बंगाल: उम्मीदवारों की पहली सूची आज जारी कर सकती है टीएमसी, जंगलमहल पर ममता की नजर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनावों का बिगुल बज चुका है। राज्य में आठ चरण में मतदान होगा। ऐसे में अनुमान लगाया जा रहा है कि टीएमसी प्रमुख ममता बनर्जी आज यानी एक मार्च को उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर सकती हैं, जिसमें 30 प्रत्याशियों के नाम होने का अनुमान है। बता दें कि पश्चिम बंगाल में 27 मार्च से विधानसभा चुनाव की शुरुआत होगी और पहले चरण में जंगलमहल विधानसभा क्षेत्र की 30 सीटों पर मतदान होगा।
जंगलमहल में आते हैं चार जिले
गौरतलब है कि पश्चिम बंगाल के चार जिलों पुरुलिया, बांकुरा, पश्चिम मिदनापुर और झाड़ग्राम की गिनती जंगलमहल में होती है। ये चारों जिले नक्सल प्रभावित हैं, जिनमें अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के मतदाताओं की संख्या काफी ज्यादा है। वहीं, सबसे ज्यादा दबदबा कुर्मी समाज के लोगों का है।
पुरुलिया में महतो ही विजेता
बता दें कि पुरुलिया में महतो उम्मीदवार की जीत ही तय मानी जाती है। ऐसे में पुरुलिया में सभी राजनीतिक दलों ने महतो सरनेम वाले उम्मीदवार को मैदान में उतारा है। दरअसल, आंकड़ों के हिसाब से देखें तो जंगलमहल में आदिवासी और कुर्मी समाज का वोट बैंक 50 प्रतिशत से भी ऊपर है।
टीएमसी के सामने बड़ी चुनौती
जानकारी के मुताबिक, जंगलमहल के चारों जिलों में विधानसभा की लगभग 40 सीटें हैं। विधानसभा चुनाव 2016 के दौरान जंगलमहल में टीएमसी का दबदबा था, लेकिन 2019 के लोकसभा चुनाव में भाजपा ने इन चारों जिलों में बेहतरीन प्रदर्शन किया और सभी सीटें जीत लीं। ऐसे में जंगलमहल इस बार ममता बनर्जी के लिए चुनौती माना जा रहा है। वहीं, ममता अपनी खोई जमीन पाने की पुरजोर कोशिश में जुटी हुई हैं।
ममता पर लग चुका यह आरोप
बता दें कि जंगलमहल एक वक्त माओवादियों का केंद्र बिंदु था। उस वक्त पश्चिम बंगाल में वामपंथी दलों का राज था। उस दौरान ममता बनर्जी पर माओवादियों से अप्रत्यक्ष रूप से समर्थन लेने का आरोप लगा था। हालांकि, साल 2011 में जब ममता बनर्जी सत्ता में आईं तो सबसे बड़े नक्सली नेता किशन जी को मुठभेड़ में मार गिराया गया। उस दौरान आरोप लगा कि ममता सरकार ने एनकाउंटर कर किशन जी का खात्मा किया।