Visva Bharati Case: कुलपति बोले- अमर्त्य सेन से भूमि वापस जरूर लेगा विश्वभारती, कानून सभी के लिए समान
विश्वभारती के कुलपति बिद्युत चक्रवर्ती ने कहा कि भूमि के अतिक्रमण का समर्थन नहीं किया जा सकता है और कानून सभी के लिए समान होना चाहिए।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
विश्वभारती विश्वविद्यालय और नोबेल पुरस्कार विजेता अमर्त्य सेन के बीच चल रहा भूमि विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। विश्वभारती के कुलपति बिद्युत चक्रवर्ती ने कहा है कि विश्वविद्यालय अमर्त्य सेन से भूमि को वापस लेने के लिए कानूनी रूप से कदम उठाएगा। पत्र में उन्होंने कहा कि भूमि के अतिक्रमण का समर्थन नहीं किया जा सकता है और कानून सभी के लिए समान होना चाहिए।
चक्रवर्ती ने गुरुवार को एक खुले पत्र में कहा कि विश्वविद्यालय द्वारा सेन को दिया गया बेदखली नोटिस सार्वजनिक डोमेन में है और विश्वविद्यालय की आलोचना करने वालों से अनुरोध किया जाता है कि वे अपनी टिप्पणी करने से पहले जरूर सोचें और मामले को देखें।
कुलपति ने कहा कि यह कहा गया था कि विश्वविद्यालय का आरोप अमान्य है क्योंकि प्रोफेसर सेन को विवादित भूमि का कानूनी मालिक होने का दावा करने वाले कागजात उन्हें पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री द्वारा दिए गए थे। इस तरह के तर्क निराधार है।
प्रोफेसर अमर्त्य सेन ने राहत के लिए मई की शुरुआत में कलकत्ता उच्च न्यायालय का रुख किया था क्योंकि विश्वविद्यालय ने उन्हें अपने पैतृक शांति निकेतन निवास में 0.13 एकड़ (5,500 वर्ग फुट) जमीन खाली करने का निर्देश दिया था, जिसके जवाब में एचसी ने अंतरिम रोक लगा दी थी।
अपनी याचिका में अर्थशास्त्री अमर्त्य सेन ने तर्क दिया कि अक्तूबर 1943 में, तत्कालीन विश्व-भारती महासचिव रतींद्रनाथ टैगोर ने उनके पिता आशुतोष सेन को 99 साल के पट्टे पर 1.38 एकड़ जमीन दी थी, जिन्होंने बाद में उस पर 'प्रतिची' उनका निवास स्थान का निर्माण किया। सेन ने पहले बेदखली नोटिस के खिलाफ सूरी में एक अदालत का रुख किया था, लेकिन अदालत ने सुनवाई की तारीख 15 मई निर्धारित की, जो विश्वविद्यालय की जमीन खाली करने की समय सीमा के काफी बाद आया।
बता दें कि 1921 में रवींद्रनाथ टैगोर द्वारा स्थापित, विश्वभारती पश्चिम बंगाल का एकमात्र केंद्रीय विश्वविद्यालय है, और प्रधानमंत्री इसके कुलाधिपति हैं।