सियासत: ममता बनर्जी की 'चिट्ठी' ने छेड़ी नई बहस, क्या चुनाव में मिलेगा इसका फायदा?
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पश्चिम बंगाल में इस बार किसकी सरकार बनेगी, इसका पता तो दो मई को ही चलेगा। दीदी हैट्रिक लगाएंगी या भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलेगा, यह चर्चा का विषय है। इससे पहले कयासों का दौर लगातार जारी है। जानकारों की इसपर अपनी अलग-अलग राय है। दरअसल, दूसरे चरण के मतदान से पहले मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बड़ा दांव चला। राज्य में चुनाव के बीच उन्होंने कई राजनीतिक पार्टियों को चिट्ठी लिखी। दीदी की इस 'चिट्ठी' ने नई बहस छेड़ दी है।
बीते दिनों दीदी ने भाजपा विरोधी सभी दलों को एक चिट्ठी लिखकर एकजुट होने की अपील की थी। जानकार बताते हैं कि इस चिट्ठी के कई मायने हो सकते हैं। यह रणनीति का हिस्सा भी हो सकता है या फिर दीदी को हार का डर भी सता रही होगी। इसलिए दीदी की इस चिठ्ठी का अर्थ निकालना मुश्किल है। दरअसल, बंगाल में अभी छह चरणों का मतदान बाकी है। तीसरे चरण के लिए छह अप्रैल को वोटिंग होगी।
क्या दीदी को इस 'चिट्ठी' से मिलेगा चुनाव में फायदा?
दीदी ने जिन राजनीतिक पार्टियों को चिट्ठी लिखी हैं, उनमें सिर्फ कांग्रेस चुनाव लड़ रही है। बाकी के पार्टियों का बाहर से समर्थन है। बता दें कि ममता बनर्जी ने जिन राजनीतिक पार्टियों को चिट्ठी लिखी है, उनमें कांग्रेस (सोनिया गांधी), एनसीपी (शरद पवार), डीएमके (एमके स्टालिन), राजद (तेजस्वी यादव), शिवसेना (उद्धव ठाकरे), आम आदमी पार्टी (अरविंद केजरीवाल), बीजेडी (नवीन पटनायक) और वाईएसआर कांग्रेस (जगन रेड्डी) शामिल हैं।
ममता बनर्जी ने अपनी चिट्ठी में लिखा, 'मैं यह चिट्ठी उन सभी राजनीतिक पार्टियों को लिख रही हूं, जो भाजपा के खिलाफ हैं। मैं इस बात को लेकर चिंतित हूं कि भाजपा की केंद्र सरकार लोकतंत्र खत्म करने की कोशिश कर रही है।' उन्होंने कहा कि मुझे लगता है कि अब वह समय आ गया है, जब हमें लोकतंत्र बचाने के लिए भाजपा के खिलाफ एकजुट हो जाना चाहिए।' तो क्या ममता की इस चिट्ठी का फायदा चुनाव और चुनाव के बाद बनी स्थितियों में मिल सकता है। यह अपनेआप में बड़ा सवाल है।