CM ममता पर अभद्र बयान मामला: बंगाल भाजपा प्रत्याशी गंगोपाध्याय ने दी सफाई; पूर्व जस्टिस से EC ने मांगा था जवाब
हल्दिया में 15 मई को एक सार्वजनिक बैठक को संबोधित करते समय भाजपा उम्मीदवार गंगोपाध्याय ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी की थी, जिस पर तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की।
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कलकत्ता उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश और तमलुक से भाजपा उम्मीदवार अभिजीत गंगोपाध्याय ने पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ की गई अपनी अमर्यादित टिप्पणी का सोमवार चुनाव आयोग को जवाब भेजा है। चुनाव आयोग ने गंगोपाध्याय को कारण बताओ नोटिस भेजा था, जिसका 20 मई शाम पांच बजे तक जवाब मांगा था। हल्दिया में 15 मई को एक सार्वजनिक बैठक को संबोधित करते समय भाजपा उम्मीदवार गंगोपाध्याय ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी के खिलाफ अमर्यादित टिप्पणी की थी, जिस पर तृणमूल कांग्रेस ने चुनाव आयोग को शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की।
जवाब का अध्ययन करने के बाद फैसला लेंगे वरिष्ठ चुनाव अधिकारी
चुनाव आयोग के एक अधिकारी ने बताया, ‘हमें आज गंगोपाध्याय का जवाब मिला है। इसे दिल्ली कार्यालय भेज दिया गया है। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के वरिष्ठ अधिकारी कारण बताओ नोटिस पर पूर्व न्यायाधीश के जवाब का अध्ययन करने के बाद कोई फैसला करेंगे। चुनाव आयोग ने अपने नोटिस में कहा, गंगोपाध्याय की टिप्पणी हर अर्थ में गरिमा से परे है। प्रथम दृष्टया आदर्श आचार संहिता के प्रावधानों और राजनीतिक दलों को दी गई सलाह का उल्लंघन है।
महिलाओं के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी करने वाले चौथे नेता गंगोपाध्याय
मौजूदा लोकसभा चुनाव में गंगोपाध्याय चौथे राजनेता हैं जिन्हें महिलाओं के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी के लिए नोटिस भेजा गया है। वहीं, भाजपा के वरिष्ठ नेता दिलीप घोष और कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत ने भी क्रमश: ममता बनर्जी और कंगना रणौत के खिलाफ अशोभनीय टिप्पणी की थी, जिसके बाद चुनाव आयोग ने दोनों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा था और दोनों की टिप्पणियों की निंदा की थी।
कलकत्ता हाईकोर्ट ने भाजपा को विज्ञापन प्रकाशित करने से रोका; आचार संहिता उल्लंघन से जुड़ा मामला
बंगाल से ही जुड़े एक अन्य अहम घटनाक्रम में कलकत्ता हाईकोर्ट ने निषेधाज्ञा जारी कर भाजपा को लोकसभा चुनाव प्रक्रिया समाप्त होने वाले दिन चार जून तक चुनाव आदर्श आचार संहिता (एमसीसी) का उल्लंघन करने वाले विज्ञापन प्रकाशित करने से रोक दिया। जस्टिस सब्यसाची भट्टाचार्य की एकल पीठ ने भाजपा को उन विज्ञापनों को प्रकाशित करने से भी रोक दिया, जिनका उल्लेख तृणमूल ने अपनी याचिका में किया था, जिसमें उसके और उसके कार्यकर्ताओं के खिलाफ असत्यापित आरोपों का दावा किया गया था। अदालत ने इन शिकायतों का तुरंत समाधान नहीं करने के लिए निर्वाचन आयोग की भी आलोचना की, खासकर तब जब लोकसभा चुनाव के ज्यादातर चरण पहले ही पूरे हो चुके हैं। आयोग के वकील ने अदालत को बताया कि आयोग ने शिकायतों पर कारण बताओ नोटिस जारी किया है, जिस पर 21 मई तक जवाब मांगा गया है। वकील ने चुनाव के संचालन से संबंधित मामलों में अदालतों के हस्तक्षेप को रोकने वाले संविधान के प्रावधानों का भी हवाला दिया।