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बंगाल की सियासत: दिल्ली पहुंचे राज्यपाल, राज्य के गृह विभाग के जवाब से भड़के

Wed, 16 Jun 2021 12:57 AM IST
गौरव पाण्डेय पीटीआई, कोलकाता
पीटीआई, कोलकाता Published by: गौरव पाण्डेय Updated Wed, 16 Jun 2021 12:57 AM IST
सार

पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ ने मंगलवार को मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को एक पत्र लिखकर आरोप लगाया कि वह राज्य में चुनाव के बाद हुई हिंसा पर चुप हैं और उन्होंने पीड़ित लोगों के पुनर्वास और मुआवजा के लिए कोई कदम नहीं उठाए हैं। धनखड़ ने कहा कि उन्हें इन घटनाओं पर अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए और कानून-व्यवस्था कायम करने के साथ पीड़ितों को मदद उपलब्ध करानी चाहिए।

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West Bengal Governor Jagdeep Dhankhar urged CM Mamata Banerjee to break silence on Post poll violence
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ - फोटो : पीटीआई (फाइल)

विस्तार

प. बंगाल के राज्यपाल जगदीप धनखड़ देर रात चार दिल्ली पहुंचे। इस दौरान उन्होंने एक बार फिर राज्य में हिंसा का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि मैंने सीएम ममता बनर्जी को इस संबंध में पत्र लिखा था, लेकिन 6 महीने बीत जाने के बावजूद कोई भी अधिकारी, मंत्री या सीएम घटनास्थल पर पहुंचे। 

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वहीं, राज्य के गृह विभाग ने एक के बाद एक कई ट्वीट किए और राज्यपाल द्वारा पत्र को सोशल मीडिया पर साझा किए जाने के कदम की आलोचना की और इसे तय नियमों का उल्लंघन करार दिया।
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गृह विभाग ने ट्वीट कर कहा, पश्चिम बंगाल सरकार ने निराशा के साथ यह पाया कि बंगाल के माननीय राज्यपाल ने उनके द्वारा राज्य की मुख्यमंत्री को लिखे पत्र को अचानक सार्वजनिक किया और पत्र की सामग्री वास्तविक तथ्यों के अनुरूप नहीं है। संचार का यह तरीका सभी तय नियमों का उल्लंघन है।
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इसे लेकर राज्यपाल ने कहा कि मैंने सीएम से मामले को लेकर जानकारी देने को कहा था और पूछा था कि इस पर क्या कार्रवाई हुई है। मैं ये जानकर सकते में हूं कि राज्य के गृह मंत्रालय ने मेरे पत्र पर इस तरह की प्रतिक्रिया दी है। इस तरह की प्रतिक्रिया देना दुर्भाग्यपूर्ण है। पुलिस और प्रशासन अपनी कानूनी सीमा को भूल चुके हैं।    

ममता पर साधा निशाना 
इससे पहले राज्यपाल ने दिल्ली रवाना होने से कुछ घंटे पहले पत्र लिखकर मुख्यमंत्री से उठाए गए मुद्दों पर जल्द बातचीत करने का आग्रह किया। उन्होंने बनर्जी को लिखे पत्र में कहा, 'मैं चुनाव के बाद प्रतिशोधात्मक रक्तपात, मानवाधिकारों का हनन, महिलाओं की गरिमा पर हमला, संपत्ति का नुकसान, राजनीतिक विरोधियों की पीड़ाओं पर आपकी लगातार चुप्पी और निष्क्रियता को लेकर मैं विवश हूं।'

धनखड़ ने पत्र की प्रति ट्विटर पर भी पोस्ट की। उन्होंने कहा, 'आपकी चुप्पी, लोगों की पीड़ा को कम करने के लिए पुनर्वास और मुआवजे की खातिर किसी भी कदम का अभाव से यह निष्कर्ष निकलता है कि यह सब राज्य द्वारा संचालित है।' जुलाई 2019 में पद संभालने के बाद से ही धनखड़ और तृणमूल सरकार आमने-सामने रहे हैं। उन्होंने राज्य में पुलिस-प्रशासन पर पक्षपात करने का भी आरोप लगाया है।
 


राज्यपाल ने पत्र में लिखा है कि 13 से 15 मई के बीच कूचबिहार, नंदीग्राम और असम के रणपगली की अपनी यात्रा के दौरान उन्होंने उन लोगों की मर्मस्पर्शी पीड़ा सुनी थी जिन्होंने पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में अपनी पसंद के अनुसार मतदान किया था। उन्होंने लिखा कि गिरफ्तार लोगों की रिहाई के लिए मुख्यमंत्री ने 17 मई को अभूतपूर्व तरीके से निजाम पैलेस स्थित सीबीआई कार्यालय में छह घंटे बिताए।

ममता बनर्जी नारद स्टिंग टेप मामले में अपने मंत्रिमंडल के दो मंत्रियों सुब्रत मुखर्जी और एफ हकीम, पार्टी विधायक मदन मित्रा और कोलकाता के पूर्व मेयर सोवन चटर्जी की गिरफ्तारी के तुरंत बाद सीबीआई कार्यालय गई थीं। राज्यपाल ने उनसे चुनाव बाद हिंसा के मुद्दे पर कैबिनेट में विचार करने, कानून व्यवस्था बहाल करने के लिए सभी कदम उठाने और पीड़ित लोगों को सहायता मुहैया कराने का आग्रह किया।

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