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इस वर्ष मौसम जनित बाधाओं के कारण रहा मानसून में बिखराव जिसने मचाई देश में तबाही

Sun, 04 Nov 2018 12:45 PM IST
भाषा,नयी दिल्ली
भाषा,नयी दिल्ली Updated Sun, 04 Nov 2018 12:45 PM IST
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weather related constraints this year devastated many parts of the country
मानसून

पूरे देश में बारिश की सौगात देने वाले दक्षिण पश्चिम मानसून को इस साल बादलों के विक्षोभ की बाधाओं का जमकर सामना करना पड़ा। इसकी वजह से मानसून में बिखराव बारिश के असमान वितरण के रूप में देखने को मिला। इस साल दक्षिण पश्चिम मानसून की समग्र रिपोर्ट में यह बात सामने आयी है।

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विक्षोभ की बाधाओं के कारण बारिश न केवल छोटे छोटे इलाकों में सिमट कर रह गयी बल्कि मौसम के बदलते मिजाज का गवाह बने इस मानसून में बाढ़, भूस्खलन, चक्रवाती तूफान और धूल भरी आंधियों की घटनाओं की भी अधिकता रही।
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जून से सितंबर के बीच दक्षिण पश्चिम मानसून की मौसम विभाग द्वारा शुक्रवार को जारी रिपोर्ट के अनुसार इस साल मानसून के दौरान भारत के ऊपर दस बार हवा के कम दबाव का क्षेत्र बना। इनमें से एक क्षेत्र में कम दबाव की अधिकता के कारण चक्रवाती तूफान की स्थिति भी उत्पन्न हुयी। इसका केन्द्र उड़ीसा में रहा। 
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रिपोर्ट के अनुसार मानसून के दौरान जून में बंगाल की खाड़ी में हवा के कम दबाव का क्षेत्र बनने की एक घटना से शुरुआत होकर यह संख्या जुलाई में तीन और अगस्त में चार तक पहुंच गयी। हालांकि मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार, मानसून की बेहतरी के लिहाज से हवा के कम दबाव के क्षेत्र की अधिकता बारिश के लिये अनुकूल स्थिति मानी जाती है लेकिन पिछले कुछ सालों में इसकी अधिकता के बावजूद बारिश में कमी दर्ज की गयी है। 

रिपोर्ट में मौसम विभाग ने साल 2018 को भी इस श्रेणी में रखते हुये कहा है कि पूरे मानसून के दौरान हवा के कम दबाव का क्षेत्र बनने की दस घटनाओं के बावजूद बारिश की मात्रा सामान्य से नौ प्रतिशत कम दर्ज की गयी।

मौसम विभाग के एक वैज्ञानिक ने इसका संबंध जलवायु परिवर्तन से होने से हालांकि इंकार नहीं किया लेकिन मानसून के असमान वितरण को देखते हुये कहा कि इस तथ्य को शोध के आधार पर स्थापित किया जा सकेगा। 

इस साल मानसून के दौरान यह भी देखने को मिला कि मौसम संबंधी विक्षोभ की मौजूदगी जिन इलाकों में ज्यादा रही उनमें मानसून का असमान वितरण और बारिश का बिखराब भी उतना ही अधिक दर्ज किया। इसके परिणामस्वरूप एक क्षेत्र में मूसलाधार बारिश होने के साथ पड़ोसी क्षेत्र में बिल्कुल भी बारिश नहीं होने की प्रवृत्ति भी इस मानसून में देखने को मिली। 

मानसून के असमान वितरण वाले क्षेत्रों में पूर्वोत्तर के राज्य अरूणाचल प्रदेश, असम, मेघालय भी शामिल हैं, जो बारिश की अधिकता के लिये जाने जाते रहे हैं लेकिन इस साल इन राज्यों में सामान्य से कम बारिश हुई।

कम बारिश वाले क्षेत्रों में शामिल पश्चिम बंगाल, बिहार, झारखंड, सौराष्ट्र, कच्छ, गुजरात मराठवाड़ा, रायलसीमा, उत्तर भीतरी कर्नाटक, और पश्चिमी राजस्थान में भी मानसून का असमान वितरण दर्ज किया गया। 

मौसम के लिहाज से 36 क्षेत्रों में बंटे देश के 23 क्षेत्रों में (देश के कुल क्षेत्रफल का 68 प्रतिशत) सामान्य बारिश दर्ज की गयी। दक्षिण पश्चिम मानसून के दौरान सिर्फ एक क्षेत्र में सामान्य से अधिक बारिश दर्ज की गयी।


इस क्षेत्र में केरल और पुदुचेरी सहित देश का एक प्रतिशत क्षेत्रफल शामिल है। इसके अलावा 12 क्षेत्रों में (देश के कुल क्षेत्रफल का 31 प्रतिशत) सामान्य से कम बारिश दर्ज की गयी।


  

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