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हम पूरे देश में हाईवे किनारे शराब के ठेके बंद करा सकते हैं: सुप्रीम कोर्ट

Thu, 08 Dec 2016 04:17 AM IST
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली
ब्यूरो/ अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Thu, 08 Dec 2016 04:17 AM IST
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We can ban alcohol contracts near highways across the country says SC
- फोटो : Getty Images

हर वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में करीब डेढ़ लाख लोगों की मौत पर चिंता जताते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि वह राष्ट्रीय और राज्य राजमार्गों केकिनारे शराब के ठेके बंद करने का आदेश दे सकता है। इसकेसाथ ही शीर्ष अदालत ने उस याचिका पर फैसला सुरक्षित रख लिया जिसमें गुहार की गई थी कि उत्पाद कानून में संशोधन करने का निर्देश दिया जाए जिससे यह सुनिश्चित किया जा सके कि राजमार्गों केकिनारे शराब की बिक्री न हो। 

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चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर की अध्यक्षता वाली पीठ ने सुनवाई केदौरान पंजाब सरकार को कड़ी फटकार लगाई। वास्तव में पंजाब सरकार का कहना था कि अगर राजमार्ग एलिवेटेड हो तो उसके नीचे या करीब शराब के ठेके खोलने की इजाजत दी जाए।
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पंजाब सरकार की यह दलील पर पीठ ने कड़ी आपत्ति जताते हुए कहा ‘आप यह गौर कीजिए कि कितने को आपने लाइसेंस दे रखा है। चूंकि शराब लॉबी बहुत पावरफुल है इसलिए सभी खुश हैं। उत्पाद विभाग खुश है, उत्पाद मंत्री खुश हैं और राज्य सरकार भी खुश है कि क्यों वह पैसे बना रही है।’ 
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पीठ ने राज्य सरकार से कहा कि अगर दुर्घटना में लोगों की मौत होती है तो आप पीड़ित परिवारों को बस एक-डेढ़ लाख रुपये मुआवजा देते हैं। पीठ ने कहा कि आपको समाज के हितों के ध्यान में रखते हुए अपना पक्ष रखना चाहिए। पीठ ने कहा कि राज्य सरकार शराब विक्रेताओं की भाषा बोल रही है। हर वर्ष डेढ़ लाख रुपये की सड़क दुर्घटनाओं में मौत होती है। हम चाहते हैं कि आप आम लोगों केहितों के ध्यान में रखते हुए कुछ कीजिए।

पंजाब सरकार को कड़ी फटकार

We can ban alcohol contracts near highways across the country says SC
supreme court

साथ ही पीठ ने राज्यों द्वारा राजमार्गों के बगल से ठेके हटाने केकाम में बरती जा रही उदासीनता पर भी नाराजगी जताई। पीठ ने कहा कि शराब पीने से वाहन चलाने केकारण दुर्घटनाओं में इजाफा हुआ है। राजस्व प्राप्ति केलिए राज्यों द्वारा राज्यमार्गों केअगल-बगल ठेके को  लाइसेंस देने को जायज नहीं ठहराया जा सकता।

यह कोई कारण नहीं हो सकता। अथॉरिटी को पोजेटिव सोच के साथ काम करना चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार की भी खिंचाई की। पीठ ने कहा कि भारत सरकार अब कह रही है कि राष्ट्रीय और राज्य राज्यमार्गों केकिनारे शराब के ठेके को हटा दिया जाना चाहिए। पिछले 10 वर्षों कुछ नहीं हुआ, लिहाजा हमें दखल देना पड़ा।

सुनवाई केदौरान यह भी दलील दी गई कि लोगों को शराब खरीदने के लिए दूर जाना पड़ता है। इस पर कोर्ट ने तंज कसते हुए कहा कि तो आप शराब की ‘होम डिलवरी’ करा दीजिए।

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