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ममता की टिप्पणी पर SC आयोग सख्त: मुख्य सचिव और DGP से तीन दिन में मांगी रिपोर्ट, क्या है पूरा मामला?
Sun, 26 Apr 2026 11:19 PM IST
राकेश कुमार
आईएएनएस, कोलकाता
आईएएनएस, कोलकाता
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 26 Apr 2026 11:19 PM IST
सार
राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने ममता बनर्जी द्वारा एससी समुदाय पर की गई कथित टिप्पणी का स्वतः संज्ञान लिया है। आयोग ने राज्य के शीर्ष अधिकारियों से तीन दिन में रिपोर्ट मांगी है और रिपोर्ट न मिलने पर समन जारी करने की चेतावनी दी है। चुनावी माहौल में इस दखल ने राज्य की राजनीति को और गरमा दिया है।
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बंगाल सीएम ममता बनर्जी
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पश्चिम बंगाल की राजनीति में एक नया उबाल आ गया है। राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग (एनसीएससी) ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। आयोग ने एक बंगाली समाचार चैनल पर प्रसारित वीडियो क्लिप का स्वतः संज्ञान लिया है। इस वीडियो में मुख्यमंत्री कथित तौर पर अनुसूचित जाति (एससी) समुदाय के प्रति अपमानजनक भाषा का प्रयोग कर रही हैं। यह मामला ऐसे समय में सामने आया है जब राज्य में विधानसभा चुनाव की सरगर्मी चरम पर है।
एनसीएससी की निदेशक सोनाली दत्ता ने रविवार को राज्य के मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला और पुलिस महानिदेशक सिद्ध नाथ गुप्ता को आधिकारिक पत्र भेजा है। आयोग ने स्पष्ट किया कि वह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग कर रहा है। इस अनुच्छेद के अंतर्गत आयोग को अनुसूचित जाति के हितों की रक्षा के लिए जांच और पड़ताल करने का पूरा अधिकार है। आयोग ने इस पूरी घटना को बेहद गंभीरता से लिया है।
प्रशासन को अल्टीमेटम
आयोग ने राज्य प्रशासन को कार्रवाई के लिए बहुत कम समय दिया है। पत्र के माध्यम से मुख्य सचिव और डीजीपी को निर्देश दिया गया है कि वे तीन दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट जमा करें। आयोग जानना चाहता है कि अब तक इस मामले में क्या शुरुआती जांच की गई है। साथ ही, वीडियो में कही गई आपत्तिजनक बातों पर प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं, इसका ब्योरा भी मांगा गया है।
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यह भी पढ़ें: पीएम मोदी बोले: TMC की निर्ममता ने मां को रुलाया, माटी सिंडिकेट के हवाले और बंगाल के मानुष पलायन को मजबूर
समन और सिविल कोर्ट की चेतावनी
आयोग ने कहा है कि यदि निर्धारित तीन दिनों में जवाब नहीं मिला, तो वह सख्त कानूनी कदम उठाएगा। एनसीएससी के पास संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत सिविल कोर्ट की शक्तियां होती हैं। यदि प्रशासन सहयोग नहीं करता है, तो आयोग मुख्य सचिव और डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी कर सकता है। उन्हें आयोग के सामने हाजिर होकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
चुनाव पर असर की संभावना
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है। इस चरण में कोलकाता सहित छह जिलों की 142 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। राज्य में एससी समुदाय की आबादी और उनका वोट बैंक हार-जीत में बड़ी भूमिका निभाता है। ऐसे में मतदान से ठीक तीन दिन पहले आयोग का यह नोटिस ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
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एनसीएससी की निदेशक सोनाली दत्ता ने रविवार को राज्य के मुख्य सचिव दुष्यंत नारियाला और पुलिस महानिदेशक सिद्ध नाथ गुप्ता को आधिकारिक पत्र भेजा है। आयोग ने स्पष्ट किया कि वह भारतीय संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत प्राप्त शक्तियों का उपयोग कर रहा है। इस अनुच्छेद के अंतर्गत आयोग को अनुसूचित जाति के हितों की रक्षा के लिए जांच और पड़ताल करने का पूरा अधिकार है। आयोग ने इस पूरी घटना को बेहद गंभीरता से लिया है।
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प्रशासन को अल्टीमेटम
आयोग ने राज्य प्रशासन को कार्रवाई के लिए बहुत कम समय दिया है। पत्र के माध्यम से मुख्य सचिव और डीजीपी को निर्देश दिया गया है कि वे तीन दिनों के भीतर एक्शन टेकन रिपोर्ट जमा करें। आयोग जानना चाहता है कि अब तक इस मामले में क्या शुरुआती जांच की गई है। साथ ही, वीडियो में कही गई आपत्तिजनक बातों पर प्रशासन ने क्या कदम उठाए हैं, इसका ब्योरा भी मांगा गया है।
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समन और सिविल कोर्ट की चेतावनी
आयोग ने कहा है कि यदि निर्धारित तीन दिनों में जवाब नहीं मिला, तो वह सख्त कानूनी कदम उठाएगा। एनसीएससी के पास संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत सिविल कोर्ट की शक्तियां होती हैं। यदि प्रशासन सहयोग नहीं करता है, तो आयोग मुख्य सचिव और डीजीपी को व्यक्तिगत रूप से पेश होने के लिए समन जारी कर सकता है। उन्हें आयोग के सामने हाजिर होकर अपनी स्थिति स्पष्ट करनी होगी।
चुनाव पर असर की संभावना
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव के दूसरे चरण का मतदान 29 अप्रैल को होना है। इस चरण में कोलकाता सहित छह जिलों की 142 सीटों पर वोट डाले जाएंगे। राज्य में एससी समुदाय की आबादी और उनका वोट बैंक हार-जीत में बड़ी भूमिका निभाता है। ऐसे में मतदान से ठीक तीन दिन पहले आयोग का यह नोटिस ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकता है।
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