West Bengal: ‘राजभवन में हिंसा के पीड़ितों के प्रवेश पर क्यों लगाई रोक?’, राज्यपाल बोस का ममता बनर्जी से सवाल
West Bengal: गुरुवार को पुलिस ने लोकसभा चुनाव के बाद हिंसा के पीड़ितों के राजभवन में प्रवेश पर रोक लगा दी थी। इस मामले में राज्यपाल ने सीएम ममता बनर्जी से सवाल पूछा है कि अनुमति के बाद भी राजभवन में हिंसा के पीड़ितों के प्रवेश पर रोक क्यों लगाई गई।
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पश्चिम बंगाल के राज्यपाल सीवी आनंद बोस ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखा है। उन्होंने सवाल पूछा है कि आखिर किस आधार पर पुलिस ने हिंसा के पीड़ितों के राजभवन में प्रवेश पर रोक लगाई? उन्होंने लिखा है कि इसके लिए राजभवन की तरफ से पहले ही अनुमति दी गई थी।
राज्यपाल ने हिंसा के पीड़ितों से की मुलाकात
सीवी आनंद बोस ने इसके बाद बड़ाबाजार के माहेश्वरी भवन का भी दौरा किया। इस दौरान उन्होंने लोकसभा चुनाव के बाद हिंसा के पीड़ितों से भी मुलाकात की। बता दें कि भारतीय जनता पार्टी ने तृणमूल कांग्रेस पर हिंसा के आरोप लगाए हैं। हालांकि, राज्य की सत्ताधारी पार्टी ने इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है।
इस मामले से जुड़े एक अधिकारी ने कहा कि राज्यपाल ने पीड़ितों से मुलाकात के लिए लिखित में अनुमति दी थी। भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी और पीड़ितों को मुलाकात की अनुमति दी गई थी कि राजभवन जाकर राज्यपाल से मुलाकात करें। इसके बाद भी पुलिस ने उनके प्रवेश पर रोक लगा दी। अधिकारी ने आगे बताया कि राज्यपाल ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी को संवैधानिक निर्देश जारी कर यह जानना चाहा कि पीड़ितों को मिलने से क्यों रोका गया।
VIDEO | “There is a dance of death, a macabre, which is happening in many pockets of West Bengal. During the Panchayat elections, I saw it with my own eyes. During this (Lok Sabha 2024) election also, there were many instances of violence. This cannot go on,” says West Bengal… pic.twitter.com/Jilat9rpWo
— Press Trust of India (@PTI_News) June 14, 2024
पुलिस ने लगाई थी रोक
गुरुवार को पुलिस ने भाजपा नेता सुवेंदु अधिकारी और चुनाव बाद हिंसा के कथित पीड़ितों को सीआरपीसी की धारा 144 का हवाला देते हुए राजभवन में प्रवेश करने से रोका था। सीवी आनंद बोस ने ममता बनर्जी को लिखे पत्र में संवैधानिक मानदंडों का भी हवाला दिया। संवैधानिक नियमों के तहत मुख्यमंत्री को राज्य मामलों के प्रशासन और कानून से संबंधित फैसलों के बारे में राज्यपाल को सूचित करना आवश्यक होता है।