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West Asia Crisis: गाजा में 5 फीसदी से भी कम जमीन खेती लायक; सभी आधारभूत संरचनाएं तबाह, लोग भुखमरी की चपेट में
Wed, 28 May 2025 09:00 AM IST
ज्योति भास्कर
अमर उजाला नेटवर्क।
अमर उजाला नेटवर्क।
Published by: ज्योति भास्कर
Updated Wed, 28 May 2025 09:00 AM IST
सार
बीते करीब 20 महीने से युद्ध की विभीषिका झेल रहे पश्चिम एशियाई क्षेत्र गाजा की धरती गोले-बारूद की मार के कारण अब लगभग पूरी तरह उजड़ चुकी है। यहां की 5% से भी कम जमीन अब खेती लायक बची है। हवाई हमलों के कारण सभी आधारभूत संरचनाएं तबाह हो चुकी हैं। लोग भुखमरी की चपेट में हैं।
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गाजा में धरती पर गोलाबारी के बाद का मंजर
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट / एजेंसी
विस्तार
गाजा पट्टी में जारी युद्ध और संघर्ष के चलते हालात बद से बदतर हो गए हैं। मानवीय जीवन ही नहीं बल्कि जैविक संपदा, खाद्य सुरक्षा और प्राकृतिक संसाधनों भी भारी नुकसान हुआ है। अब केवल 5% से भी कम भूमि खेती के योग्य बची है। ऐसे में यहां की लगभग पूरी आबादी भुखमरी की चपेट में है। राफाह और गाजा की सभी आधारभूत संरचनाएं तबाह हो गईं हैं।
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गाजा की बर्बादी की यह भयावह तस्वीर
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य व कृषि संगठन (एफएओ) और संयुक्त राष्ट्र उपग्रह केंद्र (यूएनओएसएटी) की ओर से किए गए एक ताजा भू-स्थानिक विश्लेषण में गाजा की बर्बादी की यह भयावह तस्वीर सामने आई है। एफएओ के मुताबिक, यह स्थिति सिर्फ एक कृषि संकट नहीं है, बल्कि मानवीय और पारिस्थितिकीय आपदा का संकेत है।
संयुक्त राष्ट्र के खाद्य व कृषि संगठन (एफएओ) और संयुक्त राष्ट्र उपग्रह केंद्र (यूएनओएसएटी) की ओर से किए गए एक ताजा भू-स्थानिक विश्लेषण में गाजा की बर्बादी की यह भयावह तस्वीर सामने आई है। एफएओ के मुताबिक, यह स्थिति सिर्फ एक कृषि संकट नहीं है, बल्कि मानवीय और पारिस्थितिकीय आपदा का संकेत है।
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15,053 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि... अब उत्पादन संभव नहीं
एफएओ का कहना है, गाजा की कुल कृषि भूमि के 80% से ज्यादा हिस्से को नुकसान हुआ है। गाजा की लगभग 15,053 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में से 12,537 हेक्टेयर अब खेती के लायक नहीं है। जो जमीन बची है, उससे भी 77.8% कृषि क्षेत्र सुरक्षा या बाधाओं के चलते उपयोग में नहीं लाया जा सकता। राफाह और उत्तरी गाजा के कृषि क्षेत्र पूरी तरह बंजर हो चुके हैं। यहां कोई भी उत्पादन संभव नहीं रह गया है।
एफएओ का कहना है, गाजा की कुल कृषि भूमि के 80% से ज्यादा हिस्से को नुकसान हुआ है। गाजा की लगभग 15,053 हेक्टेयर कृषि योग्य भूमि में से 12,537 हेक्टेयर अब खेती के लायक नहीं है। जो जमीन बची है, उससे भी 77.8% कृषि क्षेत्र सुरक्षा या बाधाओं के चलते उपयोग में नहीं लाया जा सकता। राफाह और उत्तरी गाजा के कृषि क्षेत्र पूरी तरह बंजर हो चुके हैं। यहां कोई भी उत्पादन संभव नहीं रह गया है।
लोग रोजी-रोटी से हाथ धो बैठे, खाद्य आपूर्ति शून्य
गाजा की अर्थव्यवस्था में कृषि की भूमिका लगभग 10% थी, जिससे 5.6 लाख लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े थे। आज यह तंत्र ध्वस्त हो चुका है। न केवल खेत, बल्कि पशुपालन और मछली पालन भी पूरी तरह बिखर चुका है। लाखों लोग रोजी-रोटी से हाथ धो बैठे हैं।
गाजा की अर्थव्यवस्था में कृषि की भूमिका लगभग 10% थी, जिससे 5.6 लाख लोग प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जुड़े थे। आज यह तंत्र ध्वस्त हो चुका है। न केवल खेत, बल्कि पशुपालन और मछली पालन भी पूरी तरह बिखर चुका है। लाखों लोग रोजी-रोटी से हाथ धो बैठे हैं।
सिंचाई ढांचे का पतन
गाजा की आधुनिक कृषि पद्धतियों की रीढ़ माने जाने वाले ग्रीनहाउस सिस्टम को भी भारी नुकसान हुआ है। लगभग 71.2% ग्रीनहाउस पूरी तरह क्षतिग्रस्त हैं। राफाह क्षेत्र में तो यह आंकड़ा 86.5% तक पहुंच गया। 82.8% कृषि कुएं अब अनुपयोगी हैं।
गाजा की आधुनिक कृषि पद्धतियों की रीढ़ माने जाने वाले ग्रीनहाउस सिस्टम को भी भारी नुकसान हुआ है। लगभग 71.2% ग्रीनहाउस पूरी तरह क्षतिग्रस्त हैं। राफाह क्षेत्र में तो यह आंकड़ा 86.5% तक पहुंच गया। 82.8% कृषि कुएं अब अनुपयोगी हैं।