पवार के खेतों में जाएगा सूखाग्रस्त सोलापुर-सातारा का पानी
महाराष्ट्र में तीन दलों की महाविकास आघाड़ी सरकार पूर्ववर्ती फडणवीस सरकार के फैसले को बदलने का रिकार्ड बना रही है। ताजा मामला पानी का है। राज्य सरकार ने सोलापुर और सातारा के सूखाग्रस्त क्षेत्र का पानी बारामती को देने का फैसला किया है जबकि फडणवीस सरकार ने बारामती को अतिरिक्त पानी देने पर रोक लगा दी थी। भाजपा ने इस फैसले पर सरकार की खिंचाई की है।
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बारामती एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार का गढ़ है। यहां से उनकी पुत्री सुप्रिया सुले सांसद और बारामती विधानसभा सीट से उनके भतीजे उपमुख्यमंत्री अजीत पवार विधायक हैं। पिछले साल जून महीने में फडणवीस सरकार ने पुणे जिले के बारामती, इंदापुर और पुरंदर में नीरा देवघर बांध के पानी की आपूर्ति बंद कर दी थी।
इसके पीछे दलील दी गई थी कि यह क्षेत्र बांध के अधिसूचित कमांड क्षेत्र के बाहर स्थित है। लेकिन सत्ता में लौटते ही राज्य मंत्रिमंडल ने प्रस्ताव पारित कर बारामती को पानी बहाल कर दिया। सरकार का तर्क है कि इससे इंदापुर और पुरंदर इलाके के उद्योग, कृषि, चीनी कारखानों एवं बागवानी को फायदा होगा। वहीं भाजपा का कहना है कि सरकार अब सुप्रिया के 10 एकड़ जमीन पर बैंगन की खेती से 113 करोड़ रूपए निकालने में मदद कर रही है।
10 लाख जनता पर अन्याय -निंबालकर
माढ़ा से भाजपा सांसद रणजीत सिंह नाइक निंबालकर ने कहा कि एनसीपी सुप्रीमो शरद पवार पहले भी इस क्षेत्र के हिस्से का पानी बारामती ले जाते रहे हैं। सत्ता में आने के बाद फिर से वही निर्णय हुआ है। इसके खिलाफ आंदोलन करेंगे और अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे। उन्होंने कहा कि नीरा देवघर और गुंजवणी बांध से 55 फीसदी पानी बाईं तट नहर से बारामती को दिए जाने से सूखाग्रस्त फलटण, मालशिरस, पंढरपुर, सांगोला, सोलापुर व सातारा की 10 लाख जनता के साथ अन्याय होगा।