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Calcutta High Court: केंद्रीय बलों के असहयोग वाले आरोपों पर सरकार-SEC ने दिया जवाब; हाईकोर्ट ने दिया था आदेश
Thu, 27 Jul 2023 12:08 AM IST
शिव शरण शुक्ला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: शिव शरण शुक्ला
Updated Thu, 27 Jul 2023 12:08 AM IST
सार
चीफ जस्टिस टीएस शिवज्ञानम और जस्टिस उदय कुमार की खंडपीठ के समक्ष अपने हलफनामे में दायर किए। एसईसी के वकील ने अदालत को बताया कि बल समन्वयक की रिपोर्ट में उठाए गए सभी बिंदुओं पर अगली सुनवाई की तारीख पर ध्यान दिया जाएगा।
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कलकत्ता हाईकोर्ट
- फोटो : Social Media
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विस्तार
पश्चिम बंगाल सरकार और राज्य चुनाव आयोग (एसईसी) ने बुधवार को कलकत्ता हाईकोर्ट में बीएसएफ महानिरीक्षक के पंचायत चुनावों के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती में असहयोग के आरोपों पर अपना जवाब दाखिल किया। हाईकोर्ट ने 12 जुलाई को इन आरोपों पर प्रदेश सरकार और एसईसी से हलफनामा दाखिल कर जवाब मांगा था।
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चीफ जस्टिस टीएस शिवज्ञानम और जस्टिस उदय कुमार की खंडपीठ के समक्ष अपने हलफनामे में दायर किए। एसईसी के वकील ने अदालत को बताया कि बल समन्वयक की रिपोर्ट में उठाए गए सभी बिंदुओं पर अगली सुनवाई की तारीख पर ध्यान दिया जाएगा। केंद्र की ओर से पेश अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल अशोक चक्रवर्ती ने कहा, समन्वयक की रिपोर्ट में तैनाती योजना प्रस्तुत करने में देरी की ओर इशारा किया गया है। इसमें कहा गया है कि यह पर्याप्त नहीं है कि योजना जिला मजिस्ट्रेटों को भेजी गई थी। उन्होंने कहा, बूथवार तैनाती की योजना काफी पहले बताई जानी चाहिए थी, जिससे केंद्रीय बलों को तैनाती में मदद मिलती। एसईसी के वकील पीएस रमन ने बताया कि असहयोग के 14 आरोप थे, जिसमें उन्होंने दावा किया कि मुख्य रूप से तैनाती योजना में कथित देरी, उचित समय के भीतर संवेदनशील बूथों के बारे में जानकारी न देना और केंद्रीय बल कमांडरों को जिलेवार तैनाती पर सलाह देना शामिल है। उन्होंने दावा किया कि एसईसी ने एसईसी ने समय सीमा के भीतर उचित तेजी के साथ काम किया था।
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चीफ जस्टिस ने कहा, सुप्रीम कोर्ट के ग्रामीण चुनावों के लिए केंद्रीय बलों की तैनाती के बारे में हाईकोर्ट के आदेश को बरकरार रखने के बाद, उस आदेश को अक्षरश: स्वीकार करके एक संयुक्त अभ्यास किया जाना चाहिए था। उन्होंने कहा, जिन लोगों की जान गई है उन्हें अवमानना का नियम जारी करके या मुआवजे के जरिये वापस नहीं लाया जा सकता। इस मामले में अब 17 अगस्त को सुनवाई होगी।
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कोर्ट ने प्राथमिक शिक्षा बोर्ड के जिला अध्यक्ष व तृणमूल विधायक को छुट्टी पर भेजा
कलकत्ता हाईकोर्ट ने पूर्व बर्द्धमान जिला प्राथमिक शिक्षा बोर्ड के अध्यक्ष और मेमारी के तृणमूल विधायक मधुसूदन भट्टाचार्य के कोर्ट में हाजिर नहीं होने पर छुट्टी पर भेज दिया है। न्यायाधीश अभिजीत गंगोपाध्याय ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा, अगर वह बीमार हैं तो उन्हें उस पद से इस्तीफा दे देना चाहिए। इससे किसी और को काम करने का मौका मिलेगा।
जानकारी के मुताबिक कोर्ट ने मधुसूदन से पूर्व बर्द्धमान जिले में शिक्षक के तबादले की जानकारी मांगी थी। उन्होंने बोर्ड के एक उच्च पदस्थ कर्मचारी से हाई कोर्ट में हलफनामा सौंपा। जबकि कोर्ट ने आदेश दिया था कि शिक्षक के तबादले की सूचना हलफनामे के साथ अध्यक्ष को देनी होगी। इस पर न्यायाधीश गंगोपाध्याय काफी नाराज हुए। मधुसूदन ने कोर्ट को बताया कि वह कोरोना और डेंगू से पीड़ित हैं। इसलिए उन्होंने ये काम खुद न करके एक अधिकारी को दे दिया। इसके लिए उन्होंने कोर्ट से माफी मांगी। कोर्ट ने कहा, अगर आप बीमार हैं तो इस्तीफा दे दीजिए। कोई दूसरा व्यक्ति काम करेगा। जज ने आगे कहा कि मुझे लगता है आप इस पद पर काम करने के लिए शारीरिक रूप से अयोग्य हैं। हाई कोर्ट ने यह भी कहा कि शिक्षा सचिव जिला बोर्ड अध्यक्ष को हटाने के लिए उचित कार्रवाई करेंगे।