कर्जदार किसानों और निवेशकों पर राहत की बौछार, माफ होगा 660.50 करोड़ का ब्याज
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नोटबंदी के कारण नकदी संकट से जूझ रहे किसानों और निवेशकों के लिए केंद्रीय कैबिनेट ने सरकार की कई राहत भरी घोषणाओं को मंजूरी दे दी है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई कैबिनेट की बैठक में किसानों के अल्पकालीन फसल कर्ज पर नवंबर-दिसंबर महीने का 660.50 करोड़ रुपये का ब्याज माफ करने का फैसला किया गया।
इसके अलावा को-ऑपरेटिव बैंकों का वित्तीय खर्च उठाने के लिए नाबार्ड को 400 करोड़ रुपये का अनुदान देने की भी मंजूरी मिल गई।
ग्रामीण क्षेत्रों में सस्ते होम के लिए ईएमआई (मासिक किस्त) का बोझ कम करने के मकसद से केंद्र ने सभी निवेशकों को दो लाख रुपये के कर्ज पर 3 प्रतिशत ब्याज सब्सिडी को भी मंजूरी दे दी।
सस्ते ब्याज पर कर्ज देने की यह योजना प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत नहीं आएगी। केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री नरेंद्र सिंह तोमर ने कहा, ‘सरकार वर्ष 2022 तक सभी को मकान मुहैया कराने का लक्ष्य रखती है।
ब्याज में कटौती से न सिर्फ गरीबों की ईएमआई कम होगी बल्कि उन्हें पहले से बने घर को बढ़ाने या मरम्मत करने में भी मदद मिलेगी।’
ब्याज कटौती योजना के लिए 15 हजार करोड़ रुपये जारी
कृषि मंत्री ने बताया कि ब्याज कटौती योजना (आईएसएस) लागू करने के लिए 2016-17 के दौरान आवंटित कुल 15 हजार करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं।
उन्होंने बताया कि सरकार सालाना 7 प्रतिशत ब्याज पर किसानों को 3 लाख रुपये तक का अल्पकालीन कर्ज मुहैया करती है। यदि किसान निर्धारित अवधि में कर्ज का भुगतान कर देता है तो उन्हें 3 प्रतिशत अतिरिक्त ब्याज माफी का लाभ दिया जाता है।
वर्ष 2016-17 के लिए सरकार ने 9 लाख करोड़ रुपये का कृषि कर्ज देने का लक्ष्य तय किया है जिनमें से 7.56 लाख करोड़ रुपये का कर्ज सितंबर तक दिया जा चुका है।
हालांकि कैबिनेट के सदस्यों में अप्रवासी भारतीयों की मताधिकार सुविधा के लिए के लिए निर्वाचन कानून में संशोधन को लेकर मतभेद रहा।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, कैबिनेट बैठक के एजेंडे में जनप्रतिनिधि कानून में संशोधन का भी प्रस्ताव था लेकिन इस पर सहमति नहीं बन पाई।
आईआईएम को डिग्री देने का अधिकार बिल मंजूर
केंद्रीय कैबिनेट ने भारतीय प्रबंधन संस्थान (आईआईएम) विधेयक, 2017 को भी मंजूरी दे दी है। इसके तहत अब प्रबंधन संस्थान अपने छात्रों को डिग्री दे सकते हैं और इन्हें राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों में शुमार किया जा सकता है।
कैबिनेट की मंजूरी के बाद अब इस बिल को बजट सत्र के दौरान संसद में पेश किया जाएगा। अभी तक ये संस्थान छात्रों को प्रबंधन में पोस्ट ग्रैजुएट डिप्लोमा और फेलो प्रोग्राम ही दे पाते हैं जो क्रमश: एमबीए और पीएचडी के समतुल्य तो होते हैं लेकिन इन्हें वैश्विक स्तर की मान्यता नहीं है। इस विधेयक के पारित होने से प्रबंधन संस्थानों को पूर्ण स्वायत्तता और जिम्मेदारी मिल जाएगी।
खास बात यह है कि आईआईटी काउंसिल की तर्ज पर आईआईएम में कॉर्डिनेशन फोरम बनाया जाएगा। हालांकि आईआईटी काउंसिल की तरह आईआईएम कॉर्डिनेशन फोरम में मानव संसाधन विकास मंत्री इसके अध्यक्ष नहीं होंगे।
वहीं, बिल में फोरम और गवर्नेंस में महिलाओं को सदस्य के रूप में शामिल करना अनिवार्य किया गया है। वहीं फेकल्टी में आरक्षण की कोशिश की बात भी बिल में रखी गई है।
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अत्याधुनिक प्रदर्शनी केंद्र बनेगा प्रगति मैदान
राष्ट्रीय राजधानी स्थित प्रगति मैदान को विश्व स्तरीय एकीकृत प्रदर्शनी और सम्मेलन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा।
कैबिनेट बैठक में इसके अत्याधुनिकीकरण के लिए 2,254 करोड़ रुपये के खर्च को मंजूरी दी गई है। इसका पहला चरण लगभग ढाई वर्ष में पूरा हो जाने की उम्मीद है।
क्योटो प्रोटोकॉल की दूसरी अवधि शुरू करने को मंजूरी
कैबिनेट ने क्योटो प्रोटोकॉल के मुताबिक ग्रीनहाउस गैसों का उत्सर्जन सीमित करने की दूसरी अवधि की शुरुआत करने को मंजूरी दे दी। अंतरराष्ट्रीय संधि के तहत इस प्रोटोकॉल की दूसरी अवधि शुरू करने के लिए अब तक 65 देशों ने अपनी सहमति दी है।