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West Bengal: सिलीगुड़ी में बच्चों में बढ़ रही सांस की बीमारी, सात की हो चुकी है मौत

Sun, 05 Mar 2023 12:59 AM IST
वीरेंद्र शर्मा एएनआई, सिलीगुड़ी
एएनआई, सिलीगुड़ी Published by: वीरेंद्र शर्मा Updated Sun, 05 Mar 2023 12:59 AM IST
सार

सिलीगुड़ी के उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज (एनबीएमसीएच) में सांस की बीमारी से पीड़ित 26 बच्चों का इलाज चल रहा है, अन्य को क्रिटिकल केयर यूनिट में भी भर्ती कराया गया है।

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West Bengal Rise in cases of children suffering from respiratory infections in Siliguri news in hindi
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

पश्चिम बंगाल में सांस की बीमारी के मामलों में इजाफा हो रहा है। अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक बच्चों में सबसे ज्यादा वृद्धि देखी जा रही है। 
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सिलीगुड़ी के उत्तर बंगाल मेडिकल कॉलेज (एनबीएमसीएच) में सांस की बीमारी से पीड़ित 26 बच्चों का इलाज चल रहा है, अन्य को क्रिटिकल केयर यूनिट में भी भर्ती कराया गया है। अस्पताल के अधिकारियों के मुताबिक, यह सामान्य वायरल संक्रमण का समय है। इस मौसम में इन्फ्लूएंजा, पैरा इन्फ्लुएंजा और मेटा नोवा जैसे वायरस पाए जाते हैं। चूंकि इन सभी के लक्षण समान हैं।

एनबीएमसीएच के अधीक्षक डॉ. संजय मल्लिक ने कहा, वर्तमान में, कोलकाता के विभिन्न अस्पतालों में मरीजों की संख्या उतनी नहीं है। लेकिन हम कड़ी निगरानी रख रहे हैं और हर दिन का डेटा ले रहे हैं। उन्होंने कहा, भविष्य में संख्या बढ़ने पर बच्चों को भर्ती करने के लिए अस्पताल में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध हैं। लेकिन हमारे पास एडेनोवायरस मामलों की जांच करने की सुविधा नहीं है। 
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क्या है एडेनोवायरस?
बच्चों में एडेनोवायरस आमतौर पर श्वसन और आंत्र नलिका में संक्रमण का कारण बनता है। चिकित्सकों का कहना है कि दो साल तक के उम्र के बच्चों को संक्रमण का सबसे ज्यादा खतरा रहता है। दो से पांच साल की उम्र वाले बच्चों को भी संक्रमण का अधिक खतरा होता है। पांच से 10 साल तक के बच्चे भी इसकी चपेट में आ सकते हैं, लेकिन उन्हें कम उम्र के बच्चों की तुलना में इसका खतरा कम होता है। चिकित्सकों  ने कहा कि 10 साल से अधिक उम्र के बच्चों के इस वायरस से संक्रमित होने का कम खतरा होता है। फिर भी सावधानी बरतनी चाहिए, क्योंकि ज्यादातर मामलों का घर पर ही इलाज संभव है।
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सात बच्चों की हो चुकी है मौत 
पश्चिम बंगाल में सांस के संक्रमण से सात बच्चों की मौत हो चुकी है। कोलकाता के सरकारी अस्पतालों में पांच और बांकुरा सम्मिलानी मेडिकल कॉलेज में दो बच्चों की मौत हुई थी। 
 
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