पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव: NHRC का केंद्र, राज्य सरकार और SEC को नोटिस, मानवाधिकार संरक्षण पर मांगी रिपोर्ट
आयोग ने एक बयान में कहा कि उसने अपने महानिदेशक (जांच) को एक विशेष मानवाधिकार पर्यवेक्षक के रूप में एसईसी के परामर्श से पश्चिम बंगाल का मौके पर सर्वेक्षण करने के लिए नियुक्त किया है, ताकि आगामी चुनावों में हिंसा की संभावना वाले संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्रों की पहचान की जा सके।
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राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने केंद्र, पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) को नोटिस भेजा है और उनसे आगामी पंचायत चुनाव में मानवाधिकार संरक्षण को लेकर किए जा रहे उपायों पर रिपोर्ट मांगी है।
एनएचआरसी ने एक बयान में यह भी कहा कि उसने अपने महानिदेशक (जांच) को एक विशेष मानवाधिकार पर्यवेक्षक के रूप में राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) के परामर्श से पश्चिम बंगाल का मौके पर सर्वेक्षण करने के लिए नियुक्त किया है, ताकि आगामी चुनावों में हिंसा की संभावना वाले 'संवेदनशील निर्वाचन क्षेत्रों' की पहचान की जा सके।
आयोग ने पश्चिम बंगाल में चुनाव संबंधी विभिन्न हिंसा की घटनाओं के बारे में मीडिया में आई एक खबर का स्वत: संज्ञान लिया है, जिसमें राजनीतिक दलों के लोगों को निशाना बनाया गया है। बयान में कहा गया है कि मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, पूर्व मेदिनीपुर जिले में एक राजनीतिक कार्यकर्ता (60 वर्षीय), बूथ अध्यक्ष का कथित तौर पर अपहरण कर लिया गया और उनकी हत्या कर दी गई।
मृतक के परिवार के सदस्यों ने आरोप लगाया है कि हत्या के लिए प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक समूह के 34 स्थानीय कार्यकर्ता जिम्मेदार हैं। इसमें कहा गया है कि एक अन्य कार्यकर्ता संजय तांती को भी एक अज्ञात स्थान पर ले जाया गया जहां प्रतिद्वंद्वी राजनीतिक कार्यकर्ताओं ने उन्हें कथित तौर पर बुरी तरह पीटा और एक अन्य घटना में आसनसोल (पश्चिम बर्धमान) के एक नेता राजेंद्र शॉ की राष्ट्रीय राजमार्ग पर गोली मारकर हत्या कर दी गई।
आयोग ने कहा कि राज्य में हिंसा की कई अन्य घटनाएं हुई हैं, जिसमें चुनाव लड़ने वाली पार्टियों के कार्यकर्ता कथित तौर पर एक-दूसरे से भिड़े हैं और 2018 के ग्रामीण चुनावों को पश्चिम बंगाल राज्य में सबसे हिंसक और खूनी चुनावों में से एक माना जाता है। इसलिए एनएचआरसी ने गृह मंत्रालय, राज्य सरकार और एसईसी को नोटिस जारी कर आगामी पंचायत चुनावों के लिए किए गए 'मानवाधिकार संरक्षण उपायों' पर रिपोर्ट मांगी है।
बयान में कहा गया है, एनएचआरसी ने इसे मानवाधिकारों को प्रभावित करने वाला एक 'गंभीर मुद्दा' माना है और व्यापक सार्वजनिक हित को संरक्षित करने के लिए संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत गारंटीकृत जीवन और आजीविका के अधिकार को बनाए रखने के उद्देश्य से 'नागरिकों के किसी भी प्रकार के मानवाधिकार उल्लंघन को रोकने' के लिए समय पर कदम उठाना उचित और आवश्यक पाया है।
टीएमसी के लिए एक अहम परीक्षा
भ्रष्टाचार के आरोपों के बीच तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) पश्चिम बंगाल में पंचायत चुनाव में उतरेगी। इसे 2024 के लोकसभा चुनाव से पहले पार्टी के लिए एक अहम परीक्षा माना जा रहा है। टीएमसी नेतृत्व का मानना है कि लोकसभा और ग्रामसभा चुनावों का असर अलग-अलग हो सकता है। हालांकि, राज्य की अधिक से अधिक संसदीय सीट हासिल करने के लिए बंगाल के ग्रामीण इलाकों में जीत दर्ज करना महत्वपूर्ण है। राज्य के त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव आठ जुलाई को होने वाले हैं, जिसमें लगभग 5.67 करोड़ मतदाता शामिल हैं, जो जिला परिषदों, पंचायत समितियों और ग्राम पंचायतों की लगभग 74,000 सीट के लिए प्रतिनिधियों का चयन करने के लिए मताधिकार का प्रयोग करेंगे।
पश्चिम बंगाल के विपक्ष के नेता शुभेंदु अधिकारी राज्य में पंचायत चुनाव के लिए नामांकन दाखिल करने के दौरान हुई हिंसा पर कहा कि नामांकन दाखिल जल्दबाजी में कराए जा रहे हैं। बीडीओ कार्यालय को इसकी भनक तक नहीं थी। पंचायत चुनाव प्रक्रिया इतनी गोपनीयता से हो रही है। इसके पीछे क्या मंशा है?
#WATCH | West Bengal LoP Suvendu Adhikari speaks on violence during filing of nomination for Panchayat elections in the state; says, "...This (nomination filing) is being done in such a haste this time. The BDO Office didn't even knowledge of the same. The Panchayat election… pic.twitter.com/kEa34SACnI
— ANI (@ANI) June 11, 2023