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भारत के पनबिजली परियोजना से पाक में सूखा, भारत आया पाकिस्तानी प्रतिनिधि मंडल

Sun, 27 Jan 2019 06:43 PM IST
Shani Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shani Mishra Updated Sun, 27 Jan 2019 06:43 PM IST
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Water crisis stress to increase between arch rivals india pakistan indus river treaty
Water crisis - फोटो : AP Photo
भारत और पकिस्तान के रिश्ते काफी समय से सर्द बने हुए है। दोनों देशों के बीच अब पानी को लेकर तनाव बढ़ने की आशंका है। पकिस्तान की आर्थिक राजधानी कराची समेत कई शहर पानी की कमी का सामना कर रहे हैं। स्थानीय लोग पानी के लिए मिलों का सफर तय कर करने को मजबूर हैं। भारत के सीमावर्ती इलाकों में  के अनुसार तीन-चौथाई लोगों के पास साफ पानी नहीं है। देश का 70 फीसदी पानी प्रदूषित हो चुका है। 
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ताजा विवाद चेनाब नदी पर भारत के हाइड्रो प्रोजेक्ट के बाद हुआ है जिसपर पकिस्तान ने आपत्ति दर्ज कराई है। पकिस्तान इस पनबिजली परियोजना को जल संधि का उल्लंघन बता रहा है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पहले ही इस परिजोना के निर्माण में प्रतिबद्धता जाता चुके हैं।
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वॉशिंगटन में वूड्रो विल्सन सेंटर में साउथ एशिया मामलों के सीनियर एसोसिएट माइकल कुगेलमैन ने एक ईमेल के जवाब में कहा कि दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ने के कारण सिंधु जल संधि की यह सबसे बड़ी परीक्षा साबित होगी। हालांकि, इस समय भारत और पाकिस्तान के रिश्ते स्थिर हैं और कुछ हद तक सकारात्मक भी दिख रहे हैं। 
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पानी को हथियार बनाएगा भारत

स्वीडन की उप्सला यूनिवर्सिटी में स्कूल ऑफ इंटरनेशनल वॉटर कोऑपरेशन के प्रोफेसर अशोक स्वैन का कहना है कि अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी दोबारा चुनाव जीतकर प्रधानमंत्री बनते हैं तो संभावना है कि वह पानी को हथियार बनाएं। पाकिस्तान के साथ संबंध खराब हुए तो वर्ष 2020-21 में इसे पाकिस्तान को घुटनों पर लाने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।

भारत पाकिस्तान में अबतक तीन युद्ध लड़े गए हैं मगर सिंधु जल संधि के कारण अब तक दोनों देशों ने पानी को लेकर कोई जंग नहीं लड़ी है। पानी के मसले पर चर्चा के दौरान पिछले साल पाकिस्तानी फौज के प्रवक्ता मेजर जनरल आसिफ गफूर ने कहा था, भविष्य में होने वाली जंग इन्हीं मुद्दों पर लड़ी जाएगी।  जानकारों के मुताबिक पानी जैसे प्राकृतिक संसाधन के मुद्दे पर बिगड़ते हालातों का दक्षिण एशिया ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया पर असर पड़ेगा। पकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान पकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में दो बड़े बांध के निर्माण के लिए 17 अरब डॉलर की राशि जुटाने के प्रयास में लगे हैं।
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भारत आ रहा पाक का प्रतिनिधि मंडल

विवाद के बीच पकिस्तान का एक प्रतिनिधि मंडल 28 से 31 जनवरी के बीच निरीक्षण करने के लिए जम्मू-कश्मीर के चेनाब बेसिन का दौरा करेगा। 

पाकिस्तान के सिंधु (नदी) आयुक्त सैयद मोहम्मद मेहर अली शाह अपने दो सलाहकारों के साथ भारत आ सकते हैं।  सिंधु जल संधि दोनों देशों के आयुक्तों को सिंधु बेसिन के दोनों ओर के क्षेत्र का पांच साल में एक बार निरीक्षण करने का अधिकार प्राप्त है। 1961 के बाद से अबतक दोनों तरफ आयोग की अब तक ऐसी 118 यात्राएं हो चुकी हैं। 

क्या है सिंधु जल संधि

12 जनवरी 1961 को भारत के तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और पाकिस्तान के तत्कालीन राष्ट्रपति अयूब खान ने सिंधु जल संधि पर दस्तखत किए थे। संधि की शर्तेों के तहत छह नदियों के पानी का बंटवारा तय हुआ था जो भारत से पाकिस्तान जाती हैं। इसके  तीन पूर्वी नदियों रावी, व्यास और सतलज के पानी पर भारत का पूरा हक दिया गया जबकि तीन पश्चिमी नदियों झेलम, चिनाब, सिंधु के पानी के बहाव को बिना बाधा पाकिस्तान को देने का फैसला हुआ था।
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