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Bengal Panchayat Election: चुनावी हिंसा का विपक्षी एकता पर कैसा असर, क्या 2024 में मुद्दा होगी कानून व्यवस्था?
Tue, 11 Jul 2023 01:59 PM IST
हिमांशु मिश्रा
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु मिश्रा
Updated Tue, 11 Jul 2023 01:59 PM IST
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बंगाल चुनाव में हिंसा
- फोटो :
अमर उजाला
विस्तार
पश्चिम बंगाल में हुए पंचायत चुनाव के नतीजे आज आ रहे है्ं। मतगणना जारी है। मतदान के दिन पूरे प्रदेश में जमकर हिंसा हुई, बैलेट बॉक्स लूटे गए, कई वोटिंग बूथ आग के हवाले कर दिए गए, राजनीतिक दलों के समर्थकों के बीच जमकर मारपीट हुई। इस हिंसा में 20 लोग मारे गए। 500 से ज्यादा लोग घायल हुए।बंगाल के पंचायत चुनाव में हुई इस हिंसा की चर्चा पूरे देश में हो रही है। ममता बनर्जी की सरकार पर सवाल खड़े हो रहे हैं। राज्य चुनाव आयोग कटघरे में है। राजनीतिक जानकारों का कहना है कि चुनाव के नतीजे कुछ भी हों, लेकिन हिंसा की घटनाओं का मुद्दा लोकसभा चुनाव तक हावी रहेगा। आइए जानते हैं इस मुद्दे का आने वाले लोकसभा चुनाव में कितना असर पड़ेगा? विपक्षी एकता पर इसका कैसा असर होगा?
पहले जानिए पश्चिम बंगाल के चुनाव में क्या-क्या हुआ?
शनिवार आठ जुलाई को पश्चिम बंगाल की 63,229 ग्राम पंचायत, 928 जिला परिषद और 9,730 पंचायत समिति की सीटों पर मतदान हुआ। इस बीच, पूरे राज्य में जमकर हिंसा हुई। हिंसा में 16 लोगों की हत्या कर दी गई। 500 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
कूचबिहार में पोलिंग बूथ में तोड़फोड़ के बाद उपद्रवियों ने बैलेट पत्र में आग लगा दी गई। राजनीतिक दलों के समर्थकों ने एक-दूसरे पर बम से हमले किए। सोमवार को राज्य चुनाव आयोग ने 19 जिलों के 696 बूथों पर फिर से मतदान कराया। इस दौरान भी हिंसा हुई। चार लोग मारे गए। इस तरह से मतदान के दोनों दिन कुल मिलाकर 20 लोग हिंसा में मारे गए। चुनाव की तिथियों के एलान के बाद से आंकड़े देखें तो इस बीच, 42 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
शनिवार आठ जुलाई को पश्चिम बंगाल की 63,229 ग्राम पंचायत, 928 जिला परिषद और 9,730 पंचायत समिति की सीटों पर मतदान हुआ। इस बीच, पूरे राज्य में जमकर हिंसा हुई। हिंसा में 16 लोगों की हत्या कर दी गई। 500 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं।
कूचबिहार में पोलिंग बूथ में तोड़फोड़ के बाद उपद्रवियों ने बैलेट पत्र में आग लगा दी गई। राजनीतिक दलों के समर्थकों ने एक-दूसरे पर बम से हमले किए। सोमवार को राज्य चुनाव आयोग ने 19 जिलों के 696 बूथों पर फिर से मतदान कराया। इस दौरान भी हिंसा हुई। चार लोग मारे गए। इस तरह से मतदान के दोनों दिन कुल मिलाकर 20 लोग हिंसा में मारे गए। चुनाव की तिथियों के एलान के बाद से आंकड़े देखें तो इस बीच, 42 से ज्यादा लोग अपनी जान गंवा चुके हैं।
पश्चिम बंगाल पंचायत चुनाव
- फोटो :
अमर उजाला
विपक्षी एकता पर हिंसा का कितना असर?
भाजपा ममता सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस के नेता भी इसकी निंदा कर चुके हैं। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने दावा किया, ‘‘यहां की स्थिति बहुत खराब और तनावपूर्ण है। राज्य में कानून-व्यवस्था बिल्कुल नहीं रह गई है। बंगाल अराजक स्थिति में बदलता जा रहा है।’’
कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने भी ट्वीट करके राज्य में हो रही चुनावी हिंसा को गलत बताया। वहीं, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद डोला सेन ने पंचायत चुनाव से पहले मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा के पीछे कांग्रेस, वामदल और भाजपा का हाथ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को पीछे मदद करने वाले वामदल और कांग्रेस हैं। विपक्षी दलों की बैठक से पहले सेन का बयान विपक्षी एकता में भूचाल ला सकता है।
इसके बाद भी अगर ममता विपक्षी गठबंधन में आती हैं तो भाजपा इसे कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों के खिलाफ भी इस्तेमाल करेगी। इसका उदाहरण अभी से दिखना भी शुरू हो गया है। मंगलवार को भाजपा प्रवक्ता ने कहा, "अगर यह दृश्य बीजेपी शाषित राज्य में देखने को मिला होता, तो हाहाकार मच गया होता. अब राहुल गांधी कहां हैं...? वह 'मोहब्बत की दुकान' खोलने वाले थे।
पात्रा ने कहा कि विपक्ष के वो नेता, जो हाथ पकड़-पकड़ कर राज्यों में खड़े होते हैं, अब कहां हैं? कहां हैं लालू प्रसाद यादव, कहां हैं नीतीश कुमार और कहां हैं 'मोहब्बत की दुकान' खोलने वाले राहुल गांधी?"
भाजपा ममता सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस के नेता भी इसकी निंदा कर चुके हैं। कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी ने दावा किया, ‘‘यहां की स्थिति बहुत खराब और तनावपूर्ण है। राज्य में कानून-व्यवस्था बिल्कुल नहीं रह गई है। बंगाल अराजक स्थिति में बदलता जा रहा है।’’
कांग्रेस महासचिव दिग्विजय सिंह ने भी ट्वीट करके राज्य में हो रही चुनावी हिंसा को गलत बताया। वहीं, तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद डोला सेन ने पंचायत चुनाव से पहले मुर्शिदाबाद में हुई हिंसा के पीछे कांग्रेस, वामदल और भाजपा का हाथ बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि बंगाल विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को पीछे मदद करने वाले वामदल और कांग्रेस हैं। विपक्षी दलों की बैठक से पहले सेन का बयान विपक्षी एकता में भूचाल ला सकता है।
इसके बाद भी अगर ममता विपक्षी गठबंधन में आती हैं तो भाजपा इसे कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों के खिलाफ भी इस्तेमाल करेगी। इसका उदाहरण अभी से दिखना भी शुरू हो गया है। मंगलवार को भाजपा प्रवक्ता ने कहा, "अगर यह दृश्य बीजेपी शाषित राज्य में देखने को मिला होता, तो हाहाकार मच गया होता. अब राहुल गांधी कहां हैं...? वह 'मोहब्बत की दुकान' खोलने वाले थे।
पात्रा ने कहा कि विपक्ष के वो नेता, जो हाथ पकड़-पकड़ कर राज्यों में खड़े होते हैं, अब कहां हैं? कहां हैं लालू प्रसाद यादव, कहां हैं नीतीश कुमार और कहां हैं 'मोहब्बत की दुकान' खोलने वाले राहुल गांधी?"
हिंसा का असर क्या आगामी लोकसभा चुनाव पर भी होगा?
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पश्विम बंगाल चुनाव में हुई हिंसा का बड़े पैमाने पर देश की सियासत पर असर पड़ेगा। हिंसा से जुड़े वीडियो और फोटो खूब वायरल हो रहे हैं। इससे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसके बाद सियासी जानकारों का मानना है कि बंगाल चुनाव में हुई हिंसा का उदाहरण भाजपा पूरे देश में देगी। वह इसे केवल टीएमसी नहीं, बल्कि गठबंधन के खिलाफ प्रचार करेगी।
टीएमसी विपक्षी गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। ऐसे में भाजपा इस हिंसा का मुद्दा लोकसभा चुनाव और फिर अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों में जोरशोर से उठा सकती है। विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों की कानून व्यवस्था पर भी भाजपा प्रश्न उठाएगी। इसमें बंगाल का नाम सबसे जोरशोर से लिया जाएगा। इसके साथ ही राजस्थान, पंजाब, छत्तीसगढ़, बिहार जैसे राज्यों की कानून व्यवस्था को लेकर भाजपा शुरू से ही उंगली उठाती रही है। अब बंगाल की हिंसा के बाद कानून व्यवस्था का भाजपा बड़ा चुनावी मुद्दा बना सकती है।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि पश्विम बंगाल चुनाव में हुई हिंसा का बड़े पैमाने पर देश की सियासत पर असर पड़ेगा। हिंसा से जुड़े वीडियो और फोटो खूब वायरल हो रहे हैं। इससे पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री और टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी पर सवाल उठाए जा रहे हैं। इसके बाद सियासी जानकारों का मानना है कि बंगाल चुनाव में हुई हिंसा का उदाहरण भाजपा पूरे देश में देगी। वह इसे केवल टीएमसी नहीं, बल्कि गठबंधन के खिलाफ प्रचार करेगी।
टीएमसी विपक्षी गठबंधन के साथ चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। ऐसे में भाजपा इस हिंसा का मुद्दा लोकसभा चुनाव और फिर अन्य राज्यों के विधानसभा चुनावों में जोरशोर से उठा सकती है। विपक्षी दलों द्वारा शासित राज्यों की कानून व्यवस्था पर भी भाजपा प्रश्न उठाएगी। इसमें बंगाल का नाम सबसे जोरशोर से लिया जाएगा। इसके साथ ही राजस्थान, पंजाब, छत्तीसगढ़, बिहार जैसे राज्यों की कानून व्यवस्था को लेकर भाजपा शुरू से ही उंगली उठाती रही है। अब बंगाल की हिंसा के बाद कानून व्यवस्था का भाजपा बड़ा चुनावी मुद्दा बना सकती है।