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Climate Change: चेतावनी है बेमौसम बरसात, आ सकती हैं बड़ी आपदाएं
Sat, 01 Apr 2023 06:22 AM IST
Jeet Kumar
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली।
Published by: Jeet Kumar
Updated Sat, 01 Apr 2023 06:22 AM IST
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विस्तार
मौसम विज्ञानी और कृषि-विशेषज्ञों का कहना है कि मार्च के महीने में जिस तरह से गर्मी, ठंडी और बरसात, तीनों ही ऋतुएं देखने को मिली हैं, वह जलवायु परिवर्तन के चलते हुआ है। बिना मौसम के बारिश होना पर्यावरण की चेतावनी है कि पर्यावरण संरक्षण की तरफ अगर मनुष्य ने अब भी ध्यान नहीं दिया तो कई प्राकृतिक आपदाएं जन्म ले सकती हैं। क्लाइमेट चेंज और तापमान वृद्धि के कारण बेमौसम बारिश और अचानक ठंड पड़ रही है।
मालूम हो कि बेमौसम बरसात ने उत्तरी भारत के राज्यों को बुरी तरह प्रभावित किया है। इससे कई राज्यों में कटाई के लिए तैयार लाखों हेक्टेयर फसलें तबाह हो गईं। एक अनुमान के अनुसार यूपी, हरियाणा व पंजाब में करीब 2 हजार करोड़ का नुकसान हुआ है। भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) के अनुसार मार्च के महीने में गर्मी के बाद अचानक बारिश और ठंड पश्चिमी-विक्षोभ की वजह से है।
एक पश्चिमी-विक्षोभ के सक्रिय होने के बाद दिल्ली-एनसीआर के अलावा उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और गुजरात में मौसम ने करवट ले ली है। आश्चर्यजनक रूप से मार्च के महीने में छह पश्चिमी-विक्षोभों ने भारत के मौसम को प्रभावित किया। कई मौसम प्रणालियां, चक्रवाती परिसंचरण, वायुमंडल में घूमती हवाएं व वायुमंडल की सबसे निचली परत की हलचल भी मौसम बदलाव के लिए जिम्मेदार हैं।
जलवायु परिवर्तन के लिए मानव जिम्मेदार
दुनियाभर में जितनी तेजी से जलवायु परिवर्तन हो रहा है उसके लिए मानव ही जिम्मेदार है। अनियंत्रित वातानुकूलित यंत्रों का इस्तेमाल, तेल, गैस और कोयले का बेहिसाब इस्तेमाल जलवायु पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।
सदी के अंत तक 2 डिग्री बढ़ सकता है तापमान
विशेषज्ञों का दावा है कि 19वीं सदी की तुलना में धरती का तापमान लगभग 1.2 डिग्री सेल्सियस अधिक बढ़ चुका है और वातावरण में कार्बन डाईऑक्साइड की मात्रा में भी 40 फीसदी तक इजाफा हुआ है। अगर हमें जलवायु परिवर्तन के दुष्परिणामों से बचना है तो तापमान वृद्धि के कारकों को नियंत्रित करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे ताकि धरती की तापमान वृद्धि धीमी हो। वैज्ञानिकों का कहना है कि ग्लोबल वार्मिंग को वर्ष 2100 तक 1.5 डिग्री सेल्सियस बनाए रखने की जरूरत है। अगर इस दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए तो सदी के अंत तक धरती का तापमान 2 डिग्री सेल्सियस से अधिक बढ़ सकता है।
महासागरों और इसके जीवतंत्र पर भी खतरा...
अगर पृथ्वी का तापमान यूं ही बढ़ता रहा तो कुछ क्षेत्र निर्जन हो सकते हैं। खेत रेगिस्तान में तब्दील हो सकते हैं। कुछ इलाकों में बेमौसम भारी बारिश के कारण फसलें तबाह हो जाएंगी और बाढ़ आ सकती है। जलवायु परिवर्तन पर अंतर सरकारीय पैनल (आईपीसीसी) रिपोर्ट मानवता के लिए खतरे की घंटी है। तापमान वृद्धि से महासागरों और इसके जीवतंत्र पर भी खतरा मंडरा रहा है।
प्राकृतिक कारण भी जिम्मेदार
भूवैज्ञानिक रिकॉर्ड बताते हैं कि घोर मानवीय लापरवाही के साथ-साथ प्राकृतिक कारणों से भी जलवायु में कई बड़े बदलाव हुए हैं। जिनमें ज्वालामुखियों से उत्सर्जन, पृथ्वी की कक्षा में भिन्नता, सूर्य में आंशिक परिवर्तन और बढ़ता कार्बन डाईऑक्साइड का बढ़ता स्तर शामिल है।