{"_id":"615b36148ebc3e0ec11fb3de","slug":"west-bengal-legal-hurdle-in-mamatas-oath-governor-rejects-speakers-request-for-early-oath","type":"story","status":"publish","title_hn":"पश्चिम बंगाल: ममता की शपथ में कानूनी अडंगा, राज्यपाल ने ठुकराया स्पीकर का जल्दी शपथ का आग्रह","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
पश्चिम बंगाल: ममता की शपथ में कानूनी अडंगा, राज्यपाल ने ठुकराया स्पीकर का जल्दी शपथ का आग्रह
Mon, 04 Oct 2021 10:42 PM IST
सुरेंद्र जोशी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Mon, 04 Oct 2021 10:42 PM IST
सार
ममता बनर्जी को विधानसभा की सदस्यता जल्दी दिलाने को लेकर स्पीकर बिमान बनर्जी के पत्र के जवाब में राज्यपाल ने कानूनी स्थिति स्पष्ट कर दी है।
विज्ञापन
जगदीप धनखड़
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने विधानसभा स्पीकर बिमान बनर्जी का आग्रह ठुकरा दिया है। स्पीकर चाहते थे कि 30 सितंबर को हुए विधानसभा उपचुनाव में विजयी ममता बनर्जी समेत तीनों तृणमूल सदस्यों को विधानसभा सदस्यता की शपथ जल्दी दिला दी जाए। स्पीकर ने राज्यपाल को पत्र लिखकर शपथ का अधिकार मांगा था।
विज्ञापन
स्पीकर कार्यालय की ओर से राज्यपाल को एक अक्तूबर को भेजे पत्र में कहा गया था कि भवानीपुर, शमसेर गंज व जांगीपुर सीट के उपचुनाव में नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ दिलाने के लिए स्पीकर को अधिकार प्रदान किया जाए।
विज्ञापन
सोमवार को राजभवन ने विधानसभा सचिवालय को भेजे अपने जवाब में कहा कि नवनिर्वाचित विधायकों को शपथ या सदस्यता की पुष्टि के बारे में निर्णय चुनाव के नतीजों की अधिसूचना जारी होने के बाद किया जाएगा। राज्यपाल ने यह भी कहा कि शपथ को लेकर सरकार व स्पीकर कार्यालय का आग्रह कानून की गलत व्याख्या पर आधारित है।
विज्ञापन
विधानसभा सूत्रों के अनुसार तीनों सीटों पर उपचुनाव के कुछ दिनों पूर्व राजभवन से एक पत्र स्पीकर कार्यालय को मिला था। इसमें कहा गया था कि संविधान के अनुच्छेद 188 के तहत राज्यपाल को राज्य विधानसभा के सदस्यों को अधिकार प्रदत्त है। जब सदन चलता है तो राज्यपाल यह अधिकार स्पीकर को देते हैं, अभी चूंकि सदन नहीं चल रहा है, इसलिए यह अधिकार राज्यपाल के पास ही निहित है।
सूत्रों का कहना है कि सीएम ममता बनर्जी चाहती थीं कि वह दुर्गापूजा उत्सव शुरू होने के पूर्व शपथ ले लें, इसलिए राज्यपाल से स्पीकर को यह अधिकार देने का आग्रह किया गया था। राज्यपाल ने चुनाव नतीजों की अधिसूचना जारी होने और सक्षम प्राधिकारी द्वारा उन्हें इसकी सूचना भेजने के बाद ही कोई निर्णय लेने की बात कही।
बता दें, सीएम बनर्जी को चार नवंबर के पूर्व विधानसभा की सदस्यता लेना जरूरी है। बगैर विधायक बने वह सीएम पद पर छह माह तक बनी रह सकती हैं और उनकी यह अवधि चार नवंबर को पूरी हो जाएगी। इसलिए टीएमसी व वह खुद जल्दी शपथ लेना चाहती हैं।
राज्यपाल व स्पीकर के बीच तकरार पुरानी है। जुलाई 2019 में राज्यपाल बनने के बाद से धनखड़ व स्पीकर बनर्जी में तनातनी जारी है। स्पीकर ने विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण के सीधे प्रसारण से भी इनकार कर दिया था।