Karnataka: जामा मस्जिद के पास विहिप ने किया हनुमान चालीसा का पाठ, कार्यकर्ता बोले- कर्नाटक हाईकोर्ट जाएंगे
विहिप के एलान के बाद जिला प्रशासन ने शुक्रवार शाम से रविवार सुबह तक शहर में कर्फ्यू लगा रखा है। इसके बावजूद धारा 144 का उल्लंघन करते हुए शनिवार को बड़ी संख्या में हिंदू कार्यकर्ताओं ने मोटरसाइकिल रैली निकाली।
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विहिप के 'श्रीरंगपटना चलो' अभियान के आह्वान के बाद कर्नाटक के मांड्या में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई थी। इसके बाद भी विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के कार्यकर्ताओं ने जिले के श्रीरंगपटना शहर में प्रदर्शन किया। विहिप के कार्यकर्ताओं ने 'जय श्री राम' के नारे लगाते हुए मस्जिद के पास के एक मंदिर में 'हनुमान चालीसा' और 'राम भजन' का पाठ किया। इस दौरान उन्होंने जामा मस्जिद को हिंदुओं को लौटाने की मांग करते हुए दावा किया कि जामा मस्जिद पहले हनुमान मंदिर था, जिसे 18 वीं शताब्दी के शासक टीपू सुल्तान द्वारा गिरा कर मस्जिद बना दिया गया था।
गौरतलब है कि कर्नाटक में विश्व हिंदू परिषद के ‘श्रीरंगपटना चलो’ के आह्वान के बाद शहर में तनाव का माहौल बना हुआ है। विहिप के इस एलान के बाद जिला प्रशासन ने शुक्रवार शाम से रविवार सुबह तक शहर में कर्फ्यू लगा रखा है। इसके बावजूद धारा 144 का उल्लंघन करते हुए शनिवार को बड़ी संख्या में हिंदू कार्यकर्ताओं ने मोटरसाइकिल रैली निकाली। इस दौरान विहिप कार्यकर्ताओं ने भगवा झंडा लेकर जय श्री राम के नारे भी लगाए।
पुलिस बरत रही सतर्कता
पुलिस ने इसके बारे में बताया कि प्रदर्शनकारी मस्जिद की तरफ मार्च करना चाहते थे,लेकिन उन्हें ऐसा करने से रोक दिया गया था। पुलिस ने आगे बताया कि इलाके में किसी प्रकार की कोई अप्रिय घटना नहीं हुई है। इससे पहले दिन में श्रीराम सेना प्रमुख प्रमोद मुतालिक ने शहर में प्रतिबंध लगाने के लिए सत्तारूढ़ भाजपा सरकार की निंदा की। इसके अलावा वहां के बजरंग दल के एक कार्यकर्ता मंजूनाथ ने बताया कि जामा मस्जिद पहले एक हनुमान मंदिर थी, जिसके गोपुरम (मंदिर टॉवर) को टीपू सुल्तान ने तोड़ दिया था और इसे जामा मस्जिद में बदल दिया गया था।
विहिप कार्यकर्ताओं ने किया दावा
विहिप कार्यकर्ता ने दावा किया कि मस्जिद भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) द्वारा संरक्षित स्मारक है, नियमानुसार, वहां किसी को भी नहीं रहना चाहिए। हालांकि, कुछ बांग्लादेशियों सहित लगभग 100 लोग वहां रहते हैं और वहां एक मदरसा (इस्लामी मदरसा) भी संचालित होता है, जो कानून के खिलाफ है। उन्होंने कहा कि दुख की बात है कि एएसआई और जिला प्रशासन इस पर चुप्पी साधे हुए है।
कार्यकर्ताओं का दावा जाएंगे हाईकोर्ट
उन्होंने आगे कहा कि हम लोग इसके लिए कर्नाटक उच्च न्यायालय का दरवाजा खटखटाएंगे और मस्जिद हिंदुओं को सौंपने का निर्देश देने की मांग करेंगे। प्रदर्शन के दौरान, अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर आंदोलनकारियों को आश्वासन दिया कि उनकी शिकायतों से एएसआई को अवगत कराया जाएगा।