₹440 करोड़ के फंड पर तकरार: बागी ऋतब्रत पर बरसे कुणाल घोष, पूछा- दागी था पैसा तो चुनाव में क्यों किया इस्तेमाल
पश्चिम बंगाल चुनाव में मिली हार के बाद टीएमसी की अंदरूनी कलह अब 440 करोड़ रुपये के बैंक फंड के फ्रीज होने के साथ कानूनी दलदल में फंस चुकी है। ऋतब्रत बनर्जी गुट के 10 विधायकों की शिकायत पर साइबर क्राइम पुलिस ने यह बड़ी कार्रवाई की है। इस बीच कुणाल घोष ने ऋतब्रत बनर्जी पर निशाना साधा है।
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क्या है मामला?
विधानसभा चुनाव में मिली करारी हार के जख्म अभी सूखे भी नहीं थे कि तृणमूल कांग्रेस के भीतर एक ऐसी वित्तीय सर्जिकल स्ट्राइक हुई है, जिसने पूरी पार्टी को हिलाकर रख दिया है। सांसदों और विधायकों की बगावत झेल रही मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अब तक का सबसे बड़ा आर्थिक झटका लगा है। पार्टी के ही बागी विधायकों की शिकायत के बाद टीएमसी के तीन मुख्य बैंक खातों को पूरी तरह 'डेबिट फ्रीज' कर दिया गया है। सूत्रों के मुताबिक, इन खातों में करीब 440 करोड़ रुपये की भारी-भरकम राशि जमा है, जिसका इस्तेमाल अब पार्टी नहीं कर पाएगी। इससे पहले न्यूज एजेंसी पीटीआई ने इन खातों में 600 करोड़ रुपये के फंड की बात की थी।
क्या है 'डेबिट फ्रीज' का खेल और कैसे फंसे खाते?
आसान भाषा में समझें तो 'डेबिट फ्रीज' का मतलब है कि इन खातों में पैसे आ तो सकते हैं, लेकिन इनसे एक भी रुपया बाहर नहीं निकाला जा सकता। पुलिस के एक आला अधिकारी ने इस कार्रवाई की पुष्टि की है। यह पूरा एक्शन विपक्ष के नेता ऋतब्रत बनर्जी के खेमे से जुड़े 10 बागी विधायकों की लिखित शिकायत के बाद हुआ है। इन विधायकों ने सीधे बिधाननगर पुलिस कमिश्नरेट के साइबर क्राइम थाने में दस्तक दी और एफआईआर दर्ज करने की मांग की। विधायकों का सीधा स्टैंड था कि पार्टी के इन खातों में जमा करोड़ों रुपये के असली सोर्स यानी स्रोत की आपराधिक जांच होनी चाहिए।
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'कट-मनी' और घोटालों की रकम का लगा संगीन आरोप
इस हाई-प्रोफाइल मामले में जो शिकायत दर्ज कराई गई है, उसके पन्ने बेहद चौंकाने वाले हैं। बागी विधायकों ने आरोप लगाया है कि इन खातों में जो 440 करोड़ रुपये पड़े हैं, वे कोई सीधा-साधा चंदा नहीं हैं। शिकायत में साफ तौर पर अंदेशा जताया गया है कि यह भारी-भरकम रकम संदिग्ध 'कट-मनी' कलेक्शन, सरकारी फंड्स की हेराफेरी और अलग-अलग घोटालों के जरिए जुटाई गई हो सकती है। आरोप है कि प्रभाव का गलत इस्तेमाल करके और बेईमानी से इस पैसे को डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए इन खातों में डायवर्ट किया गया।
अरूप बिस्वास का 'लेटर बम' और कुणाल घोष का पलटवार
इस पूरी कहानी में नया ट्विस्ट पूर्व मंत्री अरूप बिस्वास के उस पत्र से आया, जो उन्होंने कुछ दिन पहले बैंक को लिखा था। बिस्वास ने दावा किया था कि पार्टी का 500 करोड़ रुपये से ज्यादा का फंड तब तक रोक कर रखा जाए, जब तक कि संगठन के भीतर का अंदरूनी विवाद सुलझ नहीं जाता। दिलचस्प बात यह है कि यह वही साइबर क्राइम थाना है, जो अर्जेंटीना के फुटबॉलर लियोनेल मेसी के कोलकाता दौरे के दौरान हुई गड़बड़ी के मामले में बिस्वास के खिलाफ दर्ज एफआईआर की जांच कर रहा है।
दूसरी तरफ, ममता खेमे के वफादार और तेज-तर्रार नेता कुणाल घोष ने अरूप बिस्वास पर ही बड़ा पलटवार कर दिया है। घोष ने साफ शब्दों में कहा कि अरूप बिस्वास सिर्फ पार्टी के पूर्व कोषाध्यक्ष थे। पांच जून को हुई एग्जीक्यूटिव कमेटी की बैठक में सर्वसम्मति से सुभाशीष चक्रवर्ती को नया कोषाध्यक्ष चुना जा चुका है। इसलिए बिस्वास को पार्टी के वित्तीय मामलों पर बोलने का कोई कानूनी या नैतिक अधिकार नहीं है।