{"_id":"5d0fd05d8ebc3e2ad6490459","slug":"wage-code-bill-cabinet-can-give-approval-next-week","type":"story","status":"publish","title_hn":"वेज कोड बिल: अगले सप्ताह कैबिनेट दे सकती है मंजूरी","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
वेज कोड बिल: अगले सप्ताह कैबिनेट दे सकती है मंजूरी
Mon, 24 Jun 2019 12:54 AM IST
Avdhesh Kumar
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Avdhesh Kumar
Updated Mon, 24 Jun 2019 12:54 AM IST
विज्ञापन
सांकेतिक तस्वीर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
श्रम मंत्रालय अगले सप्ताह वेतन संहिता विधेयक (वेज कोड बिल) को कैबिनेट के समक्ष मंजूरी के लिए रख सकता है। एक सूत्र ने बताया, मंत्रालय विधेयक को संसद के मौजूदा सत्र में ही पारित कराना चाहता है। पिछली लोकसभा के भंग होते ही यह विधेयक निरस्त हो गया था। अब मंत्रालय को इसे संसद में पेश करने के लिए केंद्रीय कैबिनेट की मंजूरी लेनी होगी।
विज्ञापन
सूत्रों के मुताबिक कैबिनेट इसे अगले माह मंजूरी दे सकती है। इस महीने की शुरुआत में ही श्रम मंत्री संतोष गंगवार ने कहा था कि मंत्रालय का इस विधेयक को मौजूदा संसद सत्र में पारित कराने पर जोर रहेगा।
विज्ञापन
पूर्व में यह विधेयक 10 अगस्त 2017 को लोकसभा में पेश हुआ था। इसके बाद 21 अगस्त 2017 को इसे संसद की स्थायी समिति के पास भेज दिया। पैनल ने पिछले साल 18 दिसंबर को अपनी रिपोर्ट सौंपी थी।
विज्ञापन
वेतन संहिता विधेयक सरकार द्वारा बनाई चार संहिताओं में से एक है। यह चार संहिताएं पुराने 44 श्रम कानूनों का स्थान लेंगी। सरकार ने यह कदम व्यापार सुविधा बढ़ाने और अधिक निवेश आकर्षित करने के लिए उठाया है। चारों संहिताएं वेतन, सामाजिक सुरक्षा, औद्योगिक सुरक्षा व कल्याण और औद्योगिक संबंध के लिए कार्य करेंगी।
वेज कोड बिल वेतन भुगतान कानून 1936, न्यूनतम वेतन कानून 1948, बोनस भुगतान कानून 1965 और समान पारिश्रमिक कानून 1976 की जगह लेगा।
इसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार रेलवे और खनन समेत कुछ निश्चित सेक्टरों के लिए न्यूनतम वेतन तय करेगी। राज्य सरकारें रोजगार की अन्य श्रेणियों के लिए न्यूनतम वेतन निर्धारण के लिए स्वतंत्र होंगी। बिल के मसौदे में न्यूनतम वेतन को हर पांच साल में संशोधित करने का प्रावधान भी है।