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मौसम की बेरुखी पड़ने वाली है भारी: फसलों पर कहीं सूखे की आफत तो कहीं बारिश की मार...बिजली भी कर सकती है परेशान
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कम बारिश का झटका
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
देश के कई राज्यों में बिजली संकट गहराता जा रहा है। अल नीनो के असर से कमजोर मानसून के बाद अब बिजली की मांग बढ़ गई है। मांग और आपूर्ति में पांच गुना तक का अंतर आ गया है। साथ ही कोयले की किल्लत से भी मुसीबत बढ़ रही है। आगामी रबी सीजन में जब कृषि क्षेत्र में सिंचाई के लिए मांग बढ़ेगी तो अनेक राज्यों में बिजली को लेकर हाहाकार मचना तय है।
अक्तूबर की शुरुआत में गर्मी और उमस के चलते पंखे, कूलर और एसी का इस्तेमाल बढ़ा है। कम बारिश के कारण खरीफ फसलों में भी सिंचाई के लिए बिजली की मांग बढ़ी है। इससे बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ गया। ग्रिड-इंडिया के ताजा आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में बिजली की कमी बढ़कर 54.4 करोड़ यूनिट हो गई, जबकि अगस्त में यह 9.8 करोड़ यूनिट थी। यानी बिजली उत्पादन मांग की तुलना में पांच गुना कम है। ताजा आंकड़ों में सितंबर के दौरान शाम के वक्त बिजली कमी अधिकतम 7.7 गीगावॉट तक पहुंच चुकी है।
बांधों में पानी क्षमता का 70 फीसदी : केंद्रीय जल आयोग के 28 सितंबर के आंकड़ों के अनुसार, देश के 178 प्रमुख बांधों व जलाशयों में पानी का भंडारण उनकी कुल क्षमता का 70 फीसदी रह गया था। यह 10 साल के औसत 76.62 फीसदी कम है।
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कोयले की कमी बढ़ा रही परेशानी
जल विद्युत से कम उत्पादन और बिजली की ऊंची मांग के बीच ताप बिजली संयंत्रों पर निर्भरता बढ़ रही है। इससे कोयले की खपत बढ़ी और स्टॉक घटा है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के 27 सितंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, देश के 168 कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में 72 के पास कोयले का स्टॉक तय मानक के 25 फीसदी से नीचे था। कुल कोयला भंडार 1.92 करोड़ टन रह गया था, जबकि जरूरत 5.37 करोड़ टन की थी। 30 सितंबर तक क्रिटिकल कोयला स्टॉक वाले बिजली संयंत्रों की संख्या बढ़कर 84 हो गई।
यूपी-पंजाब और हरियाणा पर दबाव
उत्तर भारत में पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में बिजली और कोयले की स्थिति पर दबाव दिख रहा है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के सितंबर के आंकड़ों के मुताबिक, इन राज्यों के कई ताप बिजली संयंत्रों में कोयले का स्टॉक तय मानक से काफी नीचे रहा। राजस्थान के सात, उत्तर प्रदेश के चार, हरियाणा के एक और पंजाब के दो निजी संयंत्र में कोयल का स्टॉक नाजुक स्तर पर था। बिजली की उपलब्धता के लिहाज से सितंबर में पंजाब में 911.5 लाख यूनिट, यूपी में 430.5 लाख यूनिट और राजस्थान में 371.3 लाख यूनिट बिजली की कमी दर्ज हुई।
हिमाचल में अघोषित कटौती शुरू, मांग और आपूर्ति में 80 लाख यूनिट का अंतर
शिमला। हिमाचल प्रदेश में बिजली संकट गहराने लगा है। मानसून सीजन में कम बारिश के कारण जल विद्युत परियोजनाओं में घटे उत्पादन ने चिंता बढ़ा दी है। हालात ये हैं कि कई क्षेत्रों में अघोषित कट लगने शुरू हो गए हैं। प्रदेश में मौजूदा समय में रोजाना करीब 280 से 300 लाख यूनिट तक बिजली उत्पादन हो रहा है, जबकि खपत 380 लाख यूनिट से अधिक पहुंच गई है। यानी प्रतिदिन 80 से 100 लाख यूनिट तक की कमी सामने आ रही है।
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अक्तूबर की शुरुआत में गर्मी और उमस के चलते पंखे, कूलर और एसी का इस्तेमाल बढ़ा है। कम बारिश के कारण खरीफ फसलों में भी सिंचाई के लिए बिजली की मांग बढ़ी है। इससे बिजली की मांग और उपलब्धता के बीच अंतर बढ़ गया। ग्रिड-इंडिया के ताजा आंकड़ों के अनुसार, सितंबर में बिजली की कमी बढ़कर 54.4 करोड़ यूनिट हो गई, जबकि अगस्त में यह 9.8 करोड़ यूनिट थी। यानी बिजली उत्पादन मांग की तुलना में पांच गुना कम है। ताजा आंकड़ों में सितंबर के दौरान शाम के वक्त बिजली कमी अधिकतम 7.7 गीगावॉट तक पहुंच चुकी है।
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बांधों में पानी क्षमता का 70 फीसदी : केंद्रीय जल आयोग के 28 सितंबर के आंकड़ों के अनुसार, देश के 178 प्रमुख बांधों व जलाशयों में पानी का भंडारण उनकी कुल क्षमता का 70 फीसदी रह गया था। यह 10 साल के औसत 76.62 फीसदी कम है।
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कोयले की कमी बढ़ा रही परेशानी
जल विद्युत से कम उत्पादन और बिजली की ऊंची मांग के बीच ताप बिजली संयंत्रों पर निर्भरता बढ़ रही है। इससे कोयले की खपत बढ़ी और स्टॉक घटा है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के 27 सितंबर तक के आंकड़ों के मुताबिक, देश के 168 कोयला आधारित बिजली संयंत्रों में 72 के पास कोयले का स्टॉक तय मानक के 25 फीसदी से नीचे था। कुल कोयला भंडार 1.92 करोड़ टन रह गया था, जबकि जरूरत 5.37 करोड़ टन की थी। 30 सितंबर तक क्रिटिकल कोयला स्टॉक वाले बिजली संयंत्रों की संख्या बढ़कर 84 हो गई।
यूपी-पंजाब और हरियाणा पर दबाव
उत्तर भारत में पंजाब, उत्तर प्रदेश, राजस्थान और हरियाणा में बिजली और कोयले की स्थिति पर दबाव दिख रहा है। केंद्रीय विद्युत प्राधिकरण के सितंबर के आंकड़ों के मुताबिक, इन राज्यों के कई ताप बिजली संयंत्रों में कोयले का स्टॉक तय मानक से काफी नीचे रहा। राजस्थान के सात, उत्तर प्रदेश के चार, हरियाणा के एक और पंजाब के दो निजी संयंत्र में कोयल का स्टॉक नाजुक स्तर पर था। बिजली की उपलब्धता के लिहाज से सितंबर में पंजाब में 911.5 लाख यूनिट, यूपी में 430.5 लाख यूनिट और राजस्थान में 371.3 लाख यूनिट बिजली की कमी दर्ज हुई।
हिमाचल में अघोषित कटौती शुरू, मांग और आपूर्ति में 80 लाख यूनिट का अंतर
शिमला। हिमाचल प्रदेश में बिजली संकट गहराने लगा है। मानसून सीजन में कम बारिश के कारण जल विद्युत परियोजनाओं में घटे उत्पादन ने चिंता बढ़ा दी है। हालात ये हैं कि कई क्षेत्रों में अघोषित कट लगने शुरू हो गए हैं। प्रदेश में मौजूदा समय में रोजाना करीब 280 से 300 लाख यूनिट तक बिजली उत्पादन हो रहा है, जबकि खपत 380 लाख यूनिट से अधिक पहुंच गई है। यानी प्रतिदिन 80 से 100 लाख यूनिट तक की कमी सामने आ रही है।
| वर्ष | बिजली उत्पादन (1 अप्रैल से 9 सितंबर तक) |
|---|---|
| 2025 | 91,6521.9 लाख यूनिट |
| 2026 | 81,7090.9 लाख यूनिट |
| महीना | बिजली की कमी |
|---|---|
| सितंबर | 54.4 करोड़ यूनिट |
| अगस्त | 9.8 करोड़ यूनिट |