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बिचौलियों के जरिए हुई संसाधनों की निकासी: रिपोर्ट में खुलासा- बंगाल बन सकता है मेथनॉल उत्पादन का प्रमुख केंद्र
Fri, 26 Jun 2026 04:56 AM IST
Devesh Tripathi
अजीत खरे, नई दिल्ली।
अजीत खरे, नई दिल्ली।
Published by: Devesh Tripathi
Updated Fri, 26 Jun 2026 04:56 AM IST
सार
एक नई आर्थिक रिपोर्ट में पश्चिम बंगाल की वित्तीय स्थिति, विकास संभावनाओं और औद्योगिक अवसरों का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट के अनुसार राज्य में संसाधनों के उपयोग और राजकोषीय प्रबंधन से जुड़ी चुनौतियों के बावजूद औद्योगिक विकास की पर्याप्त संभावना मौजूद है। विशेष रूप से कोलबेड मीथेन और कोयला गैसीकरण की उपलब्धता राज्य को मेथनॉल उत्पादन का प्रमुख केंद्र बना सकती है।
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एसबीआई रिसर्च
- फोटो : ANI
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विस्तार
पश्चिम बंगाल में बिचौलियों के माध्यम से संसाधनों की बड़े पैमाने पर निकासी की गई है। बिना शर्त नकद हस्तांतरण वाली योजनाओं के चलते राज्य का खर्च बढ़ता गया। यहां 1978 में प्रति व्यक्ति आय राष्ट्रीय औसत से अधिक थी। राज्य इस मामले में पांचवें नंबर पर था।
साल 2025 आते-आते राज्य की प्रति व्यक्ति आय अखिल भारतीय औसत से 23% कम हो गई और राज्य 19 वें नंबर पर पहुंच गया। स्टेट बैंक रिसर्च की रिपोर्ट में बंगाल की वित्तीय स्थिति एवं हाल में आए बजट व भविष्य की योजनाओं का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य में विकास की काफी संभावनाएं हैं।
बिहार, ओडिशा, बंगाल और असम को जोड़ने वाले पूर्वी बहु-माध्यमीय विकास गलियारे को क्रियान्वित करने की आवश्यकता है। इसके लिए मौजूदा रेल, सड़क, बंदरगाह और अंतर्देशीय जलमार्ग परिसंपत्तियों का एकीकृत उपयोग होना चाहिए। ऐसा गलियारा पूर्वोदय के उद्देश्य को मजबूत करेगा। इससे कृषि, खनिज, एमएसएमई तथा पूर्वोत्तर भारत के व्यापार को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा।
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कोलबेड मीथेन भंडार में 7वां बड़ा राज्य
कोलबेड मीथेन भंडार के मामले में बंगाल देश का सातवां सबसे बड़ा राज्य है। सीबीएम और कोयला गैसीकरण की उपलब्धता व भौगोलिक लाभ के कारण राज्य मेथनॉल उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त 2027 के लिए लाए गए बजट में निवेश-आधारित विकास और आर्थिक परिवर्तन की दिशा में निर्णायक बदलाव हुआ है। यह बजट औद्योगीकरण, उत्पादक क्षमता निर्माण और दीर्घकालिक विकास में तेजी लाने की रणनीतिक दिशा में काम करेगा।
बढ़ता गया घाटा
पश्चिम बंगाल ने 2020 के एफआरबीएम अधिनियम में राजस्व घाटे को लक्ष्य के रूप में बनाए रखने की व्यवस्था समाप्त कर दी थी। इसके बाद 2020 से राज्य का राजस्व घाटा और बढ़ गया। राज्य एफआरबीएम में निर्धारित बकाया ऋण से जीडीपी लक्ष्य कभी हासिल नहीं कर पाया।
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साल 2025 आते-आते राज्य की प्रति व्यक्ति आय अखिल भारतीय औसत से 23% कम हो गई और राज्य 19 वें नंबर पर पहुंच गया। स्टेट बैंक रिसर्च की रिपोर्ट में बंगाल की वित्तीय स्थिति एवं हाल में आए बजट व भविष्य की योजनाओं का विश्लेषण किया गया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि राज्य में विकास की काफी संभावनाएं हैं।
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बिहार, ओडिशा, बंगाल और असम को जोड़ने वाले पूर्वी बहु-माध्यमीय विकास गलियारे को क्रियान्वित करने की आवश्यकता है। इसके लिए मौजूदा रेल, सड़क, बंदरगाह और अंतर्देशीय जलमार्ग परिसंपत्तियों का एकीकृत उपयोग होना चाहिए। ऐसा गलियारा पूर्वोदय के उद्देश्य को मजबूत करेगा। इससे कृषि, खनिज, एमएसएमई तथा पूर्वोत्तर भारत के व्यापार को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा।
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कोलबेड मीथेन भंडार में 7वां बड़ा राज्य
कोलबेड मीथेन भंडार के मामले में बंगाल देश का सातवां सबसे बड़ा राज्य है। सीबीएम और कोयला गैसीकरण की उपलब्धता व भौगोलिक लाभ के कारण राज्य मेथनॉल उत्पादन का प्रमुख केंद्र बन सकता है। रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त 2027 के लिए लाए गए बजट में निवेश-आधारित विकास और आर्थिक परिवर्तन की दिशा में निर्णायक बदलाव हुआ है। यह बजट औद्योगीकरण, उत्पादक क्षमता निर्माण और दीर्घकालिक विकास में तेजी लाने की रणनीतिक दिशा में काम करेगा।
बढ़ता गया घाटा
पश्चिम बंगाल ने 2020 के एफआरबीएम अधिनियम में राजस्व घाटे को लक्ष्य के रूप में बनाए रखने की व्यवस्था समाप्त कर दी थी। इसके बाद 2020 से राज्य का राजस्व घाटा और बढ़ गया। राज्य एफआरबीएम में निर्धारित बकाया ऋण से जीडीपी लक्ष्य कभी हासिल नहीं कर पाया।