फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   West Bengal Election: Just the Beginning, a Bigger Battle Lies Ahead; TMC and BJP Trade Big Claims

West Bengal Election: अभी तो यह अंगड़ाई है, पश्चिम बंगाल में बड़ी लड़ाई है; टीएमसी-भाजपा कर रहे बड़े दावे

Mon, 23 Mar 2026 09:01 PM IST
Shashidhar Pathak शशिधर पाठक
Updated Mon, 23 Mar 2026 09:01 PM IST
सार

भाजपा ने विधानसभा चुनाव 2026 में पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा इस बार का चुनाव अब नहीं तो कभी नहीं की तर्ज पर लड़ रही है। पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को 152 सीट और 29 अप्रैल को 142 सीट पर मतदान होगा।

विज्ञापन
West Bengal Election: Just the Beginning, a Bigger Battle Lies Ahead; TMC and BJP Trade Big Claims
ममता बनर्जी और शुभेंदु अधिकारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

पश्चिम बंगाल में 23 अप्रैल को 152 सीट और 29 अप्रैल को 142 सीट पर मतदान होगा। 4 मई का नतीजा अपने पक्ष में करने के लिए भाजपा और तृणमूल कांग्रेस ने पूरा जोर लगा दिया है। भाजपा के आईटी सेल के प्रमुख अमित मालवीय जीत का पूरा भरोसा है। जबकि टीएमसी के शांतनु बनर्जी को केवल जोरदार लड़ाई दिखाई दे रही है।

विज्ञापन


भाजपा ने विधानसभा चुनाव 2026 में पूरी ताकत झोंक दी है। भाजपा इस बार का चुनाव अब नहीं तो कभी नहीं की तर्ज पर लड़ रही है। भाजपा की नेता अग्निमित्रा पॉल कहती हैं कि लोग ममता बनर्जी के कुशासन, भ्रष्टाचार, राज्य में अराजकता से आजिज आ गए हैं। लोगों ने सत्ता परिवर्तन का मन बना लिया है। जनता बदलाव चाहती है। केन्द्रीय गृहमंत्री अमित शाह और भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन इस बार कोई बाजी हारना नहीं चाहते। दूसरी तरफ ममता बनर्जी को अपने दांव पर पूरा भरोसा है। संसद भवन में तृममूल कांग्रेस के नेता कहते हैं कि असली चुनाव अभियान तो अप्रैल के पहले सप्ताह से शुरू होगा। सयानी घोष समेत अन्य का कहना है कि राज्य में तृणमूल कांग्रेस ही सरकार बनाएगी।
विज्ञापन


क्या तुरुप का पत्ता साबित होगा मतदाता सूची का गहन परीक्षण?
पश्चिम बंगाल में चार महीने मतदाता सूची की गहन परीक्षा का काम चला। इसमें मतदाताओं की संख्या घटकर 7.66 करोड़ से 7.04 करोड़(8.09 प्रतिशत कम) पर आ गई। अंडर एडजुडिकेशन के तहत 60 लाख मतदाताओं पर फैसला आना है। मतदाता सूची की जांच के लिए 500 से अधिक न्यायिक अधिकारियों को तैनात किया गया। मतदाताओं की संख्या में इस गिरावट को भाजपा के रणनीतिकार अपने पक्ष में मानते हैं। केन्द्रीय गृहमंत्री कहते हैं कि पश्चिम बंगाल की मतदाता सूची से बड़ी संख्या में घुसपैठिए बाहर हो रहे हैं। भाजपा की नेता अग्निमित्रा पॉल को यह कहने में संकोच नहीं होता कि इन्हीं घुसपैठियों के वोट से ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस सरकार बना लेती थी। इस बार तृणमूल को बड़ा झटका लगने वाला है। पश्चिम  बंगाल पर नजर रखने वाले वरिष्ठ पत्रकार भी मानते हैं कि इसका लाभ भाजपा को मिल सकता है।  
विज्ञापन
विज्ञापन


पूरे देश के मतदाता अधिकार के डर से भाग रहे हैं पश्चिम बंगाल 
दिल्ली, एनसीआर से लेकर पूरे देश के पश्चिम बंगाल निवासी राज्य में भाग रहे हैं। सभी के पास मतदाता सूची में अपना नाम देखने,आधार कार्ड, पैनकार्ड, मोबाइल से लिंक कराने की चिंताओं ने तंग कर दिया है। वरिष्ठ पत्रकार दीपक रस्तोगी कहते हैं कि मतदाता सूची के गहन परीक्षण (एसआईआर) कार्यक्रम का पैनिक अभी भी है। लोगों को लग रहा है कि उनका नाम मतदाता सूची में न होने पर उनके अधिकार छिन जाएंगे। इसलिए मतदाता बड़ी संख्या में पहुंचेंगे। जिनका नाम मतदाता सूची में होगा, मत डालेंगे। वोट प्रतिशत भी बढ़ेगा और दीपक रस्तोगी का कहना है कि इसका भी तृणमूल कांग्रेस को फायदा मिलेगा। दीपक तो यहां तक कहते हैं कि भवानीपुर सीट ज्यादा हिन्दू मतदाताओं के नाम कटे हैं। ममता बनर्जी ने एक लड़ाई लड़कर तृणमूल के वोटों को बचा लिया है।

ममता बनर्जी के पक्ष में क्या है?
तृणमूल कांग्रेस की नेता ममता बनर्जी और उनका काडर भाजपा को उत्तर प्रदेश, बिहार की पार्टी के तौर पर प्रचारित करता है। ममता बनर्जी बांग्ला, बंगाली और बंगाली अस्मिता के मुद्दे पर खेलती हैं। वह बंगाल की जुझारू नेता हैं। जूझकर सत्ता में आई हैं और भाजपा के पास सुवेन्दु अधिकारी हैं। सुवेन्दु भी तृणमूल से ही आए हैं। बंगाल में चुनाव पर काम करने अंशदीप कहते हैं कि तृणमूल का काडर मजबूत स्थिति में है। भाजपा जबतक इस काडर को तृणमूल से अलग नहीं कर पाती, तब तक उसके सरकार बनाने की स्थिति थोड़ा जटिल है। दीपक रस्तोगी कहते हैं कि बंगाल में जातिवाद, मुस्लिम मतदाता, मतुआ आदि जैसे विभाजनकारी फैक्टर नहीं चल पाते। इसलिए किसी हुमायूं कबीर के साथ वहां का मुस्लिम मतदाता बंटने वाला नहीं है। 294 में से 85-126 सीटें ऐसी हैं, जिस पर हार-जीत का निर्धारण मुस्लिम मत तय कर देते हैं। 2021 में ऐसी 85 सीटों में से 75 सीटें ममता के पाले में आईं थीं। दूसरे पश्चिम बंगाल के शहरी मतदाता की शुरू में नाराजगी भले ही ममता बनर्जी की सरकार से लग रही हो लेकिन मतदान की तारीख नजदीक आते-आते वह फिर तृममूल कांग्रेस की तरफ लौट जाता है। दीपक कहते हैं कि 2021 के विधानसभा चुनाव में भी यह दिखाई दिया था। शांतनु बनर्जी कहते हैं कि 294 में से 146 सीटें जीतने वाला सरकार बनाता है। ममता के 75 सीटें जीतने का रास्ता लगभग तय रहता है। उन्हें केवल 71 और सीटों के लिए मेहनत करनी होती है। जबकि भाजपा को सरकार बनाने के लिए 130 सीटों के लिए मेहनत करनी पड़ेगी। इसलिए तृणमूल की ही सरकार बनने की संभावना अधिक है।

गांव-गांव और घर घर में पहुंचती है सरकारी सहायता
अभिषेक बनर्जी के सचिवालय की सुन लीजिए। सूत्र का कहना है कि बिहार विधानसभा चुनाव में जितना भाजपा ने महिलाओं के खाते में पैसा डालने का वादा किया था, उससे अधिक ममता बनर्जी की सरकार महिलाओं (सामान्य श्रेणी को 1000 प्रति माह, एससी और एसटी को 1200रुपये प्रतिमाह) को देती है। अब इस धनराशि में मुख्यमंत्री ने चुनाव के बाद 500 रुपये की बढ़ोत्तरी का वादा किया है। मिहिर मुखर्जी कहते हैं कि बात केवल इतनी भर नहीं है। गांव-गांव और घर-घर में पश्चिम बंगाल की जनता राज्य सरकार से मिलने वाली सहायता लेती है। 2026 के विधानसभा चुनाव बाद ममता बनर्जी ने सभी के लिए पक्काघर समेत अन्य सुविधाएं सुनिश्चित करने का वादा किया है। ममता बनर्जी के साथ एक बात तय है। वादा पूरा करती हैं।


 थोड़ी आस वामदल और कांग्रेस को भी है
वामदलों को उम्मीद है कि इस बार वोट बढ़ेगा। हालांकि अभी जमीनी तौर पर वाम दलों से तृणमूल में गए काडर ममता बनर्जी के साथ बने हैं। कांग्रेस के नेताओं को भी बंगाल में वोट बढ़ने का भरोसा है। दीपादास मुंशी केरल में व्यस्त हैं, लेकिन निगाह अपने गृहराज्य पर भी टिकी है। वामदल, कांग्रेस के साथ मिलकर चुनाव लड़ने की योजना को अंतिम रूप दे रहे हैं। तृममूल से निष्कासित और अपने बैनर के नीचे चुनाव लड़ रहे हुमायूं कबीर भी इस बार फैक्टर हैं। लेकिन बंगाल में जमीनी पकड़ रखने वाले बताते हैं कि वहां चुनाव प्रबंधन के जरिए जीत मुश्किल होती है। अल्पसंख्यक मतों में बंटवारे की भी गुंजाइश कम नजर आ रही है। हां, इन सबके बावजूद कांग्रेस, वामदल के वोट बढ़ सकते हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed