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PM Modi-Trump Meet: 'भारत भविष्य में अहम भूमिका निभाएगा', अमेरिका के साथ संबंधों पर राज्यपाल बोस ने कही ये बात
Sun, 16 Feb 2025 12:00 AM IST
दीपक कुमार शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: दीपक कुमार शर्मा
Updated Sun, 16 Feb 2025 12:00 AM IST
सार
राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने कहा कि भविष्य के विचार-विमर्श और निर्णयों में भारत निर्णायक भूमिका निभाएगा, जो इतिहास के पाठ्यक्रम को प्रभावित करेगा। यह एक महत्वपूर्ण बैठक थी, जो निश्चित रूप से पूरे भारत के लिए फायदेमंद है।
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सीवी आनंद बोस
- फोटो : ANI
विस्तार
पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने शनिवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ हाल में हुई मुलाकात भारत और अमेरिका के बीच मजबूत होते संबंधों को दर्शाती है।
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राज्यपाल ने यह भी कहा कि ट्रंप और पीएम मोदी के बीच की दोस्ती वैश्विक ढांचे में भारत के कद को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि भविष्य के विचार-विमर्श और निर्णयों में भारत निर्णायक भूमिका निभाएगा, जो इतिहास के पाठ्यक्रम को प्रभावित करेगा। यह एक महत्वपूर्ण बैठक थी, जो निश्चित रूप से पूरे भारत के लिए फायदेमंद है।
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पीएम मोदी की यात्रा के दौरान कई समझौतों पर बनी सहमति
पीएम मोदी की दो दिवसीय यात्रा के दौरान, भारत और अमेरिका ने अपने संबंधों को मजबूत करने के लिए कई पहलों की घोषणा की, जिसमें रक्षा सहयोग, ऊर्जा व्यापार तथा असैन्य परमाणु सहयोग से संबंधित समझौते शामिल हैं। दोनों नेताओं ने एक नई पहल 'यूएस-इंडिया कॉम्पेक्ट' की भी शुरुआत की, जिसका उद्देश्य सहयोग के प्रमुख क्षेत्रों में प्रगति करना है।
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आरजी मामले को छोड़ने पर भाजपा विधायकों ने किया विरोध
पश्चिम बंगाल विधानसभा में हाल की घटनाओं को संबोधित करते हुए, राज्यपाल बोस ने अपने अभिभाषण से आरजी कर दुष्कर्म और हत्या की घटना को छोड़ दिया, जिसका भाजपा विधायकों द्वारा विरोध किया गया। इस पर बोस ने टिप्पणी की कि राज्यपाल का भाषण सरकार की नीति को दर्शाता है, न कि उनके व्यक्तिगत विचार।
राज्यपाल को संविधान से कुछ विवेकाधीन शक्तियां मिलीं
उन्होंने बताया, 'संविधान राज्यपाल को कुछ विवेकाधीन शक्तियां प्रदान करता है, जिनका प्रयोग इसके मापदंडों के भीतर किया जा सकता है। हालांकि, राज्यपाल का अभिभाषण मंत्रिपरिषद द्वारा तैयार किया जाता है और आमतौर पर इसमें सरकार के कार्यों की रूपरेखा होती है। राज्यपाल भाषण की विषय-वस्तु के बारे में सुझाव दे सकते हैं, लेकिन विपक्ष को इसे प्रस्तुत करने के दौरान आपत्ति जताने का अधिकार है, जिसका उन्होंने प्रयोग किया। मैंने उनकी बात सुनने के लिए अपना भाषण रोक दिया।'
राष्ट्रपति के पास भेजा अपराजिता विधेयक
पश्चिम बंगाल आपराधिक कानून संशोधन विधेयक (अपराजिता विधेयक) के संबंध में राज्यपाल बोस ने अपनी सांविधानिक जिम्मेदारियों को स्पष्ट किया। विधानसभा में विधेयक के सर्वसम्मति से पारित होने के बावजूद, उन्होंने इसे राष्ट्रपति के विचार के लिए भेजने का फैसला किया।
मैंने तीसरा विकल्प चुना: राज्यपाल
उन्होंने कहा, 'विधानसभा में पारित होने के बाद विधेयक प्राप्त होने पर, राज्यपाल के पास तीन विकल्प हैं: विधेयक पर सहमति, इसे वैध सुझावों के साथ पुनर्विचार के लिए वापस करना, या इसे राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित रखना। मैंने तीसरा विकल्प चुना, और इस प्रकार, इसे राष्ट्रपति के पास भेज दिया गया। अब अंतिम निर्णय राष्ट्रपति के पास है।