{"_id":"66b0ec2d0a81ba34d801dc2b","slug":"wayanad-disaster-result-of-illegal-human-habitats-mining-allowed-by-kerala-bhupender-yadav-2024-08-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Wayanad Landslides: 'वायनाड में आपदा अवैध मानव बस्तियों का परिणाम', भूपेंद्र यादव ने केरल सरकार पर साधा निशाना","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Wayanad Landslides: 'वायनाड में आपदा अवैध मानव बस्तियों का परिणाम', भूपेंद्र यादव ने केरल सरकार पर साधा निशाना
Mon, 05 Aug 2024 08:43 PM IST
निर्मल कांत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: निर्मल कांत
Updated Mon, 05 Aug 2024 08:43 PM IST
सार
Wayanad Landslides: वायनाड में भूस्खलन को लेकर केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने कहा कि केरल सरकार ने मानव बस्तियों को बसने की अनुमति देते समय मिट्टी की स्थलाकृति, चट्टान की स्थिति, भू-आकृति विज्ञान और पहाड़ी ढलानों व वनस्पति संरचना जैसे महत्वपूर्ण पर्यावरणीय कारकों की उपेक्षा की।
विज्ञापन
केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव
- फोटो : एएनआई (फाइल)
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
केरल सरकार ने राज्य के पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्र में अवैध मानव बस्तियों के विस्तार और खनन की अनुमति दी, जिससे वायनाड जिले में विनाशकारी भूस्खलन की घटना हुई। केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने सोमवार को यह बात कही।
विज्ञापन
यादव ने पत्रकारों से बात करते हुए आरोप लगाया कि राज्य सरकार ने मानव बस्तियों की अनुमति देते समय मिट्टी की स्थलाकृति, चट्टान की स्थिति, भू-आकृति विज्ञान और पहाड़ी ढलानों व वनस्पति संरचना जैसे महत्वपूर्ण पर्यावरणीय कारकों की उपेक्षा की। उन्होंने कहा कि अत्यधिक बारिश के कारण यह घटना हुई। मंत्री ने कहा कि हिमालय की तरह पश्चिमी घाट भी देश के सबसे नाजुक क्षेत्रों में से एक हैं। उन्होंने ऐसी आपदाओं को रोकने के लिए ठोस प्रयास करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, केरल सरकार भी इसे सुनिश्चित करने के लिए जिम्मेदार है।
विज्ञापन
यादव ने कहा कि गैर-वन भूमि पर अवैध खनन, अनियंत्रित निर्माण और अनियमित वाणिज्यिक गतिविधियां ऐसी घटनाओं के पीछे प्रमुख कारक हैं। उन्होंने कहा कि पर्यावर मंत्रालय ने मार्च 2014 से छह मसौदा अधिसूचनाएं जारी कर छह राज्यों में पश्चिमी घाट के 56800 वर्ग किलोमीटर से अधिक क्षेत्र को पर्यावरण के लिहाज से संवेदनशील घोषित किया है। हालांकि, राज्यों की आपत्तियों के कारण अंतिम अधिसूचना अभी भी लंबित है। अप्रैल 2022 में स्थापित एक विशेषज्ञ समिति समाधान ढूंढने के लिए राज्यों के साथ मिलकर काम कर ही है।
विज्ञापन
केंद्रीय मंत्री ने आगे कहा, वनों का स्वामित्व राज्यों के पास है, इसलिए हमने उनसे पूर्व वन महानिदेशक संजय कुमार की अगुवाई वाली समिति को अपनी आपत्तियां और सुझाव देने को कहा था। उन्होंने कहा, स्थानीय हितधारकों के साथ भी परामर्श होना चाहिए था। ऐसा करने के बजाय अवैध रूप से मानव आवास विस्तार और खनन की अनुमति दी गई। जिसके चलते वायनाड में प्राकृतिक आपदा आई। उन्होंने यह भी कि स्पष्ट किया कि पर्यावरण मंत्रालय ने पिछले एक दशक में वायनाड में किसी भी विकास परियोजना को मंजूरी नहीं दी है। उन्होंने कहा, कोझिकोड में केवल कल्लाडी से मेप्पडी तक एक जुड़वा सुरंग के निर्माण की अनुमति दी गई है। लेकिन निर्माण अभी तक शुरू नहीं हुआ है।