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West Bengal: पूर्व अस्पताल के कर्मचारी ने अपने खर्च से बनाया रोबोट, ऑटिस्टिक बच्चों को सीखने में करेगा मदद
Thu, 07 Sep 2023 06:12 PM IST
श्वेता महतो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: श्वेता महतो
Updated Thu, 07 Sep 2023 06:12 PM IST
सार
अतानू घोष ने अपना पहला रोबोट 1979 में महज 18 वर्ष की आयु में बनाया था। इसके लिए प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (तब) ने प्रशंसा भी की थी। उन्होंने कोविड के दौरान कीर्ति नामक एक रोबोट बनाया था, जिसका इस्तेमाल दवाईयां डिलीवर करने में किया गया।
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रोबोट
- फोटो : Pexels
विस्तार
पश्चिम बंगाल के एक सेवानिवृत्त अस्पताल के कर्मचारी ने अपने खर्च से रोबोड बनाया है। यह एक ऐसा रोबोट है जो ऑटिस्टिक बच्चों को सीखने में मदद करेगा। इतना ही नहीं डेंगू जैसी बीमारियों के बारे में जागरूकता फैलाने के साथ यह वेटर के रूप में भी काम कर सकता है।
हावड़ा शहर के रहने वाले अतानू घोष ने बताया कि उन्होंने रोबोट का डिजाइन अपने पिता नृपेंद्र नाथ घोष से सीखा, जो कलकत्ता विश्वविद्यालय में फिजियोलॉजी विभाग में एक अनुसंधान उपकरण डिजाइनर के तौर पर काम करते थे।
अतानू घोष ने अपना पहला रोबोट 1979 में महज 18 वर्ष की आयु में बनाया था। इसके लिए प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (तब) ने प्रशंसा भी की थी। मीडिया से बात करते हुए अतानू ने बताया कि उन्होंने कोविड के दौरान कीर्ति नामक एक रोबोट बनाया था, जिसका इस्तेमाल दवाईयां डिलीवर करने में किया गया।
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उन्होंने आगे कहा, '2023 में मैंने एक और ब्रावो नाम से रोबोट बनाया जो डॉक्टर की देखभाल में ऑटिस्टिक बच्चों को शब्द, रंग और आकार सीखने में मदद करेगा। इसके अलावा ये डेंगू जैसी बीमारियों के बारे में जागरूकता भी फैलाएगा और एक वेटर के तौर पर काम भी करेगा।'
अतानू ने बताया कि उन्होंने अपने खर्च से दो रोबोट बनाए हैं। यदि उन्हें सरकार से या किसी उद्यमी से वित्तीय मदद मिलती है तो वह जनता के लाभ के लिए कई रोबोट बना पाएगा।
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हावड़ा शहर के रहने वाले अतानू घोष ने बताया कि उन्होंने रोबोट का डिजाइन अपने पिता नृपेंद्र नाथ घोष से सीखा, जो कलकत्ता विश्वविद्यालय में फिजियोलॉजी विभाग में एक अनुसंधान उपकरण डिजाइनर के तौर पर काम करते थे।
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अतानू घोष ने अपना पहला रोबोट 1979 में महज 18 वर्ष की आयु में बनाया था। इसके लिए प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी (तब) ने प्रशंसा भी की थी। मीडिया से बात करते हुए अतानू ने बताया कि उन्होंने कोविड के दौरान कीर्ति नामक एक रोबोट बनाया था, जिसका इस्तेमाल दवाईयां डिलीवर करने में किया गया।
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उन्होंने आगे कहा, '2023 में मैंने एक और ब्रावो नाम से रोबोट बनाया जो डॉक्टर की देखभाल में ऑटिस्टिक बच्चों को शब्द, रंग और आकार सीखने में मदद करेगा। इसके अलावा ये डेंगू जैसी बीमारियों के बारे में जागरूकता भी फैलाएगा और एक वेटर के तौर पर काम भी करेगा।'
अतानू ने बताया कि उन्होंने अपने खर्च से दो रोबोट बनाए हैं। यदि उन्हें सरकार से या किसी उद्यमी से वित्तीय मदद मिलती है तो वह जनता के लाभ के लिए कई रोबोट बना पाएगा।