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TMC Crisis: लगातार ममता का साथ छोड़ रहे राज्यसभा सदस्य, अब रुक्मिणी कोयल मलिक ने दिया इस्तीफा
Thu, 16 Jul 2026 02:56 PM IST
Pavan
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Pavan
Updated Thu, 16 Jul 2026 02:56 PM IST
सार
अभिनेत्री से नेता बनीं कोयल मलिक ने राज्यसभा सदस्य पद से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के मुताबिक, उन्होंने उपराष्ट्रपति और राज्यसभा के सभापति सी.पी. राधाकृष्णन से मुलाकात कर अपना इस्तीफा सौंप दिया। कोयल मलिक का इस्तीफा ममता बनर्जी की अगुवाई वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है। वह राज्यसभा पहुंचने के कुछ ही महीने बाद पद छोड़ रही हैं।
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रुक्मिणी 'कोयल' मलिक, पूर्व टीएमसी सांसद
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के बाद से ममता बनर्जी का साथ छोड़ने वाले नेताओं की होड़ लगी हुई है। पहले विधानसभा में तमाम विधायकों ने अलग गुट बनाया, फिर तीन दिन में तीन राज्यसभा सांसदों ने (शुखेंदु शेखर राय, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बराइक) ने साथ छोड़ा। इसके बाद पार्टी के 20+ लोकसभा सांसदों ने बगावत कर, नेशनलिस्ट सिटिजन्स पार्टी का दामन थाम लिया। अब नए घटनाक्रम में पार्टी की राज्यसभा सांसद कोयल मलिक ने राज्यसभा के सदस्य का पद छोड़ दिया है।
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दो महीने पहले ही ली राज्यसभा की सदस्यता
कोयल मलिक ने 6 अप्रैल 2026 को पश्चिम बंगाल का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली थी। उन्हें तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा के लिए नामित किया था, हालांकि अब उनके अचानक इस्तीफे को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है। राजनीति में आने से पहले कोयल मलिक बंगाली फिल्म उद्योग का एक बेहद चर्चित और लोकप्रिय चेहरा रही हैं। उन्हें टॉलीवुड की 'टॉली-क्वीन' भी कहा जाता है। पिछले दो दशकों से वह बंगाली सिनेमा की सबसे सफल अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं।
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कोयल मलिक का फिल्मी सफर
उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत साल 2003 में सुपरहिट फिल्म 'नेटर गुरु' से की थी। इसके बाद 'बंधन' (2004), 'शुभदृष्टि' (2005), 'पागलू' (2011), 'हेमलॉक सोसाइटी' (2012) और 'मितिन माशी' थ्रिलर सीरीज (2019) जैसी कई सफल फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाकर दर्शकों के दिलों में खास पहचान बनाई। कोयल मलिक को अपने शानदार अभिनय के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान भी मिल चुके हैं। उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड बांग्ला, दो बीएफजेए अवॉर्ड और साल 2023 में पश्चिम बंगाल सरकार का प्रतिष्ठित 'महानायक सम्मान' प्रदान किया गया था। अगर उनके पारिवारिक जीवन की बात करें तो वह बंगाली सिनेमा के दिग्गज अभिनेता रंजीत मलिक और दीपा मलिक की बेटी हैं। फिलहाल उनके इस फैसले ने टीएमसी की राजनीति और पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।
यह भी पढ़ें- Indian Navy: कोच्चि में 'ऑपरेशन सदर्न रेडिनेस 26-2'; नौसेना करेगी मेजबानी, कितने देशों के नौसैनिक होंगे शामिल?
तृणमूल ने फरवरी में पूर्व पुलिस महानिदेशक राजीव कुमार, पूर्व केंद्रीय मंत्री बाबुल सुप्रियो, वरिष्ठ अधिवक्ता मेनका गुरुस्वामी और अभिनेत्री कोयल मलिक को राज्यसभा भेजकर राजनीतिक हलकों को चौंका दिया था। हालांकि सांसद बनने के बाद कोयल ने अब तक राज्यसभा की किसी भी कार्यवाही में हिस्सा नहीं लिया था। सोमवार से शुरू होने वाला मानसून सत्र उनका पहला संसदीय सत्र हो सकता था, लेकिन उससे पहले ही उन्होंने इस्तीफा दे दिया। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि भूपेंद्र यादव के साथ उनकी मुलाकात सामान्य राजनीतिक शिष्टाचार से कहीं अधिक महत्व रखती है। हाल के महीनों में तृणमूल के बागी सांसदों और विपक्षी खेमे के बीच संवाद स्थापित कराने में भी भूपेंद्र यादव की महत्वपूर्ण भूमिका बताई जाती रही है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि क्या कोयल मलिक भी अपने पूर्व सहयोगियों के रास्ते पर चलते हुए भाजपा में शामिल होकर फिर से राज्यसभा पहुंचेंगी।
कल करीबी नेता ने भी छोड़ा था साथ
इससे एक दिन पहले ही ममता बनर्जी के करीबी नेता मदन मित्रा ने भी टीएमसी के सभी पदों से इस्तीफा देने का एलान किया था। कमरहाटी से विधायक मदन मित्रा विपक्ष के नेता ऋतब्रत के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल हो गए हैं। मदन मित्रा ने आरोप लगाया कि पार्टी में वह प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पा रहे थे। उनका कहना है कि पार्टी नेतृत्व संगठन को मजबूत करने के बजाय महासचिव अभिषेक बनर्जी को आगे बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी चिंताओं को पार्टी नेतृत्व ने बार-बार नजरअंदाज किया। गौरतलब है कि हाल ही में ममता बनर्जी ने मदन मित्रा को टीएमसी विधायकों का मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) भी बनाया था।
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दो महीने पहले ही ली राज्यसभा की सदस्यता
कोयल मलिक ने 6 अप्रैल 2026 को पश्चिम बंगाल का प्रतिनिधित्व करते हुए राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ ली थी। उन्हें तृणमूल कांग्रेस ने राज्यसभा के लिए नामित किया था, हालांकि अब उनके अचानक इस्तीफे को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और टीएमसी के लिए एक बड़े राजनीतिक झटके के रूप में देखा जा रहा है। राजनीति में आने से पहले कोयल मलिक बंगाली फिल्म उद्योग का एक बेहद चर्चित और लोकप्रिय चेहरा रही हैं। उन्हें टॉलीवुड की 'टॉली-क्वीन' भी कहा जाता है। पिछले दो दशकों से वह बंगाली सिनेमा की सबसे सफल अभिनेत्रियों में गिनी जाती हैं।
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कोयल मलिक का फिल्मी सफर
उन्होंने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत साल 2003 में सुपरहिट फिल्म 'नेटर गुरु' से की थी। इसके बाद 'बंधन' (2004), 'शुभदृष्टि' (2005), 'पागलू' (2011), 'हेमलॉक सोसाइटी' (2012) और 'मितिन माशी' थ्रिलर सीरीज (2019) जैसी कई सफल फिल्मों में मुख्य भूमिका निभाकर दर्शकों के दिलों में खास पहचान बनाई। कोयल मलिक को अपने शानदार अभिनय के लिए कई प्रतिष्ठित सम्मान भी मिल चुके हैं। उन्हें फिल्मफेयर अवॉर्ड बांग्ला, दो बीएफजेए अवॉर्ड और साल 2023 में पश्चिम बंगाल सरकार का प्रतिष्ठित 'महानायक सम्मान' प्रदान किया गया था। अगर उनके पारिवारिक जीवन की बात करें तो वह बंगाली सिनेमा के दिग्गज अभिनेता रंजीत मलिक और दीपा मलिक की बेटी हैं। फिलहाल उनके इस फैसले ने टीएमसी की राजनीति और पश्चिम बंगाल के सियासी गलियारों में हलचल बढ़ा दी है।
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कल करीबी नेता ने भी छोड़ा था साथ
इससे एक दिन पहले ही ममता बनर्जी के करीबी नेता मदन मित्रा ने भी टीएमसी के सभी पदों से इस्तीफा देने का एलान किया था। कमरहाटी से विधायक मदन मित्रा विपक्ष के नेता ऋतब्रत के नेतृत्व वाले बागी गुट में शामिल हो गए हैं। मदन मित्रा ने आरोप लगाया कि पार्टी में वह प्रभावी ढंग से काम नहीं कर पा रहे थे। उनका कहना है कि पार्टी नेतृत्व संगठन को मजबूत करने के बजाय महासचिव अभिषेक बनर्जी को आगे बढ़ाने पर ज्यादा ध्यान दे रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी चिंताओं को पार्टी नेतृत्व ने बार-बार नजरअंदाज किया। गौरतलब है कि हाल ही में ममता बनर्जी ने मदन मित्रा को टीएमसी विधायकों का मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) भी बनाया था।
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