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बंगाल : 38 दिन वेंटिलेटर पर रहने के बाद व्यक्ति ने दी कोरोना को मात, डॉक्टरों ने कहा चमत्कार
Sat, 09 May 2020 08:36 PM IST
गौरव पाण्डेय
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Sat, 09 May 2020 08:36 PM IST
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सांकेतिक तस्वीर
- फोटो : पेक्सेल्स
पश्चिम बंगाल में दक्षिण कोलकाता के रहने वाले निताईदास मुखर्जी (52) कोरोना वायरस से संक्रमित हुए थे। मुखर्जी 38 दिन तक वेंटिलेटर पर रहने के बाद कोरोना वायरस से मुक्त हुए हैं। उनकी अस्पताल से घर वापसी पर उनके पड़ोसियों ने उनका किसी हीरो की तरह स्वागत किया। माना जा रहा है कि वह देश के पहले ऐसे व्यक्ति हैं जिसने इतने लंबे समय तक वेंटिलेटर पर रहने के बावजूद कोरोना मुक्त हुए हैं।
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चिकित्सकों ने कहा कि यह अस्पताल के अधिकारियों के लिए एक बेहतरीन उपलब्धि है और यह किसी चमत्कार से कम नहीं है। चिकित्सकों ने कहा कि किसी कोविड-19 के मरीज को इतने दिन वेंटिलेटर पर रखना पड़े तो उसके बचने की संभावना बहुत ही कम होती है। अस्पताल ने एक बयान में कहा, 'उन्होंने (निताईदास मुखर्जी) देश में पहला ऐसा व्यक्ति होने का रिकॉर्ड बना दिया है जो 38 जिन कर वेंटिलेटर पर रहा हो और उसके बाद भी कोविड-19 से ठीक हो गया हो।'
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सोमवार को अस्पताल से घर वापस लौटे मुखर्जी ने कहा, 'मैं अस्पताल और चिकित्सकों को धन्यवाद देता हूं जिन्होंने मुझे नया जीवन दिया। आप कह सकते हैं कि यह मेरा दूसरा जीवन है। उनके बिना, अब तक मेरी मृत्यु हो चुकी होती। वे असली हीरो हैं।' हालांकि, मुखर्जी अभी शारीरिक रूप से काफी कमजोर हैं।
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मुखर्जी की पत्नी अपराजिता मुखर्जी ने बताया कि कोरोना वायरस जैसे लक्षण सामने आने पर मुखर्जी को 29 मार्च को एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत में सुधार न होने पर उन्हें उसी रात वेंटिलेटर पर रख दिया गया था। अगले दिन उनकी कोरोना जांच पॉजिटिव आई थी।
अपराजिता ने कहा, 'उनकी हालत और बिगड़ी तो डॉक्टरों ने एक सर्जरी की। डॉक्टरों ने बताया कि उनकी स्थिति बहुत नाजुक है। लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। मुझे इस बात का अंदाजा नहीं था कि मैं उन्हें फिर कभी देख पाऊंगी और मैं भगवान से उनके ठीक होने की प्रार्थना कर रही थी। वह एक समाजसेवी रहे हैं और एक एनजीओ चलाते हैं। मैं मानती हूं कि उन सब लोगों की दुआओं ने जिनकी उन्होंने मदद की थी, वह ठीक हुए हैं।'