं लिया?
— Amit Shah (@AmitShah) May 15, 2019
अगर ममता दीदी सोचती हैं कि वो हिंसा का कीचड़ फैलाकर चुनाव जीत जायेंगी तो मैं उनको कहना चाहता हूँ आप जितना हिंसा का कीचड़ फैलाओगी कमल उतना ही खिलेगा। pic.twitter.com/W4RR1tFptq