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आसमान से बरस रही ‘आग’: दुनिया के 15 सबसे गर्म स्थानों में से 10 भारत में

Mon, 03 Jun 2019 04:47 PM IST
शिल्पा ठाकुर न्यूज डेस्क, अमर उजाला
न्यूज डेस्क, अमर उजाला Published by: शिल्पा ठाकुर Updated Mon, 03 Jun 2019 04:47 PM IST
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Weather report, 10 Indian cities are included in 15 most hot places of world
इस शहरों में सबसे ज्यादा तापमान दर्ज हो रहा है - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

पूरा उत्तर भारत इस वक्त भीषण गर्मी का सामना कर रहा है। हालात इतने खराब हैं कि दुनिया की सबसे गर्म 15 जगहों में से 10 भारतीय शहरों का नाम शुमार है। ये दस शहर हैं- जैसलमेर, श्रीगंगानगर, चूरू, ग्वालियर, लखनऊ, बांदा, भोपाल, अकोला, बाड़मेर और बीकानेर।


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पूरा उत्तर भारत इस वक्त भीषण गर्मी का सामना कर रहा है। हालात इतने खराब हैं कि दुनिया की सबसे गर्म 15 जगहों में से 10 भारतीय शहरों का नाम शुमार है। ये दस शहर हैं- जैसलमेर, श्रीगंगानगर, चूरू, ग्वालियर, लखनऊ, बांदा, भोपाल, अकोला, बाड़मेर और बीकानेर।

एल डोराडो वेदर वेबसाइट के अनुसार राजस्थान के चुरू और श्रीगंगानगर सबसे गर्म स्थान हैं। यहां तापमान 48.9 डिग्री सेल्सियस और 48.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच चुका है। इसके बाद पाकिस्तान के जैकोबाबाद का स्थान आता है, जहां तापमान 48 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया।

इस लिस्ट में उत्तर प्रदेश का बांदा (47.4 डिग्री सेल्सियस) और हरियाणा का नारनौल (47.2 डिग्री सेल्सियस) भी शामिल है। वहीं 15 में से 5 स्थान पड़ोसी देश पाकिस्तान के हैं। ये क्षेत्र पूरी धरती पर सबसे गर्म है। ये हालात तब हैं जब शनिवार के बाद से दुनिया में अधिकतम बारिश त्रिपुरा के अगरतला में हुई है।

दो-तिहाई जनसंख्या लू की चपेट में

रविवार को भारत की दो तिहाई जनसंख्या लू की चपेट में थी। कई शहर जैसे दिल्ली, जयपुर, कोटा, हैदराबाद और लखनऊ में पारा 45 डिग्री सेल्सियस के करीब था। वहीं पहाड़ी शहर नैनीताल, शिमला और श्रीनगर, जिन्हें आमतौर पर ठंडा माना जाता है, यहां भी तापमान सामान्य से 2-4 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।

पहाड़ी क्षेत्रों में भी भीषण गर्मी

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI

शिमला में रविवार को अधिकतम तापमान 32 डिग्री सेल्सियस था और नैनीताल में 33 डिग्री सेल्सियस। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के डाटा पर आधारिक अध्ययन के अनुसार बीते दो दशकों से पहाड़ी क्षेत्रों पर गर्म दिनों की संख्या बढ़ती जा रही है। एक जून को उत्तराखंड और मसूरी में भी तापमान 38 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया था।

आईएमडी के जनरल निदेश, मृत्युंजय मोहपात्रा का कहना है कि आने वाले दो दिनों में स्थिति सुधर सकती है। क्योंकि जम्मू एवं कश्मीर और हिमाचल प्रदेश में बारिश और तूफान आने की संभावना है। उन्होंने कहा रि अभी लू की स्थिति पाकिस्तान और राजस्थान में रेगिस्तानों से निकलने वाली शुष्क हवाओं के कारण है। हम उम्मीद करते हैं कि बंगाल की खाड़ी और उत्तर-पश्चिम से आने वाली हवाओं से गर्मी थोड़ी कम होगी। 

मोहपात्रा ने कहा कि अधिकतम और न्यूनतम दोनों तापमान में वृद्धि हो रही है। जिससे सतह अधिक गर्म हो रही है और गर्म हवाओं के अधिक समय तक चलने का संकेत है। हम ये देख रहे हैं कि बीते दो दशक में देश में लू की समय बढ़ रही है। 

6,167 लोगों की मौत

संसद में इस साल फरवरी में दी गई जानकारी के अनुसार, खतरनाक गर्मी के कारण भारत में 2010 से 2018 के बीच 6,167 लोगों की मौत हो गई। अकेले 2015 में ही 2081 मौत रिकॉर्ड की गई।

मौसम विभाग तापमान को विभिन्न जगहों के अनुसार अलग-अलग परिभाषित करता है। मैदानी इलाकों में 40 डिग्री सेल्सियस से अधिक के तापमान को लू की स्थिति माना जाता है। वहीं अगर तटीय इलाकों की बात करें तो यहां 37 डिग्री सेल्सियस को और पहाड़ी इलाकों में 30 डिग्री सेल्सियस तापमान होने पर इन्हें गर्म लहर वाला स्थान माना जाता है।

सूखे का सामना कर रहे हैं कई क्षेत्र

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : File Photo

लंबे समय से सूखे का सामना कर रहे महाराष्ट्र के विदर्भ और मध्यप्रदेश के बुंदेलखंड में पीने के पानी की समस्या बढ़ गई है। यहां लोगों को कृषि संकट का सामना भी करना पड़ रहा है। शुक्रवार को मौसम विभाग ने कहा कि बीते साल के मुकाबले कई क्षेत्रों को 79 फीसदी तक बारिश की कमी का सामना करना पड़ा है।

विदर्भ और बुंदेलखंड में कई बांधों में पानी का स्तर क्षमता से 10 फीसदी तक कम हो गया है। सेंट्रल वॉटर कमीशन का कहना है कि पानी का स्तर बीते 10 साल में सबसे अधिक कम हो गया है।

अनुमान से अधिक गर्म हो रही है धरती

अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा के मुताबिक, इस सदी के 15 साल 1880 से अधिक गर्म रहे हैं। आंकड़ों के अनुसार मौसम वैज्ञानिक जितना मान रहे हैं, धरती उससे अधिक तेजी से गर्म हो रही है। एल डोराडो की मौसम रिपोर्ट के अनुसार धरती पर सतह का औसत तापमान 1880 और 2018 के बीच 0.6 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ा है। भारत के मामले में ये 0.8 डिग्री सेल्सियस है। यहां तक की भारत में 1901 के बाद से 2018 सबसे अधिक गर्म रहा है। 

आईएमडी के पूर्वानुमान से संकेत मिलता है कि अगर मानसून में बारिश सामान्य पूर्वानुमान के अनुसार नहीं होती है तो 2019 बीते साल से भी अधिक गर्म होगा। साइंटिफिक रिपोर्ट में मई 2018 में प्रकाशित हुए एक अध्ययन में कहा गया है कि 1970 के दशक में उत्तर-पश्चिमी और दक्षिण-पश्चिमी भारत में गर्मी की प्रवृत्ति शुरू हुई थी। जो 2000 के बाद से और भी अधिक बढ़ गई है।

प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : PTI
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