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West Bengal: योग्य-अयोग्य शिक्षकों की सूची जारी करेगी सरकार, शिक्षा मंत्री और एसएससी चेयरमैन ने की बैठक

Fri, 11 Apr 2025 11:26 PM IST
पवन पांडेय न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता Published by: पवन पांडेय Updated Fri, 11 Apr 2025 11:26 PM IST
सार

West Bengal: इस बैठक के दौरान शिक्षकों ने कहा, जब तक हमें नौकरी वापस नहीं मिल जाती, हमारा आंदोलन जारी रहेगा। दूसरी ओर, शिक्षामंत्री ने कहा, नौकरी से निकाले गए अभ्यर्थियों की मांगों से मूलभूत विरोध नहीं है, लेकिन कानूनी सहायता के अलावा कुछ किया नहीं जा सकता। इस दौरान एलान किया गया कि 22 लाख परीक्षार्थियों की ओएमआर शीट की प्रतिलिपि प्रकाशित की जाएगी।

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West Bengal: Government will release the list of qualified and unqualified teachers, Education Minister and SS
कोलकाता में शिक्षकों का प्रदर्शन - फोटो : ANI

विस्तार

पश्चिम बंगाल में नौकरी गंवाने वाले 25,752 शिक्षकों को शुक्रवार को थोड़ी राहत मिली। स्टाफ सिलेक्शन कमिशन (एसएससी) कार्यालय के बाहर जारी हड़ताल के बीच दोपहर बाद शिक्षामंत्री ब्रात्य बसु के साथ नौकरी गंवाने वाले शिक्षकों के एक प्रतिनिधि मंडल ने बैठक की। बैठक में एसएससी के चेयरमैन भी मौजूद थे।
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इस बैठक के बाद शिक्षकों के प्रतिनिधि ने बताया कि शिक्षकों की मांग स्वीकार करते हुए एसएससी ने भरोसा दिया है कि 21 अप्रैल तक योग्य-अयोग्य शिक्षकों की सूची प्रकाशित की जाएगी। यह भी आश्वासन दिया गया है कि 22 लाख परीक्षार्थियों की ओएमआर शीट की प्रतिलिपि प्रकाशित की जाएगी। हालांकि, यह भी बताया गया कि ओएमआर की वास्तविक मिरर इमेज मौजूद नहीं है। अगर होती, तो सीबीआई उसे ढूंढ पाती। सीबीआई के पास जो प्रतिलिपि है, वही प्रकाशित की जाएगी। एसएससी चेयरमैन सिद्धार्थ मजूमदार ने कहा कि उन्होंने योग्य और अयोग्य की सूची बनानी शुरू कर दी है, और यह कार्य रविवार तक पूरा हो सकता है।
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कानूनी कदमों पर भी चर्चा
प्रतिनिधिमंडल ने ब्रात्य बसु के साथ बैठक में आगे की कानूनी प्रक्रिया को लेकर भी चर्चा की। रिव्यू पिटीशन (पुनर्विचार याचिका) दायर करने से पहले किस प्रकार की बातचीत होनी चाहिए, इस पर भी बात की गई। नौकरी से निकाले गए अभ्यर्थियों की ओर से मेहबूब मंडल ने कहा, अभी हमें राहत नहीं मिली है। राहत उस दिन मिलेगी जब हम कानूनी रूप से जीतकर वापस लौटेंगे।

नौकरी गंवाने वाले शिक्षकों ने रैली निकाली
इससे पहले शुक्रवार को 'योग्य शिक्षक-शिक्षिका अधिकार मंच' के सदस्यों की अपील पर एसएससी भवन तक रैली निकाली गई। रैली सॉल्टलेक के करुणामयी से एसएससी भवन तक एक निकाली गई। इसमें भारी संख्या में नौकरी गंवाने वाले और उनके परिजनों और परिचितों ने भी हिस्सा लिया। इस दौरान उन्होंने सरकार विरोधी नारे लगाए और न्याय की मांग की।

ममता बनर्जी को अवमानना नोटिस
इस बीच, एक एनजीओ ने शुक्रवार को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को अवमानना नोटिस भेजा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि उन्होंने राज्य में 25,000 से अधिक स्कूलों की नौकरी रद्द करने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले की जानबूझकर आलोचना की। नोटिस में कहा गया कि ममता बनर्जी ने 7 अप्रैल को कोलकाता में एक कार्यक्रम के दौरान कुछ ऐसे बयान दिए जो भारत के माननीय सर्वोच्च न्यायालय की गरिमा को सीधे चुनौती देते हैं। सुप्रीम कोर्ट के वकील सिद्धार्थ दत्ता ने बताया कि वह उत्तर 24 परगना जिले के नबानगर स्थित एनजीओ ‘आत्मदीप’ की ओर से यह नोटिस भेज रहे हैं। नोटिस में कहा गया, आपसे अपेक्षा की जाती है कि आप सार्वजनिक या किसी भी माध्यम से ऐसा कोई बयान न दें जिससे यह धारणा बने कि 3 अप्रैल 2025 के माननीय सुप्रीम कोर्ट के आदेश लागू नहीं होंगे या उन्हें नजरअंदाज किया जा सकता है। इसके साथ ही ममता बनर्जी से अपने बयान के लिए सुप्रीम कोर्ट से बिना शर्त माफी मांगने की मांग की गई है।


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भाजपा सांसद के खिलाफ लगे गो बैक के नारे
कलकत्ता हाईकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश और भाजपा सांसद अभिजीत गांगोपाध्याय को शुक्रवार को गो बौक के नारे सुननने पड़े। भूख हड़ताल पर बैठे प्रदर्शनकारियों ने कहा कि वे अपने आंदोलन में किसी भी राजनीतिक शख्सियत को शामिल नहीं करना चाहते, जबकि गांगोपाध्याय ने वहां से रवाना होने से पहले दावा किया कि उनके खिलाफ नारे लगाने वाले प्रदर्शनकारी अति-वामपंथी समर्थित हैं। उन्होंने कहा, मैं यहां सिर्फ नैतिक समर्थन देने आया था।

कुणाल घोष ने अभिजीत पर कसा तंज
तृणमूल कांग्रेस के प्रवक्ता कुणाल घोष ने भाजपा नेता अभिजीत पर कटाक्ष करते हुए कहा, सुना है कि अभिजीत को जब उन्होंने नौकरी से निकाले गए अभ्यर्थियों के धरना स्थल पर जाने की कोशिश की, तो 'गो बैक' के नारे सुनने पड़े। यह तो होना ही था। उन्होंने गर्व से कहा था कि मैंने इनकी नौकरी छीनी है। कितना अमानवीय उल्लास था वह। फिर वे वहां गए, तो क्या अभ्यर्थी उन्हें भगाएंगे नहीं। इस तरह की दोहरी राजनीति करने वालों का चेहरा बेनकाब कर देना चाहिए।

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