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चुनाव बाद बंगाल में बवाल: मूर्तियां टूटीं, दफ्तर जले और दो कार्यकर्ताओं की मौत; संदेशखाली में CRPF जवान घायल

Wed, 06 May 2026 10:58 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Wed, 06 May 2026 10:58 AM IST
सार

पश्चिम बंगाल में चुनाव नतीजे आने के बाद भयंकर हिंसा भड़क उठी है। भीड़ ने लेनिन की मूर्ति तोड़ी और कांग्रेस ने टीएमसी दफ्तर पर कब्जा किया। राज्य में अलग-अलग हिंसक घटनाओं में भाजपा और टीएमसी के एक-एक कार्यकर्ता की हत्या हो गई है। आसनसोल और कोलकाता समेत कई इलाकों में पार्टी कार्यालयों में तोड़फोड़ और आगजनी की गई। आइए, विस्तार से जानते हैं कि बंगाल में चुनाव के बाद कहां-कहां हिंसा हुई...

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West Bengal post poll violence Asansol TMC office fire BJP worker Madhu Mondal TMC worker Abir Sheikh EC
बंगाल में हिंसा का खेल शुरू - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के नतीजे आते ही राज्य में राजनीतिक हिंसा का भयंकर दौर एक बार फिर से शुरू हो गया है। चुनाव परिणाम घोषित होने के बाद कई प्रमुख इलाकों से आगजनी, भारी तोड़फोड़ और हत्या की खौफनाक खबरें लगातार सामने आ रही हैं। आक्रोशित भीड़ ने लेनिन की मूर्ति को तोड़ दिया है और कांग्रेस ने टीएमसी के एक दफ्तर पर अपना कब्जा जमा लिया है। राज्य के अलग-अलग हिस्सों में विभिन्न राजनीतिक दलों के कार्यकर्ता आपस में बुरी तरह से भिड़ गए हैं, जिससे चारों तरफ तनाव और दहशत का माहौल बना हुआ है। चुनाव आयोग ने राज्य में इस बढ़ती राजनीतिक हिंसा को बेहद गंभीरता से लेते हुए प्रशासन को सख्त से सख्त कार्रवाई करने के स्पष्ट आदेश दिए हैं।
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इस चुनावी हिंसा की आग में मुख्य रूप से आसनसोल, कोलकाता, न्यू टाउन और बीरभूम जैसे संवेदनशील इलाके सबसे ज्यादा झुलस रहे हैं। मंगलवार को भड़की इस भीषण हिंसा में भाजपा और तृणमूल कांग्रेस के एक-एक कार्यकर्ता को अपनी जान गंवानी पड़ी है। न्यू टाउन इलाके में भाजपा की एक विजय रैली निकल रही थी, उसी दौरान हुए विवाद में भाजपा कार्यकर्ता की मौत हो गई। वहीं, बीरभूम जिले के नानूर इलाके में टीएमसी कार्यकर्ता अबीर शेख की बेरहमी से हत्या कर दी गई। इसका सीधा आरोप भाजपा के कार्यकर्ताओं पर लगाया गया। इसके अलावा पूरे राज्य में कई जगहों पर विशेष रूप से टीएमसी के दफ्तरों को निशाना बनाया गया है और उनमें जमकर आगजनी की गई है।
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उपद्रवियों ने कैसे मचाया भारी उत्पात?
आसनसोल उत्तर के कोर्ट मोड़ इलाके में टीएमसी पार्षद मौसमी बोस के दफ्तर को देर रात आग के हवाले कर दिया गया। आग इतनी भयंकर थी कि पूरा दफ्तर जलकर खाक हो गया और पास की एक दुकान को भी भारी नुकसान पहुंचा। स्थानीय भाजपा विधायक कृष्णेंदु मुखर्जी ने इसकी सूचना तुरंत पुलिस और फायर ब्रिगेड को देकर आग पर काबू पाया। इसी तरह, कोलकाता के कसबा इलाके में रूबी क्रॉसिंग के पास और टॉलीगंज में भी भीड़ ने भाजपा के झंडे लेकर टीएमसी नेताओं के दफ्तरों में भारी तोड़फोड़ की। सिलीगुड़ी में भी टीएमसी कार्यालय में आग लगाने की घटना का वीडियो सामने आया है, जिससे राज्य में कानून व्यवस्था पर गहरे सवाल उठ रहे हैं।
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टीएमसी और भाजपा ने एक-दूसरे पर क्या आरोप लगाए?
इस खौफनाक हिंसा को लेकर टीएमसी और भाजपा के बीच तीखी बयानबाजी और भारी आरोप-प्रत्यारोप का दौर जारी है। टीएमसी सांसद सागरिका घोष और अन्य वरिष्ठ नेताओं ने आरोप लगाया है कि भाजपा चुनाव जीतने के बाद सरेआम गुंडागर्दी पर उतर आई है और हमारे उम्मीदवारों तथा कार्यकर्ताओं पर जानलेवा हमले कर रही है। दूसरी तरफ, वरिष्ठ भाजपा नेता राहुल सिन्हा ने इन सभी गंभीर आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस तोड़फोड़ में किसी भाजपा कार्यकर्ता का हाथ नहीं है, बल्कि यह टीएमसी की अपनी अंदरूनी गुटबाजी और चुनाव के नतीजों से उपजी गहरी हताशा का ही सीधा नतीजा है।



हिंसा रोकने के लिए अधिकारियों को क्या कड़े निर्देश दिए?
चुनाव के बाद राज्य भर में भड़की इस भारी हिंसा पर चुनाव आयोग ने बेहद सख्त और कड़ा रुख अपनाया है। चुनाव आयोग ने पश्चिम बंगाल के मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला, डीजीपी सिद्धार्थ नाथ गुप्ता और केंद्रीय सुरक्षा बलों को स्थिति को तुरंत नियंत्रण में लेने के सख्त निर्देश दिए हैं। आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों को स्पष्ट आदेश दिया है कि राज्य में हिंसा और उपद्रव करने वालों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' यानी शून्य सहनशीलता की नीति सख्ती से अपनाई जाए। इसका सीधा मतलब यह है कि शांति भंग करने वाला व्यक्ति चाहे किसी भी राजनीतिक दल से जुड़ा हो, उसके खिलाफ बिना किसी भेदभाव के तुरंत और सबसे कड़ी कानूनी कार्रवाई की जानी चाहिए।


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