{"_id":"667d2c578f949bb32d0375ab","slug":"west-bengal-government-vs-governor-on-new-mla-oath-taking-ceremony-tmc-mla-launch-sit-in-assembly-2024-06-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"West Bengal: विधायकों के शपथ ग्रहण को लेकर बढ़ी तकरार, विधानसभा परिसर में धरने पर बैठे टीएमसी विधायक","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
West Bengal: विधायकों के शपथ ग्रहण को लेकर बढ़ी तकरार, विधानसभा परिसर में धरने पर बैठे टीएमसी विधायक
Thu, 27 Jun 2024 02:50 PM IST
नितिन गौतम
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: नितिन गौतम
Updated Thu, 27 Jun 2024 02:50 PM IST
सार
टीएमसी ने दावा किया कि परंपरा यह है कि उपचुनाव जीतने वाले विधायकों के मामले में राज्यपाल, विधानसभा के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को शपथ दिलाने की जिम्मेदारी सौंपते हैं, लेकिन राज्यपाल ने दोनों के अनुरोध के अनुसार विधानसभा में कार्यक्रम आयोजित करने से इनकार कर दिया और 26 जून की शाम को नई दिल्ली चले गए।
विज्ञापन
बंगाल राज्यपाल सीवी आनंद बोस
- फोटो : ANI
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पश्चिम बंगाल में विधायकों के शपथ ग्रहण समारोह को लेकर तकरार बढ़ती जा रही है। अब गुरुवार को टीएमसी विधायकों ने इस मुद्दे पर विधानसभा परिसर में धरना प्रदर्शन शुरू कर दिया है। नवनिर्वाचित विधायक सयांतिका बंदोपाध्याय और रायत हुसैन सरकार ने विधानसभा परिसर में मौजूद डॉ. बी आर आंबेडकर की प्रतिमा के पास धरना प्रदर्शन शुरू किया। विधायकों की मांग है कि राज्यपाल सीवी आनंद बोस उन्हें जल्द विधानसभा में शपथ दिलाने का इंतजाम करें ताकि वह अपने जनप्रतिनिधि के कर्तव्य को पूरा कर सकें।
विधायकों ने लगाए आरोप
गौरतलब है कि दोनों विधायक हाल ही में हुए उपचुनाव में जीते हैं। दोनों को बुधवार को राजभवन में शपथ लेने के लिए आमंत्रित किया गया था। हालांकि, टीएमसी ने दावा किया कि परंपरा यह है कि उपचुनाव जीतने वाले विधायकों के मामले में राज्यपाल, विधानसभा के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को शपथ दिलाने की जिम्मेदारी सौंपते हैं, लेकिन राज्यपाल ने दोनों के अनुरोध के अनुसार विधानसभा में कार्यक्रम आयोजित करने से इनकार कर दिया और 26 जून की शाम को नई दिल्ली चले गए। बंदोपाध्याय ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'हमने बुधवार को शाम 4 बजे तक राज्यपाल द्वारा शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने का इंतजार किया, लेकिन वे नहीं आए। आज हम अंबेडकर की प्रतिमा के सामने इस मांग के साथ बैठे हैं कि लोगों के लिए काम करने के हमारे संवैधानिक अधिकारों को बिना किसी देरी के पूरा किया जाए।'
राज्यपाल बोस ने दी सफाई
विधानसभा स्पीकर बिमान बनर्जी ने बुधवार को राज्यपाल बोस पर शपथ ग्रहण समारोह को 'अहं की लड़ाई' बनाने और जानबूझकर इस मुद्दे को जटिल बनाने का आरोप लगाया। वहीं राज्यपाल बोस का कहना है कि 'देश का संविधान उन्हें यह तय करने का अधिकार देता है कि विधायकों को शपथ दिलाने का काम किसे सौंपा जाए। मुझे विधानसभा में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित कराने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन स्पीकर द्वारा राज्यपाल के पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले आपत्तिजनक पत्र को भेजने के बाद यह विकल्प संभव नहीं हो पाया।'
विज्ञापन
विज्ञापन
विधायकों ने लगाए आरोप
गौरतलब है कि दोनों विधायक हाल ही में हुए उपचुनाव में जीते हैं। दोनों को बुधवार को राजभवन में शपथ लेने के लिए आमंत्रित किया गया था। हालांकि, टीएमसी ने दावा किया कि परंपरा यह है कि उपचुनाव जीतने वाले विधायकों के मामले में राज्यपाल, विधानसभा के अध्यक्ष या उपाध्यक्ष को शपथ दिलाने की जिम्मेदारी सौंपते हैं, लेकिन राज्यपाल ने दोनों के अनुरोध के अनुसार विधानसभा में कार्यक्रम आयोजित करने से इनकार कर दिया और 26 जून की शाम को नई दिल्ली चले गए। बंदोपाध्याय ने मीडिया से बात करते हुए कहा, 'हमने बुधवार को शाम 4 बजे तक राज्यपाल द्वारा शपथ ग्रहण समारोह आयोजित करने का इंतजार किया, लेकिन वे नहीं आए। आज हम अंबेडकर की प्रतिमा के सामने इस मांग के साथ बैठे हैं कि लोगों के लिए काम करने के हमारे संवैधानिक अधिकारों को बिना किसी देरी के पूरा किया जाए।'
विज्ञापन
राज्यपाल बोस ने दी सफाई
विधानसभा स्पीकर बिमान बनर्जी ने बुधवार को राज्यपाल बोस पर शपथ ग्रहण समारोह को 'अहं की लड़ाई' बनाने और जानबूझकर इस मुद्दे को जटिल बनाने का आरोप लगाया। वहीं राज्यपाल बोस का कहना है कि 'देश का संविधान उन्हें यह तय करने का अधिकार देता है कि विधायकों को शपथ दिलाने का काम किसे सौंपा जाए। मुझे विधानसभा में शपथ ग्रहण समारोह आयोजित कराने में कोई आपत्ति नहीं है, लेकिन स्पीकर द्वारा राज्यपाल के पद की गरिमा को ठेस पहुंचाने वाले आपत्तिजनक पत्र को भेजने के बाद यह विकल्प संभव नहीं हो पाया।'
विज्ञापन