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हर्ड इम्युनिटी के लिए अभी करना होगा इंतजार, विशेषज्ञों के मुताबिक सामुदायिक संक्रमण की शुरुआत हो गई  

Tue, 09 Jun 2020 09:19 PM IST
मुकेश कुमार झा अमित शर्मा, नई दिल्ली
अमित शर्मा, नई दिल्ली Published by: मुकेश कुमार झा Updated Tue, 09 Jun 2020 09:19 PM IST
सार

दिल्ली-मुंबई में कोरोना के तेज मामलों को सामुदायिक संक्रमण का संकेत मान रहे वैज्ञानिक, लेकिन छह महीने तक में हर्ड इम्युनिटी आने की उम्मीद          
 

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Wait for herd immunity now, according to experts community spread has started
फाइल फोटो - फोटो : ANI

विस्तार

केंद्र और राज्य सरकारें अभी यह स्वीकार नहीं कर रही हैं कि देश में कोरोना की सामुदायिक संक्रमण की शुरुआत हो गई है, लेकिन विशेषज्ञों का कहना है कि मुंबई और दिल्ली में जिस प्रकार से कोरोना के मामले बढ़ रहे हैं और बहुत सारे मामलों में संक्रमण के स्रोत का पता नहीं चल रहा है, वह इस बात का संकेत है कि देश में सामुदायिक संक्रमण की शुरुआत हो चुकी है।

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सामुदायिक संक्रमण से कोरोना के मामले तेजी से बढ़ेंगे जो देश को हर्ड इम्युनिटी की तरफ ले जा सकते हैं जो लोगों को कोरोना से बचाने में उपयोगी साबित हो सकता है। हर्ड इम्युनिटी आने में दो से छह माह तक का समय लग सकता है। 
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बीएस इंस्टीटयूट ऑफ पैलियोसाइंसेज की आनुवांशिकी शाखा के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉक्टर नीरज राय के मुताबिक़ सरकार के द्वारा लॉक डाउन खोलने को लोग केवल आवश्यक कार्यों तक सीमित रखने की बजाय सभी कार्यों के लिए बाहर निकलने के लिए ले रहे हैं।
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यही कारण है कि लॉक डाउन खोलते ही कोरोना के मामले तेजी से बढ़ रहे हैं। आने वाले कुछ समय में यह तेजी लगातार बढ़ सकती है। उन्होंने कहा कि अगर लॉक डाउन खोलते समय जनता को ज्यादा कड़ी चेतावनी दी गई होती तो उसका बेहतर परिणाम निकल सकता था।   

लोगों के आवागमन की तेजी के हिसाब से अगले दो से छह माह के बीच यही सामुदायिक संक्रमण देश को हर्ड इम्युनिटी की तरफ ले जा सकती है जो लोगों को कोरोना से बचाने में मददगार साबित हो सकती है। लेकिन इस स्तर तक पहुंचने के लिए लगभग 60 फीसदी आबादी के कोरोना संक्रमित होने तक का इंतज़ार करना पड़ेगा। इस स्तर तक पहुंचने में बड़ी संख्या में लोगों की जान भी जा सकती है। 

 
सामुदायिक संक्रमण और हर्ड इम्युनिटी

तकनीकी भाषा में सामुदायिक संक्रमण उस स्थिति को कहा जाता है जिसमें किसी संक्रामक रोग के फैलने का वाहक समाज के ही लोग बनने लगते हैं। यानी आसपास रहने वाले लोग अनजाने में ही एक दूसरे को संक्रमित करने लगते हैं। ऐसी स्थिति आने पर संक्रमण तेजी से फैलता है। ऐसे मामलों में कई बार संक्रमण के पीछे की कड़ी खोजना भी मुश्किल होता है।    

जब सामुदायिक संक्रमण तेजी से फैलने लगता है और समाज के 60 फीसदी या इससे अधिक लोगों को संक्रमित कर देती है तब लोगों में उस बीमारी के प्रतिरोध की क्षमता पैदा हो जाती है। इसे ही हर्ड इम्युनिटी कहा जाता है।



वैज्ञानिकों का मानना है कि हर्ड इम्युनिटी आने पर लोगों में रोगनाशक एंटीबॉडी तत्वों का निर्माण हो जाता है। ऐसे लोगों के संपर्क में आने से वायरस खत्म या निष्क्रिय हो जाता है। वायरस के धीरे-धीरे नष्ट होने से इसके संक्रमण की दर घटने लगती है और यह अन्य स्वस्थ लोगों को बीमार नहीं बना पाता है।  

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