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West Bengal: 2011 के बाद जारी सभी जाति प्रमाण पत्रों फिर से जांच के आदेश, पश्चिम बंगाल सरकार का सख्त आदेश

Fri, 15 May 2026 10:57 PM IST
शिवम गर्ग न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शिवम गर्ग Updated Fri, 15 May 2026 10:57 PM IST
सार

पश्चिम बंगाल सरकार ने 2011 के बाद जारी सभी जाति प्रमाण पत्रों की दोबारा जांच का आदेश दिया है। इसका उद्देश्य प्रमाण पत्रों की सत्यता और पारदर्शिता सुनिश्चित करना है।

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West Bengal Orders Statewide Re-verification of Caste Certificates Issued Since 2011
शुभेंदु अधिकारी, मुख्यमंत्री, पश्चिम बंगाल - फोटो : ANI

विस्तार

पश्चिम बंगाल सरकार ने राज्य में जारी जाति प्रमाण पत्रों को लेकर बड़ा प्रशासनिक फैसला लिया है। सरकार ने सभी उप-विभागीय अधिकारियों को निर्देश दिया है कि वर्ष 2011 के बाद जारी सभी जाति प्रमाण पत्रों की दोबारा जांच और सत्यापन किया जाए। इस कदम का उद्देश्य राज्य में जारी प्रमाण पत्रों की सत्यता और पारदर्शिता को सुनिश्चित करना बताया गया है।

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करोड़ों प्रमाण पत्रों की होगी समीक्षा
सरकारी आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2011 के बाद अब तक लगभग 1.69 करोड़ जाति प्रमाण पत्र जारी किए गए हैं। इनमें अनुसूचित जाति (एससी), अनुसूचित जनजाति (एसटी) और अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के प्रमाण पत्र शामिल हैं। इनमें से एक बड़ा हिस्सा 'दुआरे सरकार' कार्यक्रम के तहत जारी किया गया था, जिसके माध्यम से लाखों आवेदन निपटाए गए थे।
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दूसरे चरण के प्रमाण पत्र भी जांच के दायरे में
सरकार के निर्देशों में यह भी कहा गया है कि इस अवधि में जारी सेकेंड जेनरेशन यानी मूल प्रमाण पत्रों के आधार पर बने अन्य प्रमाण पत्रों की भी जांच की जाएगी। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करने को कहा गया है कि सभी प्रमाण पत्र मौजूदा नियमों और कानूनों के अनुसार ही जारी किए गए हों।
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शिकायतों के बाद लिया गया फैसला
हाल के समय में कुछ प्रमाण पत्रों की वैधता और वास्तविकता को लेकर अलग-अलग स्तर पर सवाल उठाए गए थे। इसी के बाद सरकार ने पूरे मामले की समीक्षा करने का निर्णय लिया। प्रशासन का मानना है कि इस प्रक्रिया से सिस्टम में पारदर्शिता बढ़ेगी और गलत तरीके से बने प्रमाण पत्रों पर रोक लगेगी।

गलत प्रमाण पत्र मिलने पर होगी कार्रवाई
सरकारी आदेश में यह स्पष्ट किया गया है कि यदि किसी प्रमाण पत्र में अनियमितता पाई जाती है, तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इसमें पश्चिम बंगाल अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति (पहचान) अधिनियम 1994 और संबंधित नियमों के तहत कार्रवाई का प्रावधान शामिल है।

मतदाता सूची से जुड़े मामलों की भी जांच
आदेश में यह भी कहा गया है कि जिन लोगों या उनके परिजनों के नाम हाल के विशेष पुनरीक्षण (SIR) के दौरान मतदाता सूची से हटाए गए हैं, उनके जाति प्रमाण पत्रों की भी जांच की जाएगी। जरूरत पड़ने पर कानूनी प्रक्रिया के तहत उन्हें रद्द भी किया जा सकता है।


अधिकारियों की जिम्मेदारी तय होगी
सरकार ने साफ कहा है कि इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की लापरवाही को गंभीरता से लिया जाएगा और संबंधित अधिकारी की व्यक्तिगत जिम्मेदारी तय की जाएगी। प्रशासन का मानना है कि यह कदम राज्य में जाति प्रमाण पत्र जारी करने की प्रक्रिया को और अधिक पारदर्शी और विश्वसनीय बनाएगा। इससे सरकारी योजनाओं के लाभ सही पात्र लोगों तक पहुंचने में मदद मिलेगी।

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