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पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा विधेयक पारित: बिना मुकदमे 12 महीने तक हिरासत,नए कानून में क्या है खास?
Mon, 29 Jun 2026 08:28 PM IST
राकेश कुमार
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता।
अमर उजाला ब्यूरो, कोलकाता।
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 29 Jun 2026 08:28 PM IST
सार
क्या 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा विधेयक' राज्य से संगठित अपराध और राजनीतिक हिंसा को पूरी तरह खत्म करने में सफल हो पाएगा? 176 विधायकों के भारी समर्थन से पारित हुए इस कानून में बिना मुकदमे 12 महीने की कैद और संपत्ति के नुकसान की भरपाई जैसे कई बेहद कड़े प्रावधान शामिल किए गए हैं।
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बंगाल विधानसभा में नया बिल पारित
- फोटो : @AI/अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पश्चिम बंगाल विधानसभा ने सोमवार को राज्य में हिंसा, दंगा, उगाही और संगठित असामाजिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण के उद्देश्य से लाए गए 'पश्चिम बंगाल सार्वजनिक सुरक्षा एवं असामाजिक गतिविधि नियंत्रण विधेयक, 2026' को बहुमत से पारित कर दिया। विधेयक के पक्ष में 176 विधायक रहे, जबकि 42 ने विरोध में मतदान किया। करीब 20 सदस्यों ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया।
सरकार का कहना है कि नया कानून राज्य में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने, संगठित हिंसा पर समय रहते नियंत्रण करने और सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया है। विधेयक में गंभीर मामलों में असामाजिक गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों को बिना मुकदमे अधिकतम 12 महीने तक निवारक निरुद्ध (प्रिवेंटिव डिटेंशन) में रखने का प्रावधान किया गया है।
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने क्या-क्या कहा?
विधानसभा में चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यह कानून किसी आम नागरिक के खिलाफ नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए है जो दंगा, उगाही, संगठित हिंसा और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली गतिविधियों में शामिल रहते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य राज्य में शांति, सुरक्षा और कानून का प्रभावी शासन सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री के अनुसार, मौजूदा कानूनी व्यवस्था में हिंसा के दौरान सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से क्षतिपूर्ति वसूलने के पर्याप्त प्रावधान नहीं थे। नए कानून के माध्यम से इस कमी को दूर किया गया है।
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उन्होंने कहा कि अब सार्वजनिक अथवा निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की जवाबदेही तय करने के साथ उनसे क्षतिपूर्ति भी वसूली जा सकेगी। मुख्यमंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि कानून का किसी भी प्रकार के राजनीतिक उद्देश्य से दुरुपयोग नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्रवाई केवल कानून में निर्धारित प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी। सरकार का मानना है कि इससे भविष्य में हिंसक घटनाओं और संगठित अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
सदन में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पिछले वर्षों के अनुभवों से यह महसूस किया गया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिक प्रभावी कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता है। उन्होंने सभी दलों से राज्य को हिंसा और असामाजिक गतिविधियों से मुक्त बनाने के लिए सहयोग की अपील की। विधेयक पारित होने के बाद अब इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। अधिसूचना जारी होने के बाद नया कानून प्रभावी होगा।
क्यों जरूरी बताया सरकार ने नया कानून?
सरकार के अनुसार, मौजूदा कानून कई मामलों में पर्याप्त प्रभावी नहीं थे। विशेष रूप से दंगा और हिंसा के दौरान सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति को होने वाले नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करने और संगठित हिंसा की समय रहते रोकथाम के लिए नए कानूनी प्रावधानों की आवश्यकता महसूस की गई। सरकार का दावा है कि यह कानून राज्य में शांति, निवेश और सामान्य जनजीवन की सुरक्षा को मजबूत करेगा।
विधेयक की प्रमुख बातें
-गंभीर मामलों में बिना मुकदमे अधिकतम 12 माह तक निवारक निरुद्ध
(प्रिवेंटिव डिटेंशन) का प्रावधान।
-दंगा, उगाही, संगठित हिंसा और असामाजिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण का उद्देश्य।
-सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से क्षतिपूर्ति वसूलने की व्यवस्था।
-कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए विशेष कानूनी ढांचा।
-सरकार का दावा-कानून का उद्देश्य आम नागरिक नहीं, बल्कि हिंसक और संगठित
असामाजिक तत्वों पर प्रभावी कार्रवाई करना है।
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सरकार का कहना है कि नया कानून राज्य में कानून-व्यवस्था को और मजबूत बनाने, संगठित हिंसा पर समय रहते नियंत्रण करने और सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने के उद्देश्य से लाया गया है। विधेयक में गंभीर मामलों में असामाजिक गतिविधियों में संलिप्त व्यक्तियों को बिना मुकदमे अधिकतम 12 महीने तक निवारक निरुद्ध (प्रिवेंटिव डिटेंशन) में रखने का प्रावधान किया गया है।
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मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने क्या-क्या कहा?
विधानसभा में चर्चा का जवाब देते हुए मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि यह कानून किसी आम नागरिक के खिलाफ नहीं, बल्कि उन लोगों के लिए है जो दंगा, उगाही, संगठित हिंसा और कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वाली गतिविधियों में शामिल रहते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य राज्य में शांति, सुरक्षा और कानून का प्रभावी शासन सुनिश्चित करना है। मुख्यमंत्री के अनुसार, मौजूदा कानूनी व्यवस्था में हिंसा के दौरान सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से क्षतिपूर्ति वसूलने के पर्याप्त प्रावधान नहीं थे। नए कानून के माध्यम से इस कमी को दूर किया गया है।
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उन्होंने कहा कि अब सार्वजनिक अथवा निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों की जवाबदेही तय करने के साथ उनसे क्षतिपूर्ति भी वसूली जा सकेगी। मुख्यमंत्री ने सदन को आश्वस्त किया कि कानून का किसी भी प्रकार के राजनीतिक उद्देश्य से दुरुपयोग नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कार्रवाई केवल कानून में निर्धारित प्रक्रिया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर होगी। सरकार का मानना है कि इससे भविष्य में हिंसक घटनाओं और संगठित अपराध पर प्रभावी अंकुश लगाने में मदद मिलेगी।
सदन में चर्चा के दौरान मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य में पिछले वर्षों के अनुभवों से यह महसूस किया गया कि कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए अधिक प्रभावी कानूनी व्यवस्था की आवश्यकता है। उन्होंने सभी दलों से राज्य को हिंसा और असामाजिक गतिविधियों से मुक्त बनाने के लिए सहयोग की अपील की। विधेयक पारित होने के बाद अब इसे राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा जाएगा। अधिसूचना जारी होने के बाद नया कानून प्रभावी होगा।
क्यों जरूरी बताया सरकार ने नया कानून?
सरकार के अनुसार, मौजूदा कानून कई मामलों में पर्याप्त प्रभावी नहीं थे। विशेष रूप से दंगा और हिंसा के दौरान सार्वजनिक एवं निजी संपत्ति को होने वाले नुकसान की भरपाई सुनिश्चित करने और संगठित हिंसा की समय रहते रोकथाम के लिए नए कानूनी प्रावधानों की आवश्यकता महसूस की गई। सरकार का दावा है कि यह कानून राज्य में शांति, निवेश और सामान्य जनजीवन की सुरक्षा को मजबूत करेगा।
विधेयक की प्रमुख बातें
-गंभीर मामलों में बिना मुकदमे अधिकतम 12 माह तक निवारक निरुद्ध
(प्रिवेंटिव डिटेंशन) का प्रावधान।
-दंगा, उगाही, संगठित हिंसा और असामाजिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण का उद्देश्य।
-सरकारी और निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों से क्षतिपूर्ति वसूलने की व्यवस्था।
-कानून-व्यवस्था और सार्वजनिक सुरक्षा को मजबूत करने के लिए विशेष कानूनी ढांचा।
-सरकार का दावा-कानून का उद्देश्य आम नागरिक नहीं, बल्कि हिंसक और संगठित
असामाजिक तत्वों पर प्रभावी कार्रवाई करना है।